Aaj Tak Radio

Storybox with Jamshed Qamar Siddiqui

जमशेद क़मर सिद्दीकी के साथ चलिए कहानियों की उन सजीली गलियों में जहां हर नुक्कड़ पर एक नया किरदार है, नए क़िस्से, नए एहसास के साथ. ये कहानियां आपको कभी हसाएंगी, कभी रुलाएंगी और कभी गुदगुदाएंगी भी. चलिए, गुज़रे वक्त की यादों को कहानियों में फिर जीते हैं, नए की तरफ बढ़ते हुए पुराने को समेटते हैं. सुनते हैं ज़िंदगी के चटख रंगों में रंगी, इंसानी रिश्तों के नर्म और नुकीले एहसास की कहानियां, हर इतवार, स्टोरीबॉक्स में. Jamshed Qamar Siddiqui narrates the stories of human relationships every week that take the listener on the rollercoaster of emotions, love, and laughter. Stories are written by Jamshed...

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Autor

Aaj Tak Radio

Categoria

Fiction

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Último episódio

11 de jul de 2026

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Episódios

किराए का मकान | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद 18.01.2026

उन्हें किराए का मकान चाहिए था लेकिन उनके पास कोई कागज़ नहीं था. उनकी भाषा भी अलग थी और कपड़े भी कुछ अलग परिवेश के थे, पर उनकी एक कहानी थी. एक उदास कहानी जो उन्होंने बताई तो मैं ना नहीं कर पाया लेकिन कुछ दिनों बाद मुझे उनकी ख़ौफनाक सच्चाई पता चली... सुनिए कहानी 'किराए का मकान' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. साउंड मिक्सिंग - सूरज सिंह

साग-मीट | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद 11.01.2026

"मेरे तो तीन-तीन डिब्बे घी के महीने में निकल जाते हैं. नौकरों के लिए डालडा रखा हुआ है लेकिन कौन जाने ये मुए हमें डालडा खिलाते हों और खुद देसी घी हड़प जाते हों. आज के ज़माने में किसी का एतबार नहीं किया जा सकता, मैं ताले तो लगा नहीं सकती. ये दूसरा नौकर मथरा सात रोटियां सवेरे और सात रोटियां गिनकर शाम को खाता है और बहन, बीच में इसे दो बार चाय भी चाहिए... और घर में जो मिठाई हो वो भी इसे दो. लेकिन मैं क...

एक नास्तिक की GOD से मुलाक़ात | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद 04.01.2026

वो नास्तिक थे, कभी किसी धर्म या मज़हब को नहीं माना... पूरी ज़िंदगी कहते रहे कि मौत के बाद कुछ नहीं है... एक रोज़ अचानक उन्हें दिल का दौरा पड़ा और दुनिया से विदा हो गए... अंधेरे के उस पार दोबारा उनकी आंख खुली, वो एक अजीब जगह थी... और सामने थे गॉड - सुनिए स्टोरीबॉक्स में कहानी 'एक नास्तिक की GOD से मुलाक़ात' जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. साउंड मिक्सिंग : अमन पाल

एक क्रिमिनल की न्यू ईयर नाइट | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद 28.12.2025

साल की आखिरी रात थी. पूरा शहर जश्न में डूबा हुआ था, लेकिन तभी पुलिस की तरफ़ से ऐलान हुआ कि कुछ संदिग्ध शहर में देखे गए हैं. उन दिनों मैं एक कैफे़ में सिक्योरिटी ऑफ़िसर के तौर पर काम कर रहा था. मैं ऑन-ड्यूटी था कि तभी मेरी नज़र एक शख्स पर पड़ी जो जश्न मना रहे लोगों को घूर रहा था... कौन था वो आदमी? उसके इरादे क्या थे? सुनिए स्टोरीबॉक्स की नई कहानी 'एक क्रिमिनल की न्यू ईयर नाइट' जमशेद क़मर सिद्दीक़ी...

