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Padhaku Nitin

Padhaku Nitin is a casual and long conversation-based podcast where Aaj Tak Radio host Nitin talks to experts and discuss a wide range of topics like history, war, politics, policy, ideologies, cinema, travelling, sports, nature and everything that is interesting. A single episode of the show can be as enriching as reading four books. As we say in the podcast,Chaar kitaabe padhne jitna gyaan milega Padhaku Nitin mein. कब कोई हक़ीक़त से मिथक बन जाता है? क्यों कोई कहानी सदियाँ पार करके हमारे सिरहाने आ बैठती है? कुछ नाम तो इंसानों की कलेक्टिव मेमोरी का हमेशा के लिए हिस्सा बन जाते हैं लेकिन पूरी क...

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Episoder

भारत के सबसे बड़े कूटनीतिज्ञ से समझें चीन के सोचने का तरीका: पढ़ाकू नितिन, Ep 134 08.02.2024

चीन आबादी में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा और इलाके में तीसरा सबसे बड़ा देश है लेकिन उसका सपना इकोनॉमी में सबसे बड़ा देश बनना है. दर्जनों विद्वान कहते हैं बन भी जाएगा लेकिन हमारी टेंशन है कि पड़ोस में बसा ये देश हमें बराबरी का दर्जा नहीं देता. और ऐसा होने की वजहें ढेर हैं. कई तो हिस्ट्री में छुपी हैं. 'पढ़ाकू नितिन' इसे ही उघाड़ने आए हैं भारत के 32वें विदेश सचिव और चीन में राजदूत रहे विजय गोखले. Discl...

Parliament Attack की साज़िश का पुलिस अफसर ने कैसे 48 घंटों में खुलासा किया?: पढ़ाकू नितिन, Ep 133 01.02.2024

23 साल पहले भारतीय संसद पर आतंकी हमला हुआ था. इस केस की गुत्थी 48 घंटों में सुलझाई गई और अफ़ज़ल गुरू को फांसी भी इसी केस में हुई. लेकिन इनवेस्टिगेशन को अंजाम कैसे दिया गया? जिस पुलिस अफसर ने मामला खोला उनका नाम है अशोक चांद. 32 सालों में उन्होंने ढेरों हाई प्रोफ़ाइल केस सुलझाए. 13 साल में दो बार आउट ऑफ टर्न प्रमोशन भी उनके हिस्से है. तो आज के 'पढ़ाकू नितिन' में बात करेंगे दिल्ली के रिटायर्ड एडिशनल...

वित्तमंत्रियों, RBI, इकोनॉमी से जुड़े ये क़िस्से आपको नई दुनिया दिखाएंगे: पढ़ाकू नितिन, Ep 132 25.01.2024

दुनिया पैसे से चलती है ये आपने सुना होगा, लेकिन कितना पैसा किसकी जेब में जाएगा तय कौन करता है? किसी देश का वित्त मंत्रालय. अब वित्त मंत्रालय चलाते हैं मंत्री और सेक्रेटरी. मगर आपको इसकी बारीकी और काम करने का तरीका शायद पता नहीं होगा. आज हमने पढ़ाकू नितिन में एक इनसाइडर को न्यौता दिया है. उनका नाम है सुभाषचंद्र गर्ग. वर्ल्ड बैंक और राजस्थान के वित्तीय मामलों को संभालने के बाद उन्होंने दो सालों तक व...

नेहरू ने अपने गहरे दोस्त शेख़ अब्दुल्ला को जेल क्यों भेजा था?: पढ़ाकू नितिन, Ep 131 18.01.2024

कश्मीर का ज़िक्र हमेशा शेख अब्दुल्ला के बिना अधूरा है. नेशनल कॉन्फ़्रेंस के इस नेता ने विद्रोही, शासक, कैदी हर रोल में छाप छोड़ी. जिन्ना से शेख का हमेशा झगड़ा रहा क्योंकि वो इस्लाम के नाम पर राजनीति नहीं करना चाहते थे, विभाजन होते ही क़बायली वेश में पाकिस्तानी आर्मी घाटी में घुस आई तो शेख के वर्कर्स ही लाठी लेकर लड़ने उतरे, राजशाही से जूझते शेख ने हमेशा लोकतंत्र की पैरवी की मगर क्या हुआ जो वो आज़ा...

