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Baat - Mulakaat

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जैसा की नाम से जाहिर हे, इस पॉडकास्ट सीरीज में होंगी बातें और मुलाकातें। बातें उन मुद्दों पे जो ज़रूरी हैं लेकिन जिस पर अक्सर बातें नहीं होती या होती हैं तो न के बराबर। बातें उन मुद्दों और विषयों पर भी जिनके बारें में आप जानना चाहते हैं, लेकिन आपको पता नहीं किससे पूछे और किससे बात करें।सुनो इंडिया के इस सीरीज़ "बात-मुलाक़ात" में हम आपकी करवाएंगे मुलाकात ऐसे एक्सपर्ट्स और जानकारों से जो दे सकें आपके सवालों का जवाब और जिनके साथ हो सके ज्वलंत और ज़रूरी मुद्दों पर बातचीत।(As the name suggests, this podcast series will feature conversations and meetings. Conversations on issues which are important but...

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13. Jun 2024

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कामगारों को कैसे निराश कर रही है भारत की गिग इकॉनमी? 13.06.2024

भारत में गिग इकॉनमी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन गिग वर्कर्स को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जनपहल नाम की संस्था ने गिग वर्कर्स पर एक सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी की है जिसमें उनके काम के प्रति दृष्टिकोण को दिखाया गया है। यह रिपोर्ट इन प्रमुख समस्याओं पर विशेष रूप से बात करती है: - दिन भर में लंबे समय तक काम, - कम कमाई, - प्लेटफॉर्म्स द्वारा आईडी की मनमानी ब्लॉकिंग, - सालों काम करने के बाद भी कर्म...

'पढ़ने की आदत भी एक अधिकार है' 29.04.2024

2024 लोक सभा चुनाव के पहले  फ्री लाइब्रेरीज़ नेटवर्क  ने 'द पीपल्स नेशनल लाइब्रेरी पॉलिसी 2024' का एक ड्राफ्ट जारी किया है। इसका मकसद पुस्तकालयों के लिए मानक निर्धारित करना है। फ्री लाइब्रेरीज़ नेटवर्क पूरे दक्षिण एशिया में 250 से अधिक लाइब्रेरीज का एक नेटवर्क है। इस ड्राफ्ट में पुस्तकालयों तक निःशुल्क पहुँच की बात की गयी है। लाइब्रेरीज को बनाना और मेन्टेन करना वर्तनाम में स्टेट लिस्ट का हिस्सा है...

छत्तीसगढ़ के हसदेव अरंड जंगल में विरोध प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं ये आदिवासी? 01.02.2024

21 और 22 दिसंबर 2023 को, छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के अधिकारियों ने हसदेव अरंड जंगल में कोयला खदानों के दूसरे चरण के विस्तार के लिए सैकड़ों हेक्टेयर ज़मीन में हजारों पेड़ों को काट दिया । पिछले एक दशक से आदिवासी छत्तीसगढ़ में 1,500 किमी से अधिक क्षेत्र में फैले हसदेव अरंड जंगलों को बचाने के संघर्ष का हिस्सा रहे हैं। यह क्षेत्र भारत के आदिवासी समुदायों का घर है, जहां घने जंगलों के नीचे अनुमानित पांच...

फोर्टिफाइड चावल - क्यों आदिवासी किसान सरकार द्वारा प्रचारित इस नए चावल को स्वीकार क्यों नहीं कर रहे हैं? 27.12.2023

सरकार राशन के चावल में अब उन्हें “फ़ॉर्टिफ़ायड चावल" मिला कर दे रही हैं। सराकर का दावा है की यह चावल विटामिन और आयरन का पाउडर के चूरे को मिला कर फ़ैक्टरी में तैय्यार किया गया हे। यह चावाल खून की कमी और कुपोषण को ठीक करने में मदद करेगा। डॉक्टर और वैज्ञानिको में अभी तक इस पर सहमति नहीं हैं। यह तीन हज़ार करोड़ के बजट की नयी नीति कितनी कामगार होगी, इस पर लोगों में अभी संदेह हे। “बात मुलाक़ात” के इस एप...