एक फ़र्ज़ी इंटलैक्चुअल | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद 21.12.2025

एक थे बन्ने भाई, कानपुर में उनकी कोयले की दुकान थी जहां दिन भर वो ग्राहकों के साथ झकमारी करते थे लेकिन शाम को घर आते ही सफ़ेद सिल्क का कुर्ता-पायजामा पहनते, कंधे पर डाल लेते एक नकली पशमीना शॉल और फिर मोहल्ले के पास वाली चाय की दुकान पर बैठकर ऐसी फलसफ़ी टाइप की बातें करते थे कि लगता था उनसे बड़ा बुद्दिजीवी, उनसे बड़ा इंटलैक्चुअल पूरे शहर में कोई नहीं है. मीर-ओ-ग़ालिब की शायरी हो या मुल्कों की सियास...

बीवी कैसी होनी चाहिए? | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद 14.12.2025

डिप्टी साहब वैसे तो आदमी बड़े सख्त मिज़ाज थे. दफ़्तर में तो उनके एक दस्तखत से बड़े-बड़े फ़ैसले हो जाते थे लेकिन घर में डिप्टी साहब की ज़रा नहीं चलती. बेगम साहिबा ज़रा गुस्से वाली थीं और जिस सुबह उन्हें ग़ुस्सा आ गया तो फिर लोग देखते थे कि बेचारे डिप्टी साहब का क्या हाल होता था. एक सुबह मैं किसी फ़ाइल पर उनके दस्तखत लेने उनके घर पहुंचा तो देखा कि डिप्टी साहब कमीज़ और टाई लगाए कुर्सी पर बैठे थे मगर...

वो शायर अधूरे ख्वाबों का | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद 07.12.2025

एक शायर था जिसकी तस्वीरें गर्ल्स हॉस्टल में लड़कियों के तकियों के नीचे मिलती थी... जो इश्क़ भी लिखता था और इंकलाब भी, लेकिन उसके हिस्से आई ज़िंदगी की मायूसी, अधूरी मुहब्बत और एक दर्दनाक मौत. स्टोरीबॉक्स में इस बार सुनिए उर्दू शायर मजाज़ लखनवी की कहानी जमशेद क़मर सिद्दीकी से.

एक राइटर और भूत | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद 30.11.2025

एक राइटर ने शहर से दूर एक सुनसान किराए के घर में बैठकर नॉवेल लिखने का फैसला किया, लेकिन उस घर में उसकी मुलाकात हुई एक भूत से. एक भूत जिसके पास उस राइटर के लिए एक काम था, जो वो खुद ज़िंदा रहते नहीं कर पाया. अब वो इस काम के लिए उस राइटर को कीमत भी चुकाने वाला था - सुनिए शरदिंदु बंद्योपाध्याय की लिखी कहानी का हिंदी वर्ज़न 'एक राइटर और भूत' स्टोरीबॉक्स मे जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.

बॉस की दावत | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद 23.11.2025

घर पर बॉस की दावत थी इसलिए शामनाथ साहब सुबह से तैयारियों में लगे थे. पर्दे बदल दिए गए, मेज़पोश नए बिछाए, अलमारी में सजे बर्तन निकाल लिए गए. यहां तक की सोफे़ के नीचे की गर्द भी साफ की गई थी लेकिन पूरे चमचमाते घर में मां अटपटी लग रही थीं. गांव की मां जो ना ढंग से बोल पाती है, न उसे कुछ आता-जाता है, चेहरा भी अब झुर्रियों से ढक गया है. शामनाथ साहब ने मां की तरफ़ देखा और सोचा कि इनको कहां छिपाया जाए कि...

बदसूरती | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद 16.11.2025

दो बहनों में से एक को खूबसूरती और कॉलेज में मोहब्बत मिली, जबकि बड़ी बहन को बिल्कुल साधारण शक्ल और जीवन. छोटी बहन ने जब पहली बार अपने आशिक़ का खत बड़ी बहन को दिखाया, तो बस यहीं से एक ऐसी हलचल शुरू हुई जिसने दोनों के रिश्ते की बुनियाद हिला दी. इसी एक घटना से जलन, तकरार और एक ऐसा झगड़ा जन्म लेता है जो आगे चलकर दोनों की ज़िंदगी बदल देता है, सुनिए स्टोरीबॉक्स सआदत हसन मंटो कहानी ‘बदसूरती’ जमशेद क़मर सि...

