Siva Prasad

Gita Acharan

Bhagavad Gita is a conversation between Lord Krishna and Warrior Arjun. The Gita is Lord's guidance to humanity to be joyful and attain moksha (salvation) which is the ultimate freedom from all the polarities of the physical world. He shows many paths which can be adopted based on one's nature and conditioning. This podcast is an attempt to interpret the Gita using the context of present times. Siva Prasad is an Indian Administrative Service (IAS) officer. This podcast is the result of understanding the Gita by observing self and lives of people for more than 25 years, being in public life.

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Autor

Siva Prasad

Kategorie

Religion

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27. Okt 2026

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95. पाप के समुद्र के लिए ज्ञान रूपी नाव 10.10.2023

कुरुक्षेत्र युद्ध के दौरान अर्जुन का विषाद उसकी इस भावना के कारण है कि वह पाप कर रहा है। उसे लगता है कि अपने शिक्षकों, रिश्तेदारों और दोस्तों को मारना  पाप के अलावा और कुछ नहीं है (1.36) और हमें इस तरह के पापपूर्ण कार्य से दूर हो जाना चाहिए (1.38)। वह इस तथ्य से और भी अधिक परेशान है कि वह और उसके भाई राज्य के लालच में अपने ही भाइयों को मारने की तैयारी कर रहे हैं (1.45)। अर्जुन की इस भ्रांन्ति को द...

68. कथनी और करनी में समानता 08.10.2023

बच्चे दुनिया को समझने, नई बातें, शिष्टाचार, व्यवहार आदि सीखने के लिए अपने माता-पिता की ओर देखते हैं और इसीलिए कहा जाता है कि बच्चे को पालने का सबसे अच्छा तरीका है, कथनी और करनी में समानता का उदाहरण पेश करना। यही निर्भरता जीवन के बाद के चरणों में भी जारी रहती है जहां निर्भरता दोस्तों, शिक्षकों, आकाओं आदि पर हो सकती है। इसका तात्पर्य है कि ऐसे लोग हैं जो हमेशा हम पर निर्भर रहते हैं और मार्गदर्शन के...

68. ఉదాహరణ ద్వారా నేతృత్వం 08.10.2023

ప్రపంచాన్ని అర్థం చేసుకోవడానికి చిన్నపిల్లలు ఎల్లప్పుడూ వారి తల్లిదండ్రుల యొక్క మార్గదర్శకత్వం కోసం చూస్తారు; కొత్త విషయాలు, మర్యాదలు, ప్రవర్తనలు మొదలైన వాటిని నేర్చుకుంటారు. మన మాటలకు, చేతలకు మధ్య సామరస్యముతో వారికి ఉదాహరణగా నిలుస్తూ ఉండడమే పిల్లల్ని పెంచడానికి ఉత్తమ మార్గము. తరువాత స్నేహితులు, ఉపాధ్యాయులు, సలహాదారులు మొదలైన వారిపై ఆధారపడటం కొనసాగుతుంది. అదే విధంగా మన పై ఆధారపడే వ్యక్తులు, మార్గద...

183. Practice Makes a Man Perfect 05.10.2023

Krishna advises, "Fix your mind on Me alone and surrender your intellect to Me. Thereupon, you will always live in Me. Of this, there is no doubt" (12.8). Our mind is trained to continuously divide. This ability helped us protect ourselves by quickly identifying unsafe situations which increased our chance of survival. Hence, fixing the mind, amidst ever changing situations around us, ru...

94. सीखने की कला 03.10.2023

जीवन भर सीखने की क्षमता एक मानवीय अक्षय निधि है। मूल प्रश्न यह है कि कैसे सीखें और क्या सीखें। श्रीकृष्ण कहते हैं, जो ज्ञानी सत्य को जान गए हैं, उनको साष्टांग प्रणाम कर, पूछताछ और सेवा करने से तत्व ज्ञान प्राप्त होगा (4.34)। साष्टांग प्रणाम का अर्थ है विनम्रता, विनयशीलता, दूसरों के दृष्टिकोण को समझने की क्षमता और बुनियादी तौर पर खुले विचारों वाला होना है, जो अहंकार पर काबू पाना है। सवाल करना एक प्...

