Aaj Tak Radio

Storybox with Jamshed Qamar Siddiqui

जमशेद क़मर सिद्दीकी के साथ चलिए कहानियों की उन सजीली गलियों में जहां हर नुक्कड़ पर एक नया किरदार है, नए क़िस्से, नए एहसास के साथ. ये कहानियां आपको कभी हसाएंगी, कभी रुलाएंगी और कभी गुदगुदाएंगी भी. चलिए, गुज़रे वक्त की यादों को कहानियों में फिर जीते हैं, नए की तरफ बढ़ते हुए पुराने को समेटते हैं. सुनते हैं ज़िंदगी के चटख रंगों में रंगी, इंसानी रिश्तों के नर्म और नुकीले एहसास की कहानियां, हर इतवार, स्टोरीबॉक्स में. Jamshed Qamar Siddiqui narrates the stories of human relationships every week that take the listener on the rollercoaster of emotions, love, and laughter. Stories are written by Jamshed...

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Autor

Aaj Tak Radio

Categoria

Fiction

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Último episódio

11 de jul de 2026

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Episódios

साइकिल की सवारी | स्टोरीबॉक्स | EP 28 19.03.2023

हमको साइकिल चलाना तो आता था लेकिन साइकिल पर चढ़ने में अभी कच्चे थे। तो अगर कोई बैठा देता था तो फिर हम साइकिल के राजा हो जाते थे। निकल जाते थे सड़क पर और सवा किलोमीटर दूर भी अगर कोई दिख जाता तो चीखने लगते कि "ऐ हट जाओ सामने से... अरे दिखाई नहीं देता क्या, साइकिल चला रहा हूं... हट जाओ" ... सुनिए सुदर्शन जी की लिखी कहानी 'साइकिल की सवारी' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.

प्रेमचंद के पान | स्टोरीबॉक्स | EP 27 12.03.2023

घर के सामने नई पान की दुकान खुली थी। मैं खुश था कि चलो अब पान खाने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा लेकिन मुझे क्या पता था कि पान की ये दुकान मेरे लिए मेरे गले का फंदा बन जाएगी। सुनिए स्टोरीबॉक्स में मुंशी प्रेमचंद की कहानी 'बोहनी' जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.

पूरे चांद की रात | स्टोरीबॉक्स | EP 26 05.03.2023

वो जगमगाते सितारों की रात थी। हमारी कश्ती खुबानी के पेड़ से बंधी थी। चांदनी पत्तों के ओट से छनकर हमारे चेहरे पर पड़ रही थी। झील का पानी किनारे को चूम रहा था। मैंने उसके रुख़्सार को चूमा। ऐसा लगा हज़ारों मस्जिद ओ मंदिर में एक साथ सदाएं गूंजने लगीं। मैंने उसकी ठोडी को चूमा तो हज़ारों कवल एक साथ खिल गए। उसने मुझे अपना खाया हुआ भुट्टा दिया, मैंने भुट्टे के दानों को मुंह से लगाया तो उसके लबों की गर्मी...

सितारों... तुम तो सो जाओ | स्टोरीबॉक्स | EP 25 26.02.2023

मैं पांच साल बाद हिंदुस्तान लौटा और उस कब्रिस्तान पहुंचा जहां एक कब्र के पत्थर पर लिखा था - इरम ख़ान। वही इरम ख़ान जो मुझे बेइंतिहा चाहती थी, मुहब्बत करती थी मुझसे। लेकिन मैं उसकी उदास आंखों को भूल गया था। पर आज कब्र में सोई हुई इरम से मुझे मुहब्बत हो गयी थी और याद आ रहे थे उसके लफ्ज़, "कभी-कभी जो काम नज़दीकियां नहीं कर पातीं, वो दूरियां कर देती है" सुनिए जमशेद क़मर सिद्दीक़ी की लिखी कहानी - 'सिता...

