Prof. Subhash Saini

Subhash Saini Podcast

जिंदगी में भरोसा पैदा करने वाले व्यक्तियों, घटनाओं व रचनाओं से परिचय। साहित्यिक-सास्कृतिक-कलात्मक रूचियों का परिष्कार।सत्य आधारित संवेदनशील-समतामूलक, न्यायपूर्ण व विवेकशील समाज का निर्माण। महात्मा बुद्ध, कबीर, रैदास, गुरुनानक देव, जोतीबा फुले, सावित्री बाई फुले, डा. भीमराव आंबेडकर, शहीद भगतसिंह आदि प्रगतिशील विचारकों की चिंतन परंपरा का विकास।

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Autor

Prof. Subhash Saini

Categoria

Society

Site do podcast

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Último episódio

13 de jan de 2026

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Episódios

22. (कविता) दुनिया की चिंता - कुंवर नारायण 22.05.2021

 हिंदी साहित्यकार कुंवर नारायण की कविता दुनिया की चिंता एक विडंबना का व्यक्त करती है, कि बाहुबली व्यक्तियों के स्तर पर और देशों के स्तर पर जन हितैषी होने का दिखावा करते हैं, लेकिन असल में दुनिया को इन्हीं से चिंता है। दुनिया की चिंता छोटी सी दुनिया बड़े-बड़े इलाके हर इलाके के बड़े-बड़े लड़ाके हर लड़ाके की बड़ी-बड़ी बंदूकें हर बंदूक के बड़े-बड़े धड़ाके सबको दुनिया की चिंता सबसे दुनिया को चिंता...

21. Birsa Munda/( अमर सेनानी ) बिरसा मुंडा 22.05.2021

Birsa Munda बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर 1875 को रांची जिले के उलिहतु गाँव में हुआ था 1897 से 1900 के बीच मुंडाओं और अंग्रेज सिपाहियों के बीच युद्ध होते रहे और बिरसा और उसके साथियों ने अंग्रेजों की नाक में दम कर रखा था।  डोम्बरी पहाड़ पर एक और संघर्ष हुआ था जिसमें बहुत सी औरतें व बच्चे मारे गये थे। उस जगह बिरसा अपनी जनसभा को सम्बोधित कर रहे थे। बाद में बिरसा के कुछ शिष्यों की गिरफ़्तारियाँ भ...

20. ( कविता )एक अजीब-सी मुश्किल - कुंवर नारायण 21.05.2021

हिंदी कविता एक अजीब-सी मुश्किल  एक अजीब-सी मुश्किल में हूँ  इन दिनों— मेरी भरपूर नफ़रत कर सकने की ताक़त दिनोंदिन क्षीण पड़ती जा रही अँग्रेज़ी से नफ़रत करना चाहता जिन्होंने दो सदी हम पर राज किया तो शेक्सपीयर आड़े आ जाते जिनके मुझ पर न जाने कितने एहसान हैं मुसलमानों से नफ़रत करने चलता तो सामने ग़ालिब आकर खड़े हो जाते अब आप ही बताइए किसी की कुछ चलती है उनके सामने? सिखों से नफ़रत करना चाहता...

19. ( कहानी ) अमृतसर आ गया है - भीष्म साहनी 20.05.2021

https://desharyana.in/archives/17533 उन दिनों के बारे में सोचता हूँ, तो लगता है, हम किसी झुटपुटे में जी रहे हैं। शायद समय बीत जाने पर अतीत का सारा व्यापार ही झुटपुटे में बीता जान पड़ता है। ज्यों-ज्यों भविष्य के पट खुलते जाते हैं, यह झुटपुटा और भी गहराता चला जाता है। उन्हीं दिनों पाकिस्तान के बनाए जाने का ऐलान किया गया था और लोग तरह-तरह के अनुमान लगाने लगे थे कि भविष्य में जीवन की रूपरेखा कैसी होगी...