67. ఆసక్తి, విరక్తి 01.10.2023

అనాసక్తుడై కర్తవ్యకర్మలను ఆచరించు మనుష్యుడు అత్యున్నత స్థితికి చేరుకుంటాడని శ్రీకృష్ణుడు మనకు హామీ ఇస్తున్నారు (3.19). అనాసక్తుడిగా ఆసక్తి, విరక్తి రెండిటిని వదిలివేసిన వాడు; కర్మ ద్వారా మాత్రమే పరిపూర్ణతను పొందినవాడు అయిన జనక మహారాజు ఉదాహరణను ఇస్తారు (3.20). విలాసాలలో నివసించేవాడు, అనేక బాధ్యతలను కలిగి ఉన్న వాడైన మహారాజు కూడా అనాసక్తుడై అన్ని చర్యలను చేయడం ద్వారా స్వతృష్ట స్థితిని పొందగలడనే విషయా...

67. सम्बद्ध और असम्बद्ध 01.10.2023

श्रीकृष्ण हमें विश्वास दिलाते हैं कि अनासक्ति, जो की आसक्ति और विरक्ति को पार करना है, से कर्म करने से व्यक्ति परम अवस्था को प्राप्त करता है (3.19) और राजा जनक का उदाहरण देते हैं, जिन्होंने केवल कर्म से ही सिद्धि प्राप्त की थी (3.20)। श्रीकृष्ण इस बात पर जोर देते हैं कि एक राजा जो विलासिता में डूबा रहता है और उनकी कई जिम्मेदारियां होती हैं, वह भी अनासक्ति से सभी कार्यों को करते हुए सर्वोच्च प्राप्...

182. Dedicating Karmas to Paramatma. 28.09.2023

The brain (cerebrum) is divided into two halves -the right and left hemispheres. Though they work in tandem, the right side of the brain dominates the functions to do with creativity, emotions etc. whereas the left side of the brain dominates analytical and logical functions. When viewed in the context of the Gita, right brain persons get attracted to devotion (bhakti ) while left brain persons to...

93. संतुष्टि ही अमृत 26.09.2023

श्रीकृष्ण ने दो स्थानों (3.9 से 3.15 और 4.23 से 4.32) पर यज्ञ रूपी नि:स्वार्थ कर्म की बात की। वह सावधान करते हैं कि प्रेरित कार्य हमें कर्मबंधन में बांधते हैं और अनासक्ति, जो आसक्ति और विरक्ति के पार है, के साथ करने की सलाह देते हैं (3.9)। वह और भी बताते हैं कि यज्ञ की नि:स्वार्थ कर्म में सर्वोच्च शक्ति  निहित है (3.15) और शुरुआत में, इस शक्ति का उपयोग करके सृष्टा ने सृष्टि की रचना की (3.10)। उन्ह...

66. समर्पण या संघर्ष 24.09.2023

जीने के दो तरीके हैं। एक है समर्पण और दूसरा संघर्ष। समर्पण युद्ध में पराजितों के समर्पण की तरह असहाय समर्पण नहीं है। यह जागरूकता और सक्रिय स्वीकृति के साथ समर्पण है। दूसरों से आगे रहने की सोच ही संघर्ष है। जो हमें दिया गया है उससे अधिक पाने के लिए; और जो हमारे पास है उससे अलग पाने की कोशिश ही संघर्ष है। दूसरी ओर, समर्पण हर जीवित क्षण के लिए कृतज्ञता है। श्रीकृष्ण कहते हैं कि, ‘‘यदि कोई इंद्रियों क...

66. సమర్పణ లేదా సంఘర్షణ 24.09.2023

జీవించడానికి రెండు మార్గాలు ఉన్నాయి. ఒకటి 'సంఘర్షణ', మరొకటి 'సమర్పణ'. సమర్పణ అనేది యుద్ధంలో ఓడిపోయిన వారి లొంగుబాటు వంటి నిస్సహాయత కాదు. ఇది అవగాహనతో, క్రియాశీలమైన అంగీకారంతో సమర్పించుకోవడం. ఇతరులను దాటిపోవాలనుకునే కోరిక; భగవంతుడు మనకిచ్చిన దానికంటే అధికంగా పొందాలనుకోవడం; మన దగ్గర ఉన్నదానికంటే భిన్నమైన దాన్ని కలిగి ఉండాలనుకోవడమే సంఘర్షణ. మరోవైపు, సమర్పణ ప్రతి సజీవ క్షణానికి కృతజ్ఞత...

181. The Starting Point 21.09.2023

Krishna says, "Those who fix their minds on Me, worship ME (in the manifested Form) endowed with Shraddha (trust), I consider them to be the best in yoga" (12.2). Though this answer is specific to Arjun, it broadly applies to all of us. Secondly, Shraddha is the foundation for any spiritual journey. Krishna immediately clarifies that the path of the Formless or Unmanifest is also a path...