दिल्ली की सैर | स्टोरीबॉक्स | EP 24 19.02.2023

ये उस दौर की बात है जब रेलगाड़ी का सफ़र करना औरतों के लिए कोई मामूली बात नहीं थी। एक लड़की जब फ़रीदाबाद से ट्रेन का सफर तय करके दिल्ली आती है तो वापस लौटने के बाद उसकी संगी सहेलियां उसे घेर लेती हैं। वो पूछती हैं कि ट्रेन कैसी होती है, जब ट्रेन चलती है तो कैसी आवाज़ होती है, प्लैटफॉर्म कैसा दिखता है? वगैरह वगैरह। वो लड़की उन तमाम सवालों का जवाब देती है। सुनिए एक आम लड़की की दास्तानगोई दिल्ली की सै...

एक प्यार अधूरा सा | स्टोरीबॉक्स | EP 23 12.02.2023

वो कॉलेज की सबसे खूबसूरत लड़की नहीं थी और न ही सबसे ज़हीन। लेकिन फिर भी उसका आस-पास होना अच्छा लगता था। उसकी बेबाक़ी उसे औरों से अलग करती थी। हमने एक दूसरे को पसंद किया, एक दूसरे का हाथ थामा लेकिन वक्त की आंधी में हमारे हाथ छूटे तो फिर दोबारा एक वृद्धाश्रम में मिले - सुनिए कुशलेंद्र श्रीवास्तव की लिखी कहानी - एक प्यार अधूरा सा - स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी के साथ.

दो घरों के दरमियां | स्टोरीबॉक्स | EP 22 05.02.2023

दिसंबर की गुनगुनी धूप में सड़क के इस किनारे से उस किनारे तक बने मकानों की परछाइयां एक-दूसरे के कंधों पर सर टिकाए थीं। धूप मकानों के चेहरों को यूं छू रही थी जैसे देर से घर लौटी कोई मां... अपने बच्चों का माथा चूमती है। उस सड़क के दो मकानों के बीच एक छोटी सी खिड़की थी, जहां से ज़ायके, खुश्बुएं, तहज़ीब और ज़बान आती जाती थी। लेकिन क्यों एक रोज़ ये सब ख़त्म हो गया? क्यों इशिता और अभिजीत के इश्क़ के बीच...

दा ब्लू कॉमरेड | स्टोरीबॉक्स | EP 21 29.01.2023

"मेरे पिता ठाकुर हरदयाल सिंह के खेत में मज़दूर हैं। लोगों की शादी में छाती में संतरे लगा कर और पाँव में घुंगरू पहन कर नाचते भी हैं। इसके अलावा वो खूब शराब पीते हैं और माँ को पीटते हैं। गाँव वाले मेरे बाप को मंगता मुसहर कहते हैं और अब अपने मन का मखमल बचाना मैंने जिस आदमी के बारे में अभी बताया, वो मेरा बाप है पर मैं उसका बच्चा हूँ ठीक ठीक नहीं कह सकता। सब कहते कि मेरी कद-काठी, शक्ल-सूरत, रंग-रूप ठाकु...

तुम्हारे इंतज़ार में... | स्टोरीबॉक्स | EP 20 22.01.2023

रसूलपुर रियासत के मालिक 71 साल के इनायत अली खां उस टाट के पर्दे वाली झुग्गी के सामने खड़े थे। "कौन है" अंदर से एक बुज़ु्र्ग आवाज़ आई। खां साहब ने डरते-डरते पर्दा हटाया तो झुर्रियों के जाल वाला एक चेहरा था - वो आफ़रीन ही थी। उनकी 40 साल पुरानी मुहब्बत, जिसे वो मुकम्मल नहीं कर पाए थे। वक्त आफरीन के चेहरे पर झुर्रियों की शक्ल में जाने क्या-क्या लिख गया था। पर उस की धुंधली आंखों अब भी खां साहब का इंतज...