कृषि के असंगठित क्षेत्र में महिलाओं पर कैसे होती है हिंसा? 17.10.2023

कार्यस्थल पर महिलाओं के ख़िलाफ़ हो रहे यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध और निवारण के लिए 2013 में  Protection of Women from Sexual Harassment Act, 2013 (PoSH)  अधिनियम बनाया गया। PoSH अधिनियम कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए नियोक्ताओं पर कानूनी दायित्व डालता है। लेकिन असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं के लिए यह कारगर साबित नहीं होता। बात मुलाक़ात के इस एपिसोड में हम भारतीय कृषि क्षे...

मणिपुर में डॉक्टरों ने राहत शिविरों की स्वास्थ सुविधाओं पर क्यों जताई गंभीर चिंता? 07.09.2023

मणिपुर पिछले चार महीनों से सांप्रदायिक हिंसा की चपेट में है, जिसके चलते हज़ारों मैतेई और कुकी राहत शिविरों में है। गैर सरकारी संगठन इंडियन डॉक्टर्स फॉर पीस एंड डेवलपमेंट (IDPD) के डॉक्टरों की एक टीम ने 1 से 3 सितम्बर के बीच मैतेई और कुकी क्षेत्रों में राहत शिविरों का दौरा किया।  राहत शिविरों का दौरा करने वाले डॉक्टरों के इस समूह ने इनमे रहने वाले लोगों के पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और सामान्य स्वास्थ्य...

भारत में किसान-मज़दूरों को कैसे प्रभावित करती है इंटरनेट बंदी? 27.06.2023

2018 के बाद से, दुनिया के किसी भी अन्य देश की तुलना में भारत में सबसे अधिक बार इंटरनेट बंद किया गया. विरोध प्रदर्शनों से लेकर परीक्षा में नक़ल रोकने तक, भारत में इंटरनेट बंदी होती रहती है. जाहिर है की कई कारणों से सरकारें इंटरनेट बंद करती हैं. लेकिन इंटरनेट का अचानक बंद हो जाना आम लोगों के दैनिक जीवन पर क्या प्रभाव डालता है? ह्यूमन राइट्स वॉच और इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने हाल ही में एक रिपोर्ट में...

बिहार में क्यों उठ रही है शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग? 16.05.2023

बिहार में मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पूर्वी चंपारण जिले के पांच थाना क्षेत्रों में जहरीली शराब से अप्रैल महीने में के तीसरे सप्ताह में कम-से-कम 30 लोगों की मौत हुई. इसके पहले December 2022 में सारण जिले और इसके पड़ोस में हए जहरीली शराब कांड में कम-से-कम 40 लोगों की मौत हुई थी.  बिहार में रह-रह कर होने वाली ऐसी घटनाएं बताती हैं कि बिहार में शराबबंदी का एक समय चक्र पूरा हो चुका है. एक तरफ सरकार शराब...

राजस्थान का Right to Health Bill डॉक्टरों और मरीजों के लिए क्या मायने रखता है? 08.04.2023

राजस्थान Right to Health Bill 21 मार्च, 2023 को पास किया गया। ये बिल मरीजों के अधिकारों पर जोर देता है और इन् अधिकारों के उचित कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए एक तंत्र प्रदान करता है। हालाँकि, 5 अप्रैल को अपनी हड़ताल वापस लेने से पहले 2 सप्ताह से अधिक समय तक निजी डॉक्टरों ने इस विधेयक का विरोध किया है। उन्होंने ने कहा की उनका सरकार के साथ समझौता हो गया हे।  बात मुलाकात के इस एपिसोड में सुनो इ...

