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सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 28 11.09.2021

सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 28वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब रावण ने हनुमानजी की पूँछ में आग लगाने की आज्ञा दी तब उनके सब सहयोगी लोगों ने पूँछ में आग लगाने के लिए जल्दी-जल्दी कपडे और तेल की व्यवस्था करी। पूँछ में कपड़ा बांधना प्रारंभ हुआ, और हनुमानजी मजा लेते हुए अपनी पूँछ बड़ी करते गए। किसी तरह से कपड़ा बंधा गया और फिर हनुमानजी को नगर में घुमाय...

सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 27 10.09.2021

सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 27वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि हनुमानजी ने रावण को भक्ति, विवेक, वेत्राज्ञा और नीति से भरी बातें समझाई, वे सब बातें उसके अपने, उसके परिवार और पूरे राज्य के हित में थी। लेकिन रावण केवल अभिमानी ही बल्कि महा-अभिमानी था। वो कस के हँसा और उपहास करते हुए बोला की आज हमें एक बन्दर गुरु मिला है। अपने सिपाहियों को उसने हनुमान...

सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 26 09.09.2021

सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 26वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि हनुमानजी ने रावण के समस्त प्रश्नों के उत्तर दिए और उसके बाद परात्मा के परम भक्त और ज्ञानी की तरह से रावण के हित के बारे में सोचते हुए उसे कुछ अत्यंत सुन्दर उपदेश देते हैं। यह प्रसंग भी बहुत ही सुन्दर है। ध्यान पूर्वक सुने। 

सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 25 08.09.2021

सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 25वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब रावण ने हनुमानजी से अनेकों प्रश्न करे तो उन्होंने एक-एक करके सभी प्रश्नो का उत्तर दिया। ये सब आप पू स्वामीजी की वाणी से ही सुनें। 

सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 24 07.09.2021

सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 24वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब हनुमानजी रावण की सभा में पहुँच जाते हैं तो रावण ने हनुमानजी से पुछा की वो ककौन है? किसी बल से हमारी अशोक वाटिका उजाड़ दी है  हमारे सैनिक और पुत्र को मर दिया। वो आगे बोलता है की क्या तुम्हे दर नहीं लगता है? लगता है तुमने हमारी महिमा नहीं सुनी है। हनुमानजी ने सब प्रहण बड़े ध्यान से...

सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 23 06.09.2021

सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 23वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब  मेघनाद ने हनुमानजी के ऊपर ब्रह्मास्त्र मारा तो उन्होंने इस दिव्य अस्त्र की महिमा बनाये रखने के लिए स्वेछा से अपने प्रभावित होने का निर्णय लिया और मूर्छित होकर गिर गए। गिरते-गिरते भी उन्होंने अनेकों राक्षसों को मार दिया। भवानीजी थोड़ी आश्चर्यचकित हो गयीं की हनुमानजी कैसे मूर्छित...

सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 22 05.09.2021

सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के २२वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब हनुमानजी ने सीताजी  फल खाने की आज्ञा लेली - तब वे पेड़ पर कूद पड़े और फल खाने के साथ-साथ कुछ पेड़ भी उखाड़ के गिरा दिए। जब वहां के रक्षकों ने रोकना चाहा तो उन्हें मार दिया। कुछ लोग भागे-भागे रावण के पास पहुंचे और समाचार दिया। रावण ने कुछ और राक्षस भेजे। हनुमानजी ने उन्हें भी मार दि...

सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 21 04.09.2021

सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 2१वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब हनुमानजी ने रामजी का सन्देश सीताजी को दिया तो वो धन्य हो गयी, हनुमानजी आगे उन्हें थोड़े दिन धीरज रखने को कहते हैं। अब रामजी शीघ्र आएंगे और समस्त राक्षसों का संहार करके सीताजी को आदर के साथ ले जायेंगे। सीताजी अत्यंत प्रसन्न हो गयी और हनुमानजी को अनेकानेक आशीर्वाद दिए। सबसे अच्छा उन्हे...

सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 20 03.09.2021

सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 20वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब सीताजी ने रामजी के कुशल मंगल के बारे में पूछा तो पहले तो हनुमानजी ने संक्षेप में बताया फिर विस्तार से रामजी का सन्देश सुनाया - जो अत्यंत द्रवित कर देने वाला था। इस प्रसंग को निमित्त बनाकर पू गुरूजी ने सनातन धर्म में पति-पत्नी के सम्बन्धो के ऊपर भी प्रकाश डाला। 

सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 19 02.09.2021

सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के १९वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब सीताजी को यह विश्वास हो गया की हनुमानजी निश्चित रूप से रामजी के भक्त और सेवक हैं तब उन्होंने रामजी और लक्ष्मणजी के समाचार जानने के लिए हनुमानजी से पूछा। हनुमानजी के ये सब उत्तर एवं व्यवहार अत्यंत बुद्धिमत्तापूर्ण और हृदयस्पर्शी हैं - जिन्हे पू स्वामीजी ने भी अत्यंत हृदयस्पर्शी ढंग स...

सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 18 01.09.2021

सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के १८वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब सीताजी अत्यंत व्याकुल और वराह की अग्नि में जल रहीं थीं और सबसे और अंततः अशोक वृक्ष से प्रार्थनाकर रहीं थीं की हमको अग्नि की एक चिंगारी दे दो - उस समय हनुमानजी ने रामजी की मुद्रिका उनकी गोद में डाल दी। वो भी इतनी दिव्य और चमकीली थी की मनो अशोक वृक्ष ने उनकी प्रार्थना सुनली और एक अंगा...

सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 17 31.08.2021

सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के १७वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब रावण समस्त राक्षसियों को एक महीने का समय देकर की इस बीच में सीताजी को मना लो, तब तिजाता ने सब राक्षसियों को बुलाकर अपना सपना बताया - जिससे वे सब डर गयीं और सीताजी को ज्यादा नहीं लेकिन थोड़ा बहुत प्रताड़ित करने लगीं। तब सीताजी बहुत व्याकुल एवं विह्वल हो गयीं और उन्होंने त्रिजटा को बुला...

सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 16 30.08.2021

सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के १६वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब जब रा सीताजी और उसकी सभी राक्षसियों को एक महीने का समय देकर चला जाता है तो सभी राक्षसियाँ अनेकानेक ढंग से सीता को प्रताडिक करने लगीं।  तब वहां त्रिजटा नामक राक्षसी थी, उसने सभी राक्षसियों को अपने पास बुलाया और अपना रात का ही सपना सुनाया। उसने कहा की हमने देखा की लंका में एक विश...

सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 15 29.08.2021

सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के १५वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि रावण के बहुत मानाने और डराने के बावजूद सीताजी ने रावण की तरफ आँख उठा कर भी नहीं देखा - जिससे वो बहुत ही दुखी था। यद्यपि रावण समर्थ था, बुद्धिमान था, शिवजी का भक्त था और यह भी सच है की सीताजी के साथ उसने कोई जोर-जबरदस्ती नहीं करी थी, तथापि हिन्दू महिलाओं के चरित्र और मूल्यों पर यहाँ प्र...

सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 14 28.08.2021

सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के १४वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि हनुमानजी और विभीषणजी के परिचय और मित्रता के उपरान्त विभीषणजी ने सीताजी के बारे में समाचार सुनाया। फिर यह भी बताया की वे अशोक वाटिका नामक उपवन में हैं। उस जगह की विशेष सुरक्षा के बारे में और उन्हें वहां पहुँचने का रहस्य भी बताया। हनुमानजी अशोक वाटिका के लिए निकल गए, और शीघ्र उस स्थान पर...

सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 13 27.08.2021

सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के १३वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब हनुमानजी विभीषणजी से मिले तो वह एक अत्यंत दिव्य प्रसंग था। भगवान् के दो अत्यंत सुन्दर और भक्तों का मिलान। भक्ति बहुत ही विशिष्ट गुण होता है। समयतः है व्यक्ति के ह्रदय में जिव की ही प्रधानता होती है। अपने लिए जीना और जिव क्यूंकि छोटा और अलप होता है इसलिए सतत अपने लिए इच्छा और प्रार्थ...

सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 12 26.08.2021

सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के १२वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब हनुमानजी ने लंका में एक  देखा जहाँ रामजी के आयुध अंकित थे तो वे आश्चर्यचकित हुए और प्रसन्न भी। वहां तुलसीवृन्द भी थे। वे देख ही रहे थे की उस समय विभीषणजी जगे और राम-राम की आवाज़ आई। हनुमानजी ने हर पहलु से विचार किया, तर्क से हर पक्ष सोचा और फिर निर्णय किया की यह व्यक्ति निश्चित...

सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 11 25.08.2021

सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के ११वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब हनुमानजी लंकिनी से मिलते हैं तो उसने अपने वास्तविक रूप में आते ही अत्यंत अद्धभुत बातें कहीं। निश्चित रूप से वो ब्रह्मलोक की निवासी व्यक्ति जिसे ब्रह्माजी का सत्संग प्राप्त हुआ था दिख रही थी। उसने हनुमानजी को कहा की आप रामजी को अपने ह्रदय में रख कर लंका में प्रवेश करें और अपना काम कर...

सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 10 24.08.2021

सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के १०वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब हनुमानजी ने सुन्दर लंका को देखा उसके बाद उन्होंने शहर के अंदर प्रवेश का निश्चय किया।  उसके लिए उन्होंने रात्रि का समय उचित समझा। अंधेरा होते उन्होंने मच्छड़ के परिमाण का अपना रूप कर लिया और लंका के अंदर जाने लगे। उस समय लंका की प्रसिद्द रक्षिका जिसका नाम लंकिनी था और जो अपने कार...

सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 9 23.08.2021

सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के ९वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा को आगे ले जाते हुए बताया की जब हनुमान जी लंका पहुंचते हैं तो उन्होंने लंका का अत्यंत सुन्दर दृश्य देखा। प्रारम्भ में प्राकृतिक सुंदरता का दृश्य - पेड़, फल, फूल उनपे मंडराते हुए भवरें, पहाड़ की तलेटी में बसा हुआ अत्यंत सुरक्षित, सुसज्जित एवं समृद्ध नगर। नगर के अनेकानेक लोग आदि आदि। यहाँ पर पूज्य स्वामीजी न...

सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 8 22.08.2021

सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के ८वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में बताया की देवता कौन होते हैं जो अनेकों आशीर्वाद के साथ-साथ सुरसा जैसी आपदा भेजते रहते हैं। हुमान्जी की आगे की यात्रा में एक और विचित्र आपदा आती है - वो थी सिंहिका राक्षसी। उसकी विचित्रता इस बात की थी की वो आकाश में उड़ते किसी भी प्राणी की जल के ऊपर परछाईं को पकड़ कर उसको उड़ने में असमर्थ कर देती थी और न...

सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 7 21.08.2021

सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के सातवें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया की हनुमानजी ने बड़ी आत्मीयता से मैनाक के आतिथ्य को स्वीकारते हुए लेकिन बिना रुके आगे चले। आगे उन्हें देवताओं के द्वारा भेजी गयी सुरसा मिली। वो बड़ी प्रसन्नता से कहती है की वाह ! आज तो हमें देवताओं ने बड़ा ही सूंदर भोजन भेजा है। हनुमानजी ने उससे निवेदन किया की हे माता, इस समय हम रामजी के काम...

सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 6 20.08.2021

सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के छठे दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया की हनुमानजी की लंका की यात्रा एक साधक की भक्ति माता के दर्शन की यात्रा है। किसी भी यात्रा में कोई न कोई अच्छे या बुरे अवरोध आने स्वाभाविक हैं। हनुमानजी को सबसे पहले मैनाक पर्वत मिले। वे उनके पिताजी (पवन देवता) के ऋणी थे, वे पूरी आत्मीयता के साथ हनुमानजी की सेवा के भाव से रस्ते में सामने खड़े...

सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 5 19.08.2021

सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के पाँचवे दिन पूज्य पाद श्री स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में प्रवेश किया। जाम्बवानजी को गुरु स्थानीय बताते हुए एक अच्छी शिक्षा का स्वरुप बताया। जिस शिक्षा से शिष्य के मन में अपना परिचय, अपने जीवन का उद्देश्य, कार्य में हमारा रोल और सबसे बड़ी बात उसके मन में आत्मा-विश्वास और उत्साह का सृजन हो जाये वो ही शिक्षा उचित और कल्याणकारी होती है। उत्साह और आत...

सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 4 18.08.2021

सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन इन्दौर स्थित पूज्य पाद श्री स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में प्रवेश किया, और किष्किन्धाकाण्ड के अंतिम प्रसंग से सुंदरकांड की संगती जोड़ी। सम्पति की कहानी और फिर सभी वनरादि ने समुद्र पार कर सीता माता से मिलकर उनका समाचार लाने का निश्चय किया। फिर बात आयी की कौन समुद्र के उस पार जाकर यह कार्य करेगा। इस प्रसंग के माध्यम से अंगद चरित्र / जाम्ब...

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