18. ( निबंध )पुरुष और परमेश्वर - रामवृक्ष बेनीपुरी 19.05.2021

https://desharyana.in/archives/17525 रामवृक्ष बेनीपुरी (23 दिसंबर, 1899 - 7 सितंबर 1968)   भारत  के एक महान विचारक, चिन्तक, मनन करने वाले क्रान्तिकारी साहित्यकार, पत्रकार, संपादक थे।  राष्ट्र-निर्माण, समाज-संगठन और मानवता के लिए ललित निबंध, रेखाचित्र, संस्मरण, रिपोर्ताज, आदि विविध विधाओं में महान रचनाएँ प्रस्तुत की हैं।  स्वतंत्रता संग्राम इसी समय राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने '...

17. ( अमर सेनानी) चंद्रवीर सिंह गढ़वाली 19.05.2021

चन्द्र सिंह गढ़वाली गढ़वाल की राजधानी चांदपुरगढ़ के रहने वाले थे उनका जन्म 25 दिसम्बर 1891 में हुआ था।  हिंदू मुस्लिम दंगे करवाने की साजिश को नाकाम करने के लिए अंग्रेजी सशस्त्र दल में बगावत की।उसकी सजा भुगती। उपेक्षित रहे। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में ऐसे फौज में बगावत करने वालों में इनका प्रमुख नाम है।1994 में भारत सरकार द्वारा उनके सम्मान में एक डाक टिकट भी जारी किया गया। 1 अक्टूबर 1979 को...

16. (कहानी) क्वारंटीन -राजेंद्र सिंह बेदी 18.05.2021

राजेंद्र सिंह बेदी रचित उर्दू कहानी - क्वारंटीन! प्लेग और क्वारंटीन! हिमाला के पाँव में लेटे हुए मैदानों पर फैल कर हर एक चीज़ को धुंदला बना देने वाली कोहरे के मानिंद प्लेग के ख़ौफ़ ने चारों तरफ़ अपना तसल्लुत जमा लिया था। शहर का बच्चा बच्चा उसका नाम सुन कर काँप जाता था। प्लेग तो ख़ौफ़नाक थी ही, मगर क्वारंटीन उससे भी ज़्यादा ख़ौफ़नाक थी। लोग प्लेग से इतने हरासाँ नहीं थे जितने क्वारंटीन से, और यही वजह थी कि...

15. शहीद महावीर सिंह 18.05.2021

शहीद भगतसिंह के साथी शहीद महावीर सिंह के जीवन, सोच व बलिदान की दास्तान बताता यह लेख लिखा था क्रांतिकारी इतिहासकार सुधीर विद्यार्थी ने. शहीद का जीवन बेहतर समाज चाहने वालों के लिए प्रेरक है। अपने पिका को लिखा उनका पत्र ऐतिहासिक दस्तावेज है.

14. (लोक कथा) प्यासा कौआ - बाल कथा 16.05.2021

बचपन से कहानी सुनते आए हैं प्यासा कौआ। इसके संदेश जहां चाह वहां राह के संदेश की ओर ही ध्यान लगा रहा और इसकी बनावट पर कभी ध्यान ही नहीं गया। बदले संदर्भों में प्यासा कौअ.

13. ( लघु कथा ) पागलखाना - खलील जिब्रान 16.05.2021

खलील जिब्रान की लघुकथा पागलखाना व्यंग्य है सामाजिक संरचनाओं पर जो व्यक्तित्व को अपनी तरह से विकसित का मौका नहीं देती. सामाजिक हों या शैक्षिक समस्त संस्थाएं व संबंध व्यक्ति को अपने जैसा बनाना चाहती हैं।

12. ( लोक कथा) शिवजी पार्वती: धार्मिक पाखंड की पड़ताल (हरियाणवी लोक कथा) 16.05.2021

शिवजी पार्वती द्वारा धार्मिक पाखंड की पड़ताल हरियाणवी लोक कथा है। इस लोक कथा में धर्म के नाम पर किये जाने वाले पाखण्डों पर करारा व्यंग्य है.