संख्या योग 21.09.2023

यह ऑडियो आपको भगवद गीता के अध्याय 2 जिसे सांख्य योग कहा जाता है, के बारे में सब कुछ बताएगा This audio will let you know everything about Chapter 2 of the Bhagavad Gita Called Sankhya Yoga

65. नि:स्वार्थ क्रियाएँ सर्वोच्च शक्ति रखती हैं 17.09.2023

 जल पृथ्वी पर जीवन के लिए आवश्यक है और श्रीकृष्ण नि:स्वार्थ कार्यों को समझाने के लिए वर्षा का उदाहरण देते हैं (3.14)। मूल रूप से, बारिश एक चक्र का हिस्सा है जहां गर्मी के कारण पानी वाष्पित हो जाता है, उसके बाद बादल बनते हैं। सही परिस्थितियों में यह बारिश के रूप में वापस आ जाता है। इस प्रक्रिया में निस्वार्थ कार्य शामिल हैं और श्रीकृष्ण उन्हें यज्ञ कहते हैं। महासागर पानी को भाप में परिवर्तित करके ब...

65. నిస్వార్ధ కర్మలు సర్వోన్నత శక్తిని కలిగి ఉంటాయి 17.09.2023

భూమిపై జీవానికి నీరు చాలా అవసరం. నిస్వార్థ చర్యలను వివరించడానికి శ్రీకృష్ణుడు వర్షాన్ని ఉదాహరణగా ఉపయోగిస్తారు (3.14). వేడి కారణంగా నీరు ఆవిరైపోయి మేఘాలు ఏర్పడతాయి. సరైన పరిస్థితుల్లో అది వర్షంగా తిరిగి వస్తుంది. దీని అర్థం ఏంటంటే వర్షం అనేది చక్రంలోని ఒక భాగం. ఈ ప్రక్రియలోని నిస్వార్ధ కర్మలను, శ్రీకృష్ణుడు 'యజ్ఞం' అని అంటారు. మహాసముద్రాలు నీటిని ఆవిరి చేసి మేఘాలు ఏర్పడడానికి హాయపడతాయి; మేఘ...

92. स्वास के माध्यम से आनंद 17.09.2023

मानव शरीर में कुछ गतिविधियां जैसे दिल की धडक़न स्वचालित होती है, हालांकि वे एक निर्धारित लय का पालन जरूर करती हैं जबकि कुछ गतिविधियों जैसे लिम्बिक सिस्टम को नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन सांस अद्वितीय है क्योंकि यह स्वचालित है और इसे नियंत्रित भी किया जा सकता है। यज्ञ रूपी नि:स्वार्थ कर्म और सांस के सन्दर्भ में, श्रीकृष्ण कहते हैं, कुछ लोग प्राण यानी अंदर आने वाली सांस को अपान यानी बाहर जाने वाल...

180. Form or Formless. 14.09.2023

At the end of the eleventh chapter (11.55), Krishna says that HE can only be reached through Bhakti (devotion). Thus, the revered twelfth chapter of the Bhagavad Gita is called Bhakti Yoga. Arjun was terrified and frightened to see the original Form (saakaar) of Krishna ( Vishwaroopam ) and enquires, "Between those who are steadfastly devoted to You (Form) and those who worship the imperishab...

91. स्वयं का अध्ययन 12.09.2023

‘मन में आग’ होने का अर्थ है भौतिक दुनिया में अपनी इच्छाओं, रुचियों और कर्तव्यों का पालन करने के लिए ऊर्जा और उत्साह से भरा होना। जब ऐसी ऊर्जा का उपयोग आत्म-साक्षात्कार के लिए किया जाता है तो इसे योग-अग्नि कहा जाता है। इस सन्दर्भ में, श्रीकृष्ण कहते हैं कि,  ‘‘दूसरे योगीजन इन्द्रियों की सम्पूर्ण क्रियाओं को और प्राणों की समस्त क्रियाओं को ज्ञान से प्रकाशित आत्मसंयम योगरूप अग्नि में हवन किया करते है...

179. Shifting Goalposts 07.09.2023

A doctor, working at a mental hospital, took a friend to show him the hospital. His friend saw a man in a room with a photo of a woman and the doctor explained that the man loved that woman and got mentally unstable when he couldn't marry her. In the next room, there was another man with the same woman's photo and the doctor explained that he got mentally unstable after he married her. Thi...