फर्ज़ी मर्डर केस में 12 साल हुआ टॉर्चर, फिर ऐसे लिया बदला: पढ़ाकू नितिन, Ep 130 11.01.2024

एक लड़के पर फर्ज़ी केस लगा, पुलिस टॉर्चर हुआ, जेल गया, फिर खुद वकालत पढ़के बरी हुआ. आपको लग रहा होगा किसी वेबसीरीज़ या फिल्म की कहानी है, लेकिन ये हकीकत है सिस्टम की. सिस्टम में बैठे करप्ट लोगों के बावजूद कामयाब होने की, हिम्मत ना हारने की. 'पढ़ाकू नितिन' में सुनेंगे बागपत के अमित चौधरी से उनकी आपबीती जो अब मेरठ में कामयाब वकील हैं. Disclaimer: इस पॉडकास्ट में व्यक्त किए गए विचार एक्सपर्ट के निजी...

प्राचीन अयोध्या की सिटी प्लानिंग, पेरू से कनेक्शन और अनसुने क़िस्से: पढ़ाकू नितिन, Ep 129 04.01.2024

अयोध्या को देखने का सबका अपना नज़रिया है. कुछ लोग इसे इतिहास मानते हैं तो कुछ ऐसा मिथक जो रामायण से शुरू हुआ. बावजूद इसके ये सच है कि अयोध्या नाम का शहर सैकड़ों साल से मौजूद है अपने बदलते नामों के साथ और उस भूगोल के भी जिसका विवरण पुराणों में मिलता है. वाल्मीकि कृत रामायण में तो अयोध्या पर जो बारीक जानकारियाँ मिलती हैं वो हैरतनाक हैं. आज के पढ़ाकू नितिन में 'अमेज़िंग अयोध्या' की लेखिका नीना राय से...

कोठों से लेकर सल्तनत तक चलानेवाली तवायफों की कहानी: पढ़ाकू नितिन, Ep 128 28.12.2023

तवायफों को हमने फिल्मों में देखा है, उनके बारे में उपन्यासों से जाना है. होना ये चाहिए था कि दौलत और रुतबा रखनेवाली इन तवायफों को इतिहास में तवज्जो मिलती लेकिन मिला तिरस्कार. हिंदुस्तान की मशहूर तवायफों के क़िस्से आज 'पढ़ाकू नितिन' में सुनेंगे एकता कुमार से जिन्होंने तवायफों पर किताब भी लिखी है. Disclaimer: इस पॉडकास्ट में व्यक्त किए गए विचार एक्सपर्ट के निजी हैं.

ख़राब अंग्रेज़ी पर जिसका मज़ाक उड़ा उसने लंदन विवि में कैसे चुनाव जीत लिया?: पढ़ाकू नितिन, Ep 127 21.12.2023

जहां चाह वहां राह. ये मुहावरा सही साबित किया बुलंदशहर के सुशांत सिंह ने. दलित परिवार के बेटे सुशांत ने गरीबी और मार्गदर्शन के अभाव से लड़ते हुए लंदन यूनिवर्सिटी में ना सिर्फ कानून की पढ़ाई की बल्कि दो दो बार छात्रसंघ चुनाव जीता. सुशांत बाबासाहेब अंबेडकर को अपनी प्रेरणा मानते हैं और हर सवाल का जवाब उनके जीवन में खोजते हैं. 'पढ़ाकू नितिन' में सुशांत के सफ़र के ज़रिए सुनिए ब्रिटेन में स्टूडेंट पॉलिटि...

लोहिया वक्त से आगे के नेता क्यों थे?: पढ़ाकू नितिन, Ep 126 14.12.2023

राम मनोहर लोहिया हिंदुस्तानी सियासत के सबसे आकर्षक नेताओं में एक रहे हैं. उनकी राजनीतिक सोच समझ से प्रेरित होकर बहुत सारे नेताओं और दलों ने अपनी पारी खेली. लोहिया ने आज़ादी के पहले जितने जूझकर लड़ाई लड़ी, उतनी ही बड़ी लड़ाई आज़ादी के बाद संसद में लोकतंत्र के लिए लड़ी. उनके जीवन में कलर्स की कोई कमी नहीं. ज़िद्दी थे, स्वच्छंद भी, जुझारू और ज़बरदस्त बौद्धिक भी. आज उन्हीं लोहिया के जीवन से ढेरों दिलच...

नेहरू ने इंदिरा गांधी को बढ़ाया तो शास्त्री क्यों ख़ामोश रहे?: पढ़ाकू नितिन, Ep 125 07.12.2023

इंदिरा गांधी ने देश पर सोलह साल शासन किया. उनके हिस्से तारीफ और आलोचना दोनों आईं. इमरजेंसी वाला मामला उन पर मौत के बाद भी हावी रहा लेकिन इसके अलावा भी उनके दामन पर कई तरह के दाग रहे. लेखक विष्णु शर्मा की किताब “इंदिरा फाइल्स” 50 आरोप लगाती है, 'पढ़ाकू नितिन' पॉडकास्ट के इस एपिसोड में सुनिए उनसे दिलचस्प बातचीत. Disclaimer: इस पॉडकास्ट में व्यक्त किए गए विचार एक्सपर्ट के निजी हैं.