11. ( लोक कथा ) गादड़ अर शेरणी - हरियाणवी लोक कथा 14.05.2021

गादड़ अर शेरणी - हरियाणवी लोक कथा. समाज में व्याप्त द्वेष, शत्रुता व बदले की भावना की ओर संकेत करती लोककथा.  

10. ( लोक कथा ) लछमी और टोटा - हरियाणवी लोक कथा 14.05.2021

लछमी और टोटा - हरियाणवी लोक कथा सुख, समृद्धि और संपति आती है तो स्वागत करना इंसान का स्वभाव है और कंगाली आती अच्छी नहीं लगती.

9. ( लोक कथा ) चिड़िया और कौवा - हरियाणवी लोक कथा 14.05.2021

चिड़िया और कौवा - हरियाणवी लोक कथा.  मुफ्तखोर अपनी चालाकी से भोलेभाले लोगों की मेहनत के फल को लूट सकता है, लेकिन जीत न्याय की होगी और अंततः प्रकृति करेगी न्याय.

8. ( पत्र ) शहीद भगतसिंह व बटुकेश्वर का विद्यार्थियों के नाम पत्र 12.05.2021

शहीद भगतसिंह व बटुकेश्वर का विद्यार्थियों के नाम पत्र

7. (साक्षात्कार ) लोक साहित्य का अध्ययन 12.05.2021

लोक साहित्य के अध्ययन व मूल्यांकन पर विचारोत्तेजक परिचर्चा। प्रख्यात आलोचक जीवन सिंह से देस हरियाणा पत्रिका के संपादक प्रोफेसर सुभाष चंद्र के सवाल। 

6. ( भाषा ) हिंदी भाषा का विकास - डा. सुभाष चंद्र 12.05.2021

हिंदी भाषा का विकास - डा. सुभाष चंद्र

5. ( जीवन वृत ) रवींद्रनाथ टैगोरः जीवन एवं साहित्य 12.05.2021

Ravinder Nath Tagore Life and Work

4. (संस्मरण ) मुक्तिबोध के जीवन के अंतिम सात वर्ष 11.05.2021

कवि, आलोचक, निबंधकार, कहानीकार व उपन्यासकार लिखने वाले चुनिंदा लेखकों में से एक थे मुक्तिबोध. बीसवीं सदी की प्रगतिशील हिंदी कविता और आधुनिक कविता के बीच का सेतु माने जाने वाले प्रख्यात गजानन माधव मुक्तिबोध के बारे में डॉक्टर नामवर सिंह ने कहा था- 'नई कविता में मुक्तिबोध की जगह वही है ,जो छायावाद में निराला की थी. निराला के समान ही मुक्तिबोध ने भी अपनी युग के सामान्य काव्य-मूल्यों को प्रतिफलित करने...

3 - (पत्र) शहीद भगतसिंह का पत्र छोटे भाई कुलतार के नाम 11.05.2021

3 मार्च 1931 को शहीद भगत सिंह ने अपने छोटे भाई कुलतार के नाम जो अंतिम पत्र लिखा था. सेंट्रल जेल, लाहौर, 3 मार्च 1931 अजीज कुलतार सिंह, आज तुम्हारी आंखों में आंसू देखकर बहुत रंज हुआ। आज तुम्हारी बातों में बहुत दर्द था। तुम्हारे आंसू हमें बर्दाश्त न हुए।  बरखुर्दार, हिम्मत से तालीम हासिल करते जाना और सेहत का ख़याल रखना। और क्या लिखूं हौंसला रखना, सुनो -  उसे यह फ़िक्र है हरदम नई तर्ज़-ए-ज़...

2 - (निबंध) साहित्य के दृष्टिकोण - मुक्तिबोध 11.05.2021

गजानन माधव मुक्तिबोध के लेख साहित्य के दृष्टिकोण का वाचन.

1 - (कहानी) परदा - यशपाल 09.05.2021

हिंदी के प्रसिद्ध कहानीकार यशपाल की कहानी परदा 

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