हल्द्वानी: भारत में निष्कासन और विध्वंस की राजनीति 22.02.2023

इस एपिसोड में, स्नेहा रिछारिया और सुहेल भट हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में 20 दिसंबर को उच्च न्यायालय द्वारा जारी किए गए निष्कासन आदेश को समझने के लिए हल्द्वानी जाते हैं। इस एपिसोड के ज़रिये हम भारत में निष्कासन और विध्वंस की राजनीति को गहराई से समझने की कोशिश करते हैं. हम यह भी समझने की कोशिश करते हैं कि क्या यह विध्वंस की राजनीति अल्पसंख्यकों को दबाने का एक ज़रिय बन गयी  है? हम इसके पीछे की राज...

मानगढ़ नरसंहार: राजस्थान चुनाव से पहले क्यों सुर्खियां बटोर रहा है 'आदिवासी जलियांवाला बाग'? 20.01.2023

नवंबर 1913 के मानगढ़ नरसंहार में भील जनजाति के लगभग 1,500 लोगों की मौत हुई थी। वे अंग्रेजों और क्षेत्र में रियासतों के शासकों द्वारा आदिवासी लोगों के शोषण के विरोध में वहां एकत्रित हुए थे। ब्रिटिश और भारतीय सेना ने प्रदर्शनकारियों पर हमला किया। इस घटना को आमतौर पर 'आदिवासी जलियांवाला बाग' के रूप में जाना जाता है क्योंकि यह उतना प्रसिद्ध नहीं है। हालाँकि, यह घटना राजस्थान में होने वाले आगामी चुनावो...

Gambia में बच्चों की मौत भारतीय दवा उद्योग के बारे में क्या कहती है? 31.10.2022

Gambia में भारत में बने कफ सिरप पीने के बाद करीब 70 बच्चों की मौत हो गई | WHO ने अलर्ट जारी कर कहा है कि हरयाणा के Maiden Pharmaceuticals Limited में बने कफ सिरप की गुणवत्ता का स्तर काफी ख़राब था | इन samples के laboratory analysis से पता चला है कि चारों उत्पादों में दूषित पदार्थ diethylene glycol  और ethylene glycol बहुत अधिक मात्रा में है | भारत सरकार ने  इस मामले की जांच शुरू कर दी है और Maiden...

मितानिन प्रोग्राम ने मेरी ज़िन्दगी बदल दी (Mitanin program changed my life) 30.09.2022

नवगठित राज्य छत्तीसगढ़ में, मितानिन कार्यक्रम नामक सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता कार्यक्रम ने राज्य के स्वास्थ्य स्तर में सुधार करने में मदद की।  मितानिन कार्यक्रम की शुरुआत, पूरे देश में आशा कार्यकर्ताओं को रखने के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के फैसले से पहले की गई है। बात मुलाकात के इस एपिसोड में मेनका राव ने राज्य के वरिष्ठ मितानिनों में से एक मितानिन मुक्ता कुजूर के साथ बातचीत की। वह छत्तीसगढ़ क...

काम की ज़िंदगी: जब Urban Company, Salon और Spa महिला "गिग वर्कर्स" ने विरोध जता कर हक़ माँगे 30.08.2022

कंपनियों व विशेषज्ञों का मानना है की इंटरनेट अग्ग्रेगेटर कंपनियों के "गिग वर्क" में "फ़्लेक्सिबिलिटी”, या अपनी मर्ज़ी के घंटे उपलब्ध होने के कारण, यह महिलाओं को ख़ास आकर्षित करेगा, और जो महिलायें पहले से घर का ज़्यादातर कार्यभार सम्भालती हों, वह भी इस से आमदनी कमाने के नए अवसर पाएँगी पुरुषों के मुताबिक आज भी महिलायें गिग वर्क में कम संख्या में हैं। जो महिलाएं "प्लाट्फ़ोर्म" या गिग वर्क में आ रही ह...