एक बौड़म की लव स्टोरी | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद 09.11.2025

वो हमारे कॉलेज के सबसे शरीफ़ स्टूडेंट थे, लड़कियों की तरफ़ देखना तो दूर उनकी परछाईं से भी दूर भागते थे. ढीले कपड़े पहनते थे और सादा खाना खाते थे लेकिन फिर कॉलेज में आई एक अंग्रेज़ लड़की और हम दोस्तों ने रचा एक खेल. उस लड़की के नाम से इन भाई साहब को एक फर्ज़ी ख़त भेजा और फिर जो हुआ जानने के लिए स्टोरीबॉक्स में सुनिए जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से मुंशी प्रेमचंद की कहानी 'विनोद' का एक हिस्सा.

एक सुपरहीरो की सच्ची कहानी | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद 02.11.2025

सुपरहीरो वो नहीं जो आसमान में उड़ते हैं, बिल्डिंग्स से लटकते हैं या फिर विलेंस को मारते हैं. सुपरहीरो तो वो होते हैं जो ज़िंदगी की तकलीफ़ों, दूरियों और ग़म के बीच कुछ ऐसा कर जाते हैं कि दुनिया उन्हें याद रखती है. ये कहानी है कारगिल के एक ऐसे ही हीरो की. जमशेद क़मर सिद्दीक़ी इस बार स्टोरीबॉक्स में सुना रहे हैं 'एक सुपरहीरो की सच्ची कहानी'.

मिडनाइट मर्डर | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद 26.10.2025

एक सर्द शाम को पूरे शहर में सनसनी फैल गई जब पता चला कि एक हमलावर ने सियासी पार्टी के नेता पर जानलेवा हमला किया, लेकिन इंसाफ मिलने के लिए ये क्यों ज़रूरी था कि अस्पताल में भर्ती नेता की मौत रात को बारह बजे ही हो. ऐसी क्या मजबूरी थी? - सुनिए स्टोरीबॉक्स की नई कहानी 'मिडनाइट मर्डर' जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.

मंत्र | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद 19.10.2025

सर्दियों की रात में जब बूढ़ा-बूढ़ी अपनी झोपड़ी में आग के सामने बैठे हाथ ताप रहे थे, तभी किसी ने दरवाज़ा खटखटाया और बताया कि डॉ साहब के बेटे को सांप ने काट लिया है - सुनिए मुंशी प्रेमचंद की लिखी कहानी 'मंत्र' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.

लॉटरी का टिकट | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद 12.10.2025

तभी मेले के भोंपू से आवाज़ गूंजी, "तो दोस्तों... अब समय है विजेता लॉटरी नंबर बताने का. आज का विनर है लॉटरी नंबर 1 0 0 5". ये सुनते ही मेरे हाथ पांव कांपने लगे क्योंकि यही नंबर तो मेरी लॉटरी पर था. मैंने आंखे मलकर नंबर दोबारा चेक किया, बिल्कुल वही नंबर था - सुनिए कहानी 'लॉटरी का टिकट' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.

आधी रात की ख़ामोशी | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद 05.10.2025

रात के ख़ामोश पहर में उस घर में जहां मैं अकेले रहता था, दूसरे कमरे से वो आवाज़ दरअसल कई दिनों से आ रही थी. रात की खामोशी को चीरती हुई वो आवाज़ हर रात मुझे परेशान करने लगी थी. किसकी थी वो आवाज़? और क्या थी उस आवाज़ की दर्दनाक कहानी - सुनिए स्टोरीबॉक्स विद जमशेद में कहानी 'आधी रात की ख़ामोशी'.

चचा मियां की क़ब्र | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद 28.09.2025

सुबह की अज़ान हुई ही थी कि पता चला मुहल्ले के चचा मियां गुज़र गए. वैसे उम्र काफ़ी थी उनकी और लंबे समय से बीमार थे लेकिन उनके जाने के बाद उनकी कब्र को लेकर एक ऐसा मसला खड़ा हो गया कि वो दिन भुलाए नहीं भूलता. सुनिए जमशेद क़मर सिद्दीक़ी की लिखी कहानी 'चचा मियां की कब्र' स्टोरीबॉक्स में.