सावरकर ने भारतीय संविधान में 'हिंदू राष्ट्र' की मांग क्यों नहीं की?: पढ़ाकू नितिन, Ep 124 30.11.2023

संविधान लागू हुए 75 साल होने जा रहे हैं. जितनी इसकी तारीफ होती है उतनी ही आलोचना भी. आलोचना के कई बिंदुओं में एक है इसके अंदर ब्रिटिश उपनिवेशवादी काल के कानूनों का होना. क्या केवल इस वजह से इसे 'Colonial Constitution' कहा जा सकता है? क़ानून के जानकार और लेखक अर्घ्य सेनगुप्ता ऐसा ना केवल मानते हैं बल्कि किताब इसी नाम से लिखी है. इस बार 'पढ़ाकू नितिन' में उनकी दलील सुनिए. Disclaimer: इस पॉडकास्ट में...

IAS अफसरों ने वोट करके बताया उनमें कौन सबसे करप्ट, फिर क्या हुआ?: पढ़ाकू नितिन, Ep 123 23.11.2023

करीब 30 साल पहले एक अनोखा चुनाव हुआ. देश के सारे IAS अफसरों ने मिलकर अपने बीच से 3 सबसे करप्ट अफसरों को चुना. ऐसा इलेक्शन ना पहले देखा गया था और ना उसके बाद कभी हुआ. लेकिन इसका होना आसान नहीं था.. मगर फिर भी हुआ. उसके बाद हालात और मुश्किल बन गए. क्यों ये चुनाव हुए, जिनका नाम आया वो कौन थे, क्या उन पर कभी कोई एक्शन हुआ.. 'पढ़ाकू नितिन' में ये कहानी सुनाने आए हैं यूपी के कई ज़िलों के डीएम रहे, सीएम...

कहीं जलाना, कहीं दफ़नाना, टावर पर छोड़ देना..अंतिम विदाई के ये तरीक़े क्या कहते हैं?: पढ़ाकू नितिन, Ep 122 16.11.2023

मौत शाश्वत सत्य है. इंसान जिस शरीर के ज़रिए इस दुनिया के हर कामकाज निपटाता है उसे एक दिन छोड़कर जाना पड़ता है. इस काया का निपटान भी अलग अलग तरीके से होता रहा है. हर धर्म, इलाके, संस्कृति का अपना तरीका है जो कई बार हैरान करता है तो कई दफे सोचने को मजबूर. इस बार पढ़ाकू नितिन में 'अंतिम संस्कार' जैसे टॉपिक पर बैठकी जमी डॉ मिनाक्षी दीवान से. Disclaimer: इस पॉडकास्ट में व्यक्त किए गए विचार एक्सपर्ट के...

निठारी कांड वाले सुरेंद्र कोली के लिए फंदा तैयार था फिर वो बचा कैसे?: पढ़ाकू नितिन, Ep 121 09.11.2023

निठारी कांड डेढ़ दशक पहले भले हुआ हो लेकिन कोई उसे अब तक नहीं भूला. बच्चों की गुमशुदगी और हत्या से आगे उनके निर्जीव शरीर को खा जाने की जघन्य वारदात ने सबको हिलाकर रख दिया था. अब लंबे ट्रायल के बाद उस केस के दोनों आरोपी बरी हो गए हैं. सवाल है कि जब सारा केस एकदम सीधा था फिर कैसे आरोपियों को सज़ा नहीं मिली, साथ ही जानिए कि एक बार फांसी का फंदा तैयार था मगर सुरेंद्र कोली कैसे बच गया? पढ़ाकू नितिन में...

एंकरिंग में नायाब रिकॉर्ड दर्ज करानेवाले सईद अंसारी के हाथ पांव कब फूले?: पढ़ाकू नितिन, Ep 120 02.11.2023

टीवी पर न्यूज़ हर कोई देखता है और इस न्यूज़ को आप तक पहुंचाते हैं प्रेजेंटर या एंकर. अपनी आवाज़ और अंदाज़ से हर न्यूज़ को रोचक बनाने वाले इन एंकरों की दुनिया कैसी होती है, जितनी आसानी से ये न्यूज़ आपतक पहुंचाते हैं, क्या इसका प्रोसेस भी इतना ही आसान होता है, किस तरह की चुनौतियों से दो-चार होना पड़ता है इन्हें, इन सब पर बात बात करने के लिए 'पढ़ाकू नितिन' के इस एपिसोड में हमने बुलाया न्यूज़ एंकरिंग की दुनिया...