Independence Day: कैसे एक पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल ने बंटवारे से अलग हुए 200 से अधिक परिवारों को फिर से जोड़ा 14.08.2022

कुछ अनुमानों के अनुसार, भारतीय उपमहाद्वीप के बंटवारे के दौरान 20 लाख  लोग मारे गए और 2 करोड़ से जायदा विस्थापित हुए। इसे मानवता के इतिहास में सबसे बड़े शरणार्थी संकटों में से एक के रूप में वर्णित किया गया है, केवल द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ही स्थिति इससे बदतर थी। बात-मुलाक़ात के इस एपिसोड में, होस्ट सूर्यतपा मुखर्जी यूट्यूब चैनल पंजाबी लहर के पीछे नासिर ढिल्लों से बात करते हैं। नासिर पाकिस्तान के...

आंगनबाड़ियों में बच्चों से आधार कार्ड मांगना उनके अधिकारों के खिलाफ क्यों है? 26.07.2022

केंद्र सरकार आंगनवाड़ी सेवाओं के डिजिटलीकरण की ओर बढ़ रही है। इसका मतलब है कि आंगनवाड़ी सेवाओं से लाभान्वित होने वाले 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को आधार कार्ड की आवश्यकता होगी या उनके माता-पिता को अपना आधार कार्ड प्रदान करना होगा।  बात मुलाकात की इस कड़ी में, हमारे रिपोर्टर सूर्यतापा मुखर्जी ने अंजलि भारद्वाज से इस बारे में बात की।  अंजलि ने हमे बताया कि इससे बच्चों के भोजन के अधिकार में क्या बाध...

काम की ज़िंदगी: Uber में महिला चालक - नयी आत्मनिर्भरता, और कुछ नए तनाव 30.06.2022

भारत में सब से पहले "गिग वर्क" शुरू करने वाले कम्पनियों में नाम आता है ऊबर, ओला का । यह “मोबिलिटी अग्गरेगटर” कम्पनी टैक्सी ऐप के माध्यम से एक टैक्सी चालक और एक यात्री को जोड़ती हैं, जिस में हर राइड के पैसे में से कंपनी एक कमिशन लेती है। ड्राइवर प्रति राइड कमा सकते हैं, और कम्पनी उन्हें अपना कर्मचारी नहीं बल्कि स्वनियोजित कारोबार , या आत्मनिर्भर फ़्रीलांसर का दर्जा देती है। भारत सरकार के नीति आयोग...

काम की ज़िंदगी – तकनीकीकरण में मिला नया काम, लेकिन पुराने दिहाड़ी मजदूर जैसे अधिकार: फ़ूड डिलिव्री वर्कर 25.05.2022

आज के तकनीकीकरण के दौर में हम "Gig Work" या "Platform Work " जैसे नाम बहुत सुनते हैं। इस तरह का काम बहुत सारी एग्रीगेटर कम्पनीज के द्वारा मोबाइल एप्लीकेशन की सहायता से संचालित किया जाता हे। इन् कम्पनीज में "फ़ूड या खाद्य एग्रीगेटर कम्पनी"  जैसे की Zomato, Swiggy, Big Basket के नाम काफी प्रचलित हैं। इस तरह के "Gig Work" के तहत लोगों को लघु या दीर्घ अवधि के लिए काम दिया जाता हे और इन् लोगों का...

बिहार में शराबबंदी: अपने मकसद में कितना कामयाब है यह कानून? (Liquor Prohibition in Bihar: How successful is this law in its purpose) 30.03.2022

2016 में बिहार ने शराब के सेवन और वितरण दोनों को अपराध बनाते हुए शराब पर प्रतिबंध लगा दिया जिसका उल्लंघन करने पर जुर्माने से लेकर कठोर सजा तक का प्रावधान है। हालांकि शराबबंदी के बावजूद प्रदेश में अवैध रूप से अधिक कीमत पर शराब बेची जा रही है, जिससे उपभोक्ता को ज्यादा खतरा है। दूसरी ओर जहरीली शराब से होने वाली मौतों के सिलसिले ने कई लोगों को हैरान कर दिया है और ये सोचने पर मजबूर कर दिया है कि शराबबं...