90. बलिदान का बलिदान करना 05.09.2023

यज्ञ बलिदान या निस्वार्थ कार्यों का प्रतीक है। इस सन्दर्भ में, श्रीकृष्ण कहते हैं कि, कुछ योगी देवताओं के लिए यज्ञ करते हैं; अन्य लोग बलिदान को ब्रह्म की अग्नि में बलिदान करते हैं (4.25)। जागरूकता के बिना जीने वाले के लिए, जीना सिर्फ चीजों को इकट्ठा करना और उन्हें संरक्षित करना है। जीवन का अगला चरण चीजों, विचारों और भावनाओं का त्याग है। अहंकार के बीजों को मन की उपजाऊ भूमि पर बोने के बजाय आग में बल...

178. Hatred stands between Misery and Joy 02.09.2023

Krishna says, "This form of mine has not been seen before by anyone else than you (11.47). Neither by study of the Vedas, nor by yagnas , nor by gifts, nor by rituals, nor by severe austerities can I be seen in such a form (11.48). Be free from fear and with a cheerful heart, behold Me once again in My personal form" (11.49). Krishna comes to his original form (11.50) and Arjun gets reso...

64. हमेशा अपना सर्वोत्तम करें 31.08.2023

श्रीकृष्ण कहते हैं कि, ‘‘तू नियत कर्तव्य कर्म कर; क्योंकि कर्म न करने की अपेक्षा कर्म करना श्रेष्ठ है तथा कर्म न करने से तेरा शरीर निर्वाह भी नहीं सिद्ध होगा’’ (3.8)। मानव शरीर के अस्तित्व के लिए भोजन का संग्रह और उपभोग जैसी क्रियाएं आवश्यक हैं। इसके अलावा, मानव शरीर में कई अंग, प्रणालियां और रसायन होते हैं जो नियमित रूप से हजारों आंतरिक क्रियाएं करते हैं। यहां तक कि अगर उनमें से कुछ एक छूट जाये,...

64. సర్వోత్తమమైన కృషి చేయండి 31.08.2023

“నీవు శాస్త్ర విహితకర్తవ్యకర్మలను ఆచరింపుము. ఏలనన కర్మలను చేయకుండుట కంటెను చేయుటయే ఉత్తమము. కర్మలను ఆచరింపనిచో నీ శరీర నిర్వహణముగూడ సాధ్యము గాదు” అని శ్రీకృష్ణుడు తత్వాన్ని విశదీకరించారు (3.8). ఆహారాన్ని సేకరించడం, భోజనం చేయడం వంటి చర్యలు మానవ శరీరం యొక్క మనుగడకు అవసరం. మానవ శరీరం అనేక అవయవాలు, వ్యవస్థలు, రసాయనాలను కలిగి ఉంటుంది. ఇవి క్రమం తప్పకుండా వేలాది అంతర్గత చర్యలను చేస్తూ ఉంటాయి. వాటిలో ఒక్...

89. स्वयं को मुक्त करना 29.08.2023

अनासक्ति और वीतराग जैसे कुछ शब्द गीता का मूल उपदेश हैं। जबकि आसक्ति और विरक्ति दो ध्रुव हैं, अनासक्ति का मतलब इन ध्रुवों को पार करना है। इसी तरह, वीतराग न तो राग है और न ही विराग लेकिन दोनों से परे है। ये ध्रुवीयताएं और कुछ नहीं बल्कि अहंकार की झलक हैं और इस अहंकार को छोडऩे पर व्यक्ति सभी द्वंद्वों को पार कर जाता है। यह अवस्था और कुछ नहीं बल्कि मुक्ति है। इस सन्दर्भ में, श्रीकृष्ण कहते हैं, ‘‘जो म...

63. मिथ्या और दम्भ 24.08.2023

यदि हम कर्म के कर्ता नहीं हैं, तो कर्ता कौन है? श्रीकृष्ण जवाब देते हैं कि, कोई भी कर्म किए बिना एक पल भी नहीं रह सकता है क्योंकि सभी को कर्म करने के लिए प्रकृति से पैदा हुए गुणों द्वारा मजबूर किया जाता है (3.5)। तीन परमाणु कण, अर्थात् ‘इलेक्ट्रॉन’, ‘प्रोटॉन’ और ‘न्यूट्रॉन’ पूरे भौतिक संसार की रचना करते हैं। इसी प्रकार, तीन गुण अर्थात सत्व गुण, तमो गुण और रजो गुण  हमें कर्म करने के लिए प्रेरित करत...

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