AKTANU899
कविताएं (Poetry Hindi -Urdu)
I like poetry. I have made this podcast to recite some of my favourite poets poem and some of my own.
Určitě navštivte web podcastu a podpořte jeho tvůrce: podcasters.spotify.com
Kde poslouchat?
Podcasty v aplikaci Replaio Radio Už brzyPodcasty míří do aplikace už brzy. Nainstaluj si ji teď a jako první uvidíš úplně nový pohled na podcasty
Epizody
आछी के बन (वंशी और मांदल ) 27.07.2025 0:27
वंशी और मांदल ठाकुर प्रसाद सिंह के संथाली ताप में ताए छोटे छोटे गीतों का अमूल्य संग्रह है
नदिया का घना घना कूल है (वंशी और मादल) 27.07.2025 0:44
वंशी और मादल ठाकुर प्रसाद सिंह के संथाली ताप में ताए छोटे छोटे गीतों का अमूल्य संग्रह है
पात झरे फिर फिर होंगे हरे (वंशी और मांदल) 27.07.2025 0:49
वंशी और मांदल ठाकुर प्रसाद सिंह के संथाली ताप में ताए छोटे छोटे गीतों का अमूल्य संग्रह है
चलो चलें चम्पागढ़ सपनों के देश(वंशी और मांदल) 27.07.2025 0:37
वंशी और मांदल ठाकुर प्रसाद सिंह के संथाली ताप में ताए छोटे छोटे गीतों का अमूल्य संग्रह है
कबसे तुम गा रहे, कबसे तुम गा रहे (वंशी और मादल) 27.07.2025 1:00
वंशी और मादल ठाकुर प्रसाद सिंह के संथाली ताप में ताए छोटे छोटे गीतों का अमूल्य संग्रह है
अब मत सोचो (वंशी और मादल) 27.07.2025 0:39
वंशी और मादल, ठाकुर प्रसाद सिंह की संथाली गीतों के ताप में ताए छोटे छोटे अमूल्य गीतों का संग्रह है
खुली हथेली और तुलसी गंध 25.07.2025 5:43
ठाकुर प्रसाद सिंह की कविता जो काशी के प्रति उनके गहने अनुराग का प्रतीक होते के साथ-साथ पढ़ने वाले को काशी का भ्रमण करा देती है
मधुशाला ७० 05.07.2025 0:36
मधुशाला ७०
मधुशाला ८८ 05.07.2025 0:35
मधुशाला ८९
मधुशाला ८८ 05.07.2025 0:36
मधुशाला ८८
मधुशाला ८७ 05.07.2025 0:35
मधुशाला ८७
मधुशाला ८५ 05.07.2025 0:36
मधुशाला ८५
मधुशाला ८४ 05.07.2025 0:35
मधुशाला ८४
मधुशाला ८३ 05.07.2025 0:36
मधुशाला ८३
मधुशाला ८२ 05.07.2025 0:39
मधुशाला ८२
मधुशाला ८१ 05.07.2025 0:37
मधुशाला ८१
मधुशाला ८० 05.07.2025 0:37
मधुशाला ८०
मधुशाला ७९ 05.07.2025 0:38
मधुशाला ७९
मधुशाला ७८ 05.07.2025 0:36
मधुशाला ७८
मधुशाला ७७ 05.07.2025 0:36
मधुशाला ७७
मधुशाला ७५ 05.07.2025 0:34
मधुशाला ७५
मधुशाला ७४ 05.07.2025 0:34
मधुशाला ७४
मधुशाला ७३ 05.07.2025 0:35
मधुशाला ७३
पछाड़ते -पछाड़ते 04.07.2025 0:31
केदारनाथ अग्रवाल की एक छोटी सी कविता पकी उम्र में प्रेम मृत्यु के द्वार पर खड़े जीवन में भी,जीने की उत्कट आकांक्षा पैदा कर देता है
दोपहरी में नौका विहार 04.07.2025 1:54
केदारनाथ अग्रवाल की एक छोटी सी कविता
Podobné podcasty
Replaio není vydavatelem podcastů; názvy pořadů, obálky a audio patří jejich autorům a šíří se přes veřejné RSS kanály