मज़दूरी थर्ड डिग्री, कहानी शिव कुमार की 31.01.2022

दलित संघठनकर्ता शिव कुमार जिन्होंने बाल मज़दूरी करते हुए पढ़ाई पूरी की हरयाणा के औद्योगिक क्षेत्र् में मज़दूरी, और क़ानूनी व्यवस्था में मज़दूर हक़ों के संघर्ष के घटते दायरे का ज्वलंत विवरण करते है।  सोनीपत के देवरू गाँव के एक भूमिहीन परिवार में जन्मे शिव कुमार की नयी किताब मेहनतकश वर्ग द्वारा पिछले दो सालों में झेली गयी अनेको तरह की हिंसा का एक व्यक्तिगत खाता है – सामाजिक सुरक्षा का आभा...

Doctors’ Strike: क्या कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच अस्पतालों में कर्मचारियों की कमी होगी? 27.12.2021

NEET PG काउंसलिंग में देरी का विरोध कर रहे हैं रेजिडेंट डॉक्टरों ने सोमवार, 27 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की कोशिश की।  जिसके चलते रेजिडेंट डॉक्टरों के कुछ नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है। फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (FORDA) इंडिया ने रेजिडेंट डॉक्टरों की मांग पूरी नहीं होने पर सामूहिक इस्तीफे की धमकी दी है। NEET PG काउंसलिंग में देरी को लेकर मुख्य रूप से राज...

किसान आंदोलन: देश की मौजूदा राजनीति और समाज पर इसका प्रभाव 25.11.2021

पहले एपिसोड में हमने किसान आंदोलन के अब तक के सफर को समझने के लिए बात की थी स्वतंत्र पत्रकार मंदीप पुनिया से। उसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए हम, इस एपिसोड में हम बात करेंगे संयुक्त किसान मोर्चा के नेता कॉमरेड हन्नन मुल्ला और वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह से। और उनसे इस किसान आंदोलन के राजनैतिक और सामाजिक महत्व के बारे में जानने की कोशिश करेंगे। See sunoindia.in/privacy-policy for privacy informatio...

किसान आंदोलन: पिछले एक साल का सफ़र और महत्वपूर्ण घटनाएं 20.11.2021

19 नवंबर, 2021 गुरुनानक जी के जन्मदिन और प्रकाश पर्व पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में तीनों कृषि क़ानूनों को रद्द करने की घोषणा की जिसकी सांवैधानिक कार्यवाही आगामी संसद सत्र में की जाएगी।  फिलहाल इस घोषणा को किसान आंदोलन की एक बड़ी जीत के तौर पर देखा जा सकता है लेकिन 26 नवंबर को दिल्ली की सीमाओं पर एक साल पूरे करने जा रहे किसान आंदोलन की एक ऐतिहासिक यात्रा र...

क्यों घट रहा हे भारतीय नागरिकों का कद? 26.10.2021

PLOS One में हाल के एक अध्ययन में कहा गया है कि भारतीय वयस्कों की औसत ऊंचाई में गिरावट आ रही है।  बात-मुलाक़ात की इस कड़ी में, Suno India की मेनका राव ने इस पेपर के मुख्य लेखक कृष्ण कुमार चौधरी से बात की। कृष्ण कुमार ने हमे बताया कि कैसे दशकों से समुदाय में अच्छे स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता और साफ़ सफाई के संकेतक के रूप में ऊंचाई का उपयोग किया जाता रहा है, और औसत भारतीय ऊंचाई में गिरावट चिंता का...

Online Education: कोरोना काल में कैसे पिछड़े स्कूल जाने वाले बच्चे 30.09.2021

Road scholars ने August 2021 में देश के 15 राज्यों के 1362 परिवारों के सर्वे में  पाया  की  सिर्फ  8% ग्रामीण छात्र  और  19% शहरी  छात्रों ने  नियमित तौर से online classes अटेंड करी हैं। बात मुलाकात की इस मिनी सीरीज के दूसरे एपिसोड में हमने Road Scholars के इस  सर्वे  के  बारे उनकी  शोधकर्ता रीतिका खेरा से बात की।  See sunoindia.in/p...

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