फांसी से पहले कसाब की आंखों में पछतावे की कहानी: पढ़ाकू नितिन, Ep 119 26.10.2023

IPS अफसर को जीवन में भले सुख सुविधाओं की कमी ना हो लेकिन चैलेंज भी भरपूर हैं. अगर अफसर महिला हो तो चुनौतियों दोगुनी हो जाती हैं. इस बार 'पढ़ाकू नितिन' में मिलिए मीरां चड्ढा बोरवनकर से जो महाराष्ट्र की पहली महिला एसपी और कमिश्नर रहीं. उन्होंने क्राइम ब्रांच से लेकर प्रदेश के जेलों तक की ज़िम्मेदारी संभाली, वो भी ऐसे वक्त में जब आतंकी कसाब और याकूब मेमन की फांसी हुई. उनके करियर में खूब दिलचस्प घटनाए...

बिहार की पॉलिटिक्स 35 सालों में कैसे बदल गई?: पढ़ाकू नितिन, Ep 118 19.10.2023

बिहार हमारे देश की प्राचीन सभ्यता का बड़ा गढ़ रहा है, इस नाते राजनीति का भी. लोकतांत्रिक राजनीति में भी इस सूबे ने हमेशा झंडे गाड़े. देश को एक से बढ़कर एक नेता दिए, यहीं आंदोलनों की फसल लहलहाई, राजनीतिक मॉडलों से परिचय कराया. इस पॉडकास्ट में बिहार की पॉलिटिक्स को दशकों से कवर कर रहे पत्रकार और लेखक संतोष सिंह के साथ हमने बिहार के साढ़े तीन दशकों की यात्रा पर चलने का प्रयास किया है. Disclaimer: इस प...

इज़रायल-फ़िलिस्तीन के झगड़े में कौन छिपकर खेल रहा है?: पढ़ाकू नितिन, Ep 117 12.10.2023

दुनिया में हमेशा कहीं ना कहीं जंग चलती रहती है. ग़ाज़ा के ईर्द गिर्द तो ये रुटीन है. 35 एकड़ के अल अक्सा कॉम्प्लेक्स के लिए सैकड़ों साल से जूझ रहे तीन धर्मों का संघर्ष अब जियोपॉलिटिक्स की बड़ी गुत्थी बन गया है. इज़रायल-फ़िलिस्तीन की खींचतान का रेशा रेशा इस पॉडकास्ट में खोला गया है. 'पढ़ाकू नितिन' में इस बार मेहमान हैं जेएनयू में इंटरनेशनल अफ़ेयर्स पढ़ानेवाले और इज़रायल होकर आए असिस्टेंट प्रोफेसर अ...

सिखों ने विभाजन से पहले मुस्लिम लीग की जगह कांग्रेस को क्यों चुना?: पढ़ाकू नितिन, Ep 116 05.10.2023

सिखों के दसवें गुरू गोबिंद सिंह के बाद सिख साम्राज्य की स्थापना भी हुई और पतन भी. अंग्रेज़ों का दौर सिख समाज ने देखा और विभाजन भी. उसके बाद अलग सूबा बनाने का संघर्ष चला, फिर खालिस्तान आंदोलन का दंश भी झेला. सिखों से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात इस पॉडकास्ट से समझिए. पढ़ाकू नितिन के इस एपिसोड में मेहमान हैं सिख इतिहास पर कई किताब लिखनेवाले अमृतसर की गुरू नानक देव यूनिवर्सिटी के रिटायर्ड प्रोफेसर जोगेंद्र...

अकबर की मौत के बाद मुगलों ने सिखों से दुश्मनी क्यों ठान ली?: पढ़ाकू नितिन, Ep 115 28.09.2023

दुनिया में ढाई करोड़ से ज़्यादा सिख हैं लेकिन उनका इतिहास कम लोग जानते हैं. इस इतिहास में धर्म के साथ त्याग, साहस, ईर्ष्या, साज़िश, प्रतिशोध सब कुछ है. एक धार्मिक समुदाय से राजनीतिक ताकत बनने की यात्रा भी है. दस गुरूओं की शानदार पंरपरा वाले सिखों से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात इस पॉडकास्ट से समझिए. 'पढ़ाकू नितिन' के इस ऐपीसोड में मेहमान हैं सिख इतिहास पर दशकों तक लिखनेवालीं पंजाब यूनिवर्सिटी की प्रोफेस...