एक कागज़ का फूल | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद 21.09.2025

पांच साल के बाद वो अचानक दिखी एक अस्पताल में. ये वही लड़की थी जो हमेशा ब्रैंडेड कपड़े पहनती थी. महंगे शौक रखती थी लेकिन आज उसकी हालत ख़राब थी. कपड़े औसत, बाल बिखरे, चप्पलें घिसी हुई, चेहरे का रंग उड़ा और हाथ में मेडिकल रिपोर्ट्स. ये वही लड़की थी जिसने कभी मेरा इश्क़ ठुकराया था. सुनिए जमशेद क़मर सिद्दीक़ी की लिखी कहानी 'एक कागज़ का फूल' स्टोरीबॉक्स में.

आख़िरी सिगरेट | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद 14.09.2025

बंदूक मेरी कनपटी पर थी और उंगली ट्रिगर पर. मेरी ज़िंदगी और मौत के बीच बस चंद लम्हों का फ़ासला था, लेकिन तभी मन किया कि ज़िंदगी की एक आख़िरी सिगरेट पी लूं - सुनिए जमशेद क़मर सिद्दीक़ी की लिखी कहानी 'स्टोरीबॉक्स' में.

रेंट एग्रीमेंट | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद 07.09.2025

सैलून पर मैंने अभी शेव बनवाना शुरु ही किया था कि मेरे हाउस ब्रोकर का फोन आया और उसने कहा कि कोई मेरा घर किराए पर लेना चाहता है. मैंने हां बोल दिया लेकिन तभी उसने किरायेदार का नाम बताया और वो नाम सुनकर मैं चौंक गया - सुनिए पूरी कहानी स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी के साथ.

आतिश हुसैन के साले साहब | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद 31.08.2025

आतिश साहब को एक रोज़ सड़क पर एक औरत पर्चा पकड़ा गई जिसमें लिखा था कि ये पर्चा आगे एक हज़ार लोगों को छपवाकर बढ़ाइए, अब क्या करेंगे आतिश साहब... क्या वाकई पर्चा नहीं छपवाने पर कुछ बुरा होगा? सुनिए स्टोरीबॉक्स में नई कहानी जमशेद क़मर सिद्दीक़ी के साथ

दो जादूगर | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद 24.08.2025

एक ट्रेन में मिले दो जादूगर और एक-दूसरे को दिया चैंलेज. कौन है बड़ा जादूगर? उस्ताद और शागिर्द के बीच हुए जादू के मुकाबले में कौन जीता और किसकी हुई हार? सुनिए सत्यजीत रे की लिखी कहानी का ऑडियो वर्जन स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.

पुरानी दिल्ली की नहारी | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद 17.08.2025

आजकल जो नहारी दिल्ली में मिलती है वो कोई नहारी है साहब? नहारी तो बंटवारे से पहले मिलती थी दिल्ली में. दुकान का नाम था गंजे भाई की नहारी. ऐसी नहारी कि अलीगढ़ से लेकर लाहौर तक से खाने वाले आते थे. सुनिए कहानी स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से

वो कौन था? | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद 10.08.2025

पारितोष साहब के घर के पास उस शाम मैंने जिस आदमी को देखा वो कौन था और क्या ये सिर्फ़ इत्तिफ़ाक था कि जिस दिन शैंकी गायब हुआ और पारितोष साहब की मौत हुई, वो उस दिन भी दिखाई दिया था - सुनिए नई थ्रिलर कहानी 'वो कौन था' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से

चचा छक्कन | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद 03.08.2025

चचा छक्कन वो आदमी थी कि जैसे ही वो पेंचकस लेकर ख़राब रेडियो खोलने बैठते थे घर वाले नया रेडियो खरीदने का मन बना लेते थे. जानते थे कि जिस चीज़ पर हाथ रख दिया वो खराब होकर रहेगी. एक दिन चचा के ज़िम्मे एक काम आ गया. काम बस इतना था कि एक तस्वीर दीवार पर टांगनी थी. क्या क्या हुआ तस्वीर टांगने में... सुनिए स्टोरीबॉक्स विद जमशेद में इम्तियाज़ अली ताज की लिखी कहानी 'चचा छक्कन'

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