चची के इश्क़ में | स्टोरीबॉक्स | EP 19 15.01.2023

चचा और चची की मुहब्बत सावन की धूप जैसी थी - पल भर में होती, पल भर में गायब। चची के चेहरे पर खुशी लाने के लिए चचा घर के हर काम को अंजाम देने के लिए मिशन उठा लेते लेकिन काम बनाने की बजाए इस तरह बिगड़ जाता कि फिर वो, चची और घर का हर शख्स यही सोचता कि ये काम बाहर से किसी को बुला कर करवा लिया होता, तो भले चार पैसे लग जाते लेकिन काम इत्मिनान से होता। ऐसा ही वो दिन था जब घर में फ्रेम होकर आई एक तस्वीर। च...

हकीम साहब की बकरी | स्टोरीबॉक्स | EP 18 08.01.2023

अगले ही दिन पूरे मोहल्ले में खबर हो गई बकरुन-निसां कोई मामूली बकरी नहीं है, वली पीर साहब का अक्स हैं। हकीम साहब के घर में लोग पहुंचे तो देखा कि बकरुन-निसां बड़े आराम से चारपाई पर बैठी पागुन कर रही हैं, हरे रंग का मेज़पोश काटकर गले से पहना दिया गया था, सींग में चच्ची की पुरानी चूड़ियां पहना दी गयी थीं और चारों पैरों में चटा-पटी वाले दुपट्टे का लचका-गोटा बंधा हुआ था। कुछ ज़ायरीन अगरबत्ती जला कर सर झ...

न छेड़ो हमें, हम नहाए हुए हैं | स्टोरीबॉक्स | EP 17 01.01.2023

"अरे दामाद जी, उठिये। नहाइयेगा नहीं क्या"ससुर जी की आवाज़ के बाद मैंने पहले एक पैर रज़ाई से निकाल कर सर्दी के हालात का जायज़ा लिया। पैर बाहर निकालते ही पता चल गया कि स्थिति तनापूर्ण तो है ही, नियंत्रण में भी नहीं है। फ़ौरन पैर वापस खींच लिया। ये उस समय की बात है जब ठंड कड़ाके की पड़ रही थी और पूरा शहर कोहरे में लिपटा हुआ था। मैंने नहाने का प्रोग्राम आज फिर ठंडे बस्ते में डाल दिया। पर जब मैं नाश्ते...

मसूद भाई की छलांग | स्टोरीबॉक्स | EP 16 25.12.2022

पास लेकर जैसे ही हम दरवाज़े पर पहुंचे तो एक दरबान ने मुझे रोका। मैंने उसे पास दिखाया तो उसकी आंखों में अजीब सी चमक आ गयी। उसने मेरे चेहरे को ग़ौर से देखा और पूछा, "आप मसूद हैं?" मेरे पास झूठ बोलने के अलावा और क्या चारा था। मैंने कहा, "जी हां" बस मेरा इतना ही कहना था कि वो आदमी मुझे खींचते हुए बोले, "गज़ब करते हैं भई, आप का यहां इतना इंतज़ार हो रहा था और आप पता नहीं कहां घूम रहे हैं। चलिए अंदर, जल्...

बटेर की निहारी | स्टोरीबॉक्स | EP15 18.12.2022

पिछले बुध की शाम हमारा सदर के एक नामी होटल में जाना हुआ। वेटर लपक कर आया। हमने पूछा, “क्या है?” बोला, “जी अल्लाह का दिया सब कुछ है!” हमने कहा, “खाने को पूछ रहे हैं, ख़ैरीयत दरयाफ़्त नहीं कर रहे क्योंकि वो तो तुम्हारे रोग़नी तन-ओ-तोष से वैसे भी ज़ाहिर है।” कहने लगा, “हलीम खाइए, बड़ी उम्दा पकी है। अभी अभी मैंने बावर्चीख़ाने से लाते में एक साहिब की प्लेट में से एक लुक़मा लिया था।” सुनिए उर्दू के मशहूर कलमक...