कव्वाली को 750 सालों बाद भी कौन ज़िंदा रखे हुए है?: पढ़ाकू नितिन, Ep 114 21.09.2023

कव्वाली संगीत का सिर्फ एक फॉर्म नहीं बल्कि उससे बढ़कर विधा है. सैकड़ों सालों की यात्रा करके ये हम तक पहुंची. ख़ानकाहों और दरगाहों के आंगन में पली बढ़ी कव्वाली ने फ़िल्मों तक में जादू बिखेरा है. इस कला में ऐसा क्या है जो इसे आज तक ज़िंदा रखे है, 'पढ़ाकू नितिन' में बता रहे हैं सिकंदराबाद घराने के देश-विदेश में मशहूर कव्वाल यूसुफ खान निज़ामी. Disclaimer: इस पॉडकास्ट में व्यक्त किए गए विचार एक्सपर्ट क...

पाकिस्तानी एटम बम में Pablo Escobar का पैसा लगा था?: पढ़ाकू नितिन, Ep 113 14.09.2023

अगर आपसे कहा जाए कि पाकिस्तान के परमाणु बम में कोलंबिया के सबसे बड़े ड्रग माफिया पाब्लो एस्कोबार का पैसा लगा है तो आपको यकीन होगा? क्या आप यकीन करेंगे कि पाकिस्तान ने दुनिया का सबसे बदनाम बैंक खड़ा किया था? क्या आपको मालूम है कि पाकिस्तानी परमाणु बम के शुरूआती परीक्षण चीन में हुए थे? और किसकी हत्या की साज़िश रचने के लिए लादेन की नवाज़ शरीफ से मीटिंग हुई थी? इस बार 'पढ़ाकू नितिन' में खुलासों की पूर...

ट्रंप की मसखरी और ज़िनपिंग की डांट, अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों के दिलचस्प किस्से: पढ़ाकू नितिन, Ep 112 07.09.2023

बड़े बड़े अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में बड़े बड़े क़िस्से होते रहते हैं. आजकल G-20 का शोर चल रहा है तो किस्से इसके भी हैं. इस बार पढ़ाकू नितिन में हमने दावत दी है अंतर्राष्ट्रीय मामलों के एक्सपर्ट प्रकाश के रे को. इस एपिसोड में उनसे सुनेंगे G-20 की ज़रूरत, कमियों, उपलब्धियों की कहानी लेकिन साथ ही ऐसे दिलचस्प किस्से भी जो आपको हैरान करेंगे और हंसाएंगे भी. Disclaimer: इस पॉडकास्ट में व्यक्त किए गए वि...

टाटा और टैगोर का शिपिंग बिज़नेस अंग्रेज़ों ने कैसे चौपट किया?: पढ़ाकू नितिन, Ep 111 31.08.2023

अंग्रेज़ों ने हिंदुस्तान में बिज़नेस करने की नीयत से कब्ज़ा किया था. फिर व्यापार करने लगे तो ऐसे करने लगे कि भारतीयों की सब राह रोक दी. शिपिंग का बिज़नेस भी ऐसा ही था जहां गोरों ने तय कर लिया कि किसी हिंदुस्तानी को टिकने नहीं देंगे. टैगोर से लेकर टाटा तक ने कोशिशें कीं मगर अंग्रेज़ों ने उन्हें आगे बढ़ने नहीं दिया पर फिर भी संघर्ष करते भारतीयों ने कैसे इस डॉमिनेंस को तोड़ा, ये कहानी सुनिए 'पढ़ाकू न...

खोई हुई नदियों को खोज निकालना क्यों ज़रूरी है?: पढ़ाकू नितिन, Ep 110 24.08.2023

नदियों से जीवन है. दुनिया की सारी बड़ी सभ्यताएं नदी किनारे पैदा हुईं, मगर हमने नदियों के साथ क्या किया? या तो अपने इग्नोरेंस से उन्हें खत्म कर दिया या फिर उन्हें प्रदूषण से बीमार करके खुद दूर हो गए. नदियों की ज़रूरत अभी हमें ठीक से समझ नहीं आ रही, जबकि कोशिश होनी चाहिए पुरानी नदियों को जिला लेने की. 'पढ़ाकू नितिन' में इस बार मिलिए रिवर मैन ऑफ इंडिया रमन कांत त्यागी को. Disclaimer: इस पॉडकास्ट में...

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