हमें ऐसे हुई मुहब्बत | स्टोरीबॉक्स | EP 14 11.12.2022

हम दोनों के घर वाले आज़ाद ख़्याल थे, हमसे कहा गया कि लड़का-लड़की कुछ वक्त अकेले में बातें कर लें। हम दोनों बालकनी पर आए। दूर रखा तेज़ फ़र्राटा वाला पंखा था जिसकी हवा से लहराते उसके बाल मेरे हाथों को छू रहे थे। मैंने पूछा, "व्हाट आर योर हॉबीज़" और फिर सोचा कि कितना बोरिंग सवाल पूछ लिया। कुछ इंटरेस्टिंग पूछना चाहिए था। वो बोली, "वेल आई लाइक..." मैंने उसकी बात यहीं काटते हुए कहा, "छोड़िये हॉबीज़ को,...

क़िबला काबा ईमान भी तू | स्टोरीबॉक्स | EP 13 04.12.2022

"पाकिस्तान से ट्रेनें भर-भर के लौटती थीं, लेकिन फ्लैटफॉर्म पर ख़ड़ी बन्नों बुआ के हिस्से में सिर्फ इंतज़ार आता था। अम्मी हर साल एक ख़त बन्नों बुआ के नाम से लाहौर भेजती रहीं लेकिन बन्नों बुआ की आख़िरी अधूरी हसरत उनकी कब्र के किनारे उगे एक सफेद फूल बनकर आज भी महकती है" सुनिए आज़म क़ादरी की लिखी कहानी - 'क़िबला काबा ईमान भी तू' सिर्फ स्टोरीबॉक्स पर.

रशीद जहां की कहानी - चोर | स्टोरीबॉक्स | EP 12 27.11.2022

रात के दस बज रहे थे मैं क्लीनिक में बैठी थी और क्लीनिक बंद करने का वक़्त हो गया था। उसी वक़्त एक आदमी धड़धड़ाते हुए अंदर घुसा, हट्टा-कट्टा शख्स, जिसकी गोद में एक बच्चा था, जो बीमार था। उस शख्स ने कहा "देखिये, इसे क्या हुआ है" लेकिन मेरी नज़र उस आदमी पर थी। उसका चेहरा और कान पर वो छोटा सा निशान बता रहा था कि ये वही कम्मन नाम का चोर है, जिसने कुछ दिन पहले मेरे घर में चोरी की थी। सुनिये पूरी कहानी इस इतवा...

पाज़ेब | स्टोरीबॉक्स | EP 11 20.11.2022

मैं हमेशा सोचती थी कि मेरे ट्यूशन टीचर अयाज़ सर वक्त के इतने पांबद कैसे थे। शाम के साढ़े पांच बजते ही उनका स्कूटर आकर घर के दरवाज़े पर रुकता था और उसके पांच सेकेंड बाद आवाज़ आती थी - "शाज़िया... " वो वक्त के इतने पाबंद थे कि आप उन्हें देखकर अपनी घड़ी का वक्त मिला सकते थे। ख़ैर, उनकी आवाज़ का जवाब मैं “आ रही हूं सर” कहकर देती फिर मम्मी की तरफ देखकर कहती “मम्मी, सर आ गए। मैं जा रही हूं पढ़ने” और बैग...

सामने वाली खिड़की | स्टोरीबॉक्स | EP 10 13.11.2022

"सफ़र की शुरुआत पर घर से निकलते ही दरवाज़े भुला दिये जाते हैं लेकिन मोड़ पर पहुंच कर हम फिर पलट कर देखते हैं, क्योंकि खिड़कियां याद रहती हैं। हमें याद रहता है कि कोई खिड़की से हमें जाता हुआ देख रहा होगा, इस उम्मीद से कि हम लौट आएंगे किसी दिन। लेकिन उस बंद होती खिड़की से झांकती दो आंखे, प्रभात जी को यूं देख रही थीं, जैसे अब वो कभी नहीं लौटेंगे" सुनिए स्टोरीबॉक्स में इस हफ़्ते की कहानी 'सामने वाली ख...

कभी यूं भी तो हो | स्टोरीबॉक्स | EP 09 06.11.2022

दो लोग जो साथ नहीं रहना चाहते, किसी दबाव में पूरी ज़िदगी साथ गुज़ार देते हैं। लेकिन जब ज़िंदगी उन्हें मौके दे तो क्या उन्हें अलग हो जाना चाहिए? क्या अलग हो जाना हमेशा बुरा होता है? या ज़्यादा बुरा होता है साथ होकर भी साथ न होना। सुनिए जमशेद क़मर सिद्दीक़ी की लिखी कहानी – कभी यूं भी तो हो KABHI YUN BHI TOH HO | STORY BOX WITH JAMSHED QAMAR SIDDIQUI

पिंक मफ़लर | स्टोरीबॉक्स | EP 08 30.10.2022

वो जब लौटी तो आठ साल गुज़र चुके थे। इन आठ सालों में कुछ नहीं बदला था, सिवाए उसके। उसकी वो शोख हंसी, वो शरारतें, वो मासूमियत और ढेर सारी बातें जाने कहां खो गयी थीं। अब वो एक संजीदा लड़की थी और उसे बीती कोई बात याद नहीं थी, सिवाए एक पिंक मफ़लर के

सबसे ख़ूबसूरत तुम | स्टोरीबॉक्स | EP 07 23.10.2022

जिस्म के किसी हिस्से का जिस्म से अलग हो जाना कितना तकलीफदेह है, एक मर्द होकर मैं ये बात सिर्फ समझने की कोशिश कर सकता था लेकिन मेरी पत्नी जब भी अपनी देह छूती तो उसकी आंखे नम हो जाती थीं। बेतहाशा दर्द और चुभन उसके चेहरे पर थी। लेकिन उस वक्त ये सबसे ज़रूरी था कि उसे याद दिला दूं कि वो अब भी सबसे ख़ूबसूरत है। सुनिए स्टोरीबॉक्स में एकता नाहर की लिखी कहानी - 'सबसे ख़ूबसूरत तुम' जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से

की-बोर्ड | स्टोरीबॉक्स | EP 06 16.10.2022

एक लम्हें में पूरी ज़िंदगी को बदल देने की ताक़त होती है। ये बात मुझे उस दिन पता चली जब घुड़सवारी के दौरान एक हादसे ने मेरी ज़िंदगी को शायद हमेशा के लिए बदल दिया। कुछ इस तरह की ज़मीन पर कदम रखना भी मेरे लिए मुश्किल हो गया था। लेकिन उसी अलमारी में रखे एक पुरानी की-बोर्ड ने कैसे बदल दी मेरी ज़िंदगी.... सुनिए कहानी की-बोर्ड स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से Keyboard | Storybox with Jamshed Qamar...

आख़िरी मुलाक़ात | स्टोरीबॉक्स । EP 05 09.10.2022

वो दोनों मिले, एक लंबे अर्से के बाद, उसी जगह जहां पहले मिला करते थे... लेकिन अब उनके बीच का फ़ासला उनके बीच रखी उस टेबल के कहीं ज़्यादा था ... सुनिए कहानी 'आख़िरी मुलाक़ात' स्टोरी बॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी के साथ.

प्रेमचंद की आख़िरी कहानी | स्टोरीबॉक्स | Ep 04 02.10.2022

वो एक नाकाम राइटर था जिसके हाथ लग गयी मुंशी प्रेमचंद की लिखी आख़िरी कहानी। वो कहानी जो दुनिया की नज़रों से अबतक छुपी हुई थी। क्या एक कहानी बदल सकती है किसी इंसान की क़िस्मत?

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