MicInkMusafir (Amitbhanu)
MicInkMusafir (Amitbhanu): Voices, Verses, & Voyages
Hello! I'm Amitbhanu, a passionate writer and creative thinker who loves to blend storytelling with innovation. Here you can explore some of my key projects that showcase my creativity and vision. Dive in and enjoy! Welcome to MicInkMusafir—a journey through stories, melodies, and musings. Here, I merge my passions for podcasting, writing, music, and travel to bring you content that resonates. Join me as we explore narratives that traverse landscapes and emotions alike. Upcoming Podcast Series: Bharat Ki Baat, Bahri Bihari & Others.; a culturally immersive podcast exploring the rich history.
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Autor
MicInkMusafir (Amitbhanu)
Categoria
Site do podcast
Último episódio
18 de jul de 2025
Onde ouvir?
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Episódios
Sooni Aankhen Sookhe Sapne(Hindi Poem) 13.03.2023 1:55
सूनी आँखें सूखे सपने कौन बिगाड़े खेल ये अपने फूँक-फूँक के पैर रखे काँटों पे छाले क्यों बनते! मन कपास के श्वेत धागे रंग-बिरंगे रिश्ते बँधते मोड़ मिलें तो छूटे हाथ चार कदम भी साथ न चलते! अदृश्य दीवारें सँकरे कोने हाथों से सौभाग्य फिसलते बिन पत्तों के पेड़ों से उम्मीदों के घड़े लटकते! थका हुआ सा दिन कैसे देखे थके सूरज को ढलते शाम बिना ही रात आ जाती बिना सुबह के ही दिन चढ़ते! ऐसी होनी ही जीवन है...
कड़वा लगे जब (A Hindi Poem) 03.03.2023 1:13
कड़वा लगे जब तो समझो कि सच है भले काम आए ना पर सच तो सच है! ये बग़लें ना झाँकें ना आँखें हैं नीची धक से जो लागे तो समझो कि सच है! भले धूल फाँकें पर झुकना ना जाने जो कुछ भी ना माँगे तो समझो कि सच है! ये ना फुसफुसाये ये ना डगमगाये जो ना गिड़गिड़ाए तो समझो कि सच है! जो ना बात माने मर-मिटने की ठाने चले ना बहाने तो समझो कि सच है! कड़वा लगे जब तो समझो कि सच है भले काम आए ना पर सच तो सच है!
Safar Nahin Hai Aasan(Hindi Poem) 21.02.2023 1:41
सफर नहीं है आसान मुश्किलों से भरा हर कोना ख़ाली आँखें तकतीं छत काँटों सा चुभे बिछौना! करवट बदल बदल के थक चुका शरीर सुन्न हैं सर पे पड़े हाथ पैरों में लगी ज़ंजीर! पर सारी आशंकाओं पर भारी स्थिर मति का होना सारे संशयों का निवारण आशाओं का जीवित होना! थक-थक के थक जाना ही फिर से चलने की तैयारी गिर-गिर के फिर उठ जाना कि अबकी तेरी बारी! तो भार हटा मन-मस्तक से देख फ़लक तक सीधा सारी बाधा सारे वि...
JO NAHIN HAI ABHI- A HINDI POEM 14.02.2023 1:05
जो नहीं है अभी वो होगा कभी यही सोचकर वो जी रहा होगा! सारे जतन लगते निरर्थक तब तक… जब तक… आदमी चाँद ना छू ले समंदर ना तैर ले ऊँचे पर्वत ना चढ़ जाए! इसके बाद भी बहुत कुछ बाक़ी है जो नहीं है लेकिन होगा यही सोचकर वो जी रहा होगा! क्यूँकि.. अभी कहाँ हुआ है वो अमर और अजेय! अभी कहाँ खोजी है वो दवा! सदियों से सदियों का सफ़र यही सोचकर कि जो नहीं है वो होगा वो जी रहा होगा!
Jab Chand Dhara Ko Chhoona Chahe(Hindi Kavita) 07.12.2022 1:25
जब चाँद धरा को छूना चाहे, तरसी आँखें फैली बाँहें, कोने में कहीं पड़ा चकोर, भरता जाए ठण्डी आहें! कैसी चिर प्रतीक्षा है ये, कठिन है कितनी मिलन की राहें, काश! कहीं ऐसा हो जाता, मिलके फिर कोई दूर ना जाए! क्या सब पूर्व सुनिश्चित है, या पल-पल भाग्य बनाए, मीठे स्वप्न सा क्यूँ है जीवन, खुली आँख तो भंग हो जाए! सब कुछ पा लेने की आशा, कितनी हैं अतृप्त इच्छाएँ, कैसी लगी ये धुनकी मन को, मन-चकोर बस चाँद को चाहे...
हम भेष बदल के आयेंगे (Hindi Poem) by Amitbhanu 16.11.2022 1:28
हम भेष बदल के आयेंगे, तुम फिर भी मुँह घूमा लेना, हम साथ मुहब्बत लाएँगे, तुम फिर भी हाथ छुड़ा लेना! जब क़दम-क़दम पे ठोकर हो, तो रस्ता कैसे पार करे, जब दिल जज़्बात से ख़ाली हो, तो अच्छा है इनकार करे! हमने तो सजा ली महफ़िल भी, अब तू आए या ना आए, अब समा जले या परवाना, हमने भी क़सम अब खा ली है! किश्तों में कटेगी तन्हाई, हम टुकड़ों में ही जी लेंगे, अब जाम जफ़ा का घूँट-घूँट, घुट-घुट के हम पी लेंगे! तू दू...
Purana Samay (Hindi Poem)- Episode 4 07.11.2022 1:32
पुराना समय’ ऐसे तो कहाँ याद आता है मगर जब भी कहीं दिख जाता है कोई ‘पुराना दरवाज़ा’ तो याद आ जाता है ‘पुराना घर’! पुराना घर और ‘खप्पर की छत’ बरसात में छत से टपकता पानी और याद आ जाते हैं ‘पुराने लोग’ उनके सपने और उनकी निशानी! ‘पुराना समय’ ऐसे तो कहाँ याद आता है मगर जब भी कहीं दिख जाती है कोई पगडण्डी तो याद आ जाता है वो ‘पुराना रस्ता’! पुराना रस्ता और ‘पुराने पेड़’ साइकि...
KIRAYE KA CHAND(HINDI POEM) 14.10.2022 1:42
KIRAYE KA CHAND(HINDI POEM) किराए का चाँद कड़वे घूँट हैं होते सच के, मिला के झूठ पिए जा, चाँद किराए पर ले के, अपने ख़्वाब जिए जा! क्या रक्खा है पछताने में, भूल हुई क्या कभी ना पहले, क्षत हृदय के अरमानों को, हाथों हाथ लिए जा! चल की चाँद बुलाए तुमको, तारे ना भरमाएँ तुमको, जहाँ ना सोए सूरज एक पल, अपनी राह किए जा! कल जिसकी कल सोच रहा था, वो ही है आया बनके आज, उठ जा फिर से ले अंगड़ाई, अब तो ना फिर कल प...
Chhootata Sa Jata Hun Main(Hindi Kavita) 06.10.2022 1:01
छूटता सा जाता हूँ मैं अवलंब काम नहीं आते कैसे थाम रखी है डोर पतंग के काम नहीं आते! वैसे तो खुला है सारा आकाश जीतने को पर पाँव सम्भले नहीं धरती काम नहीं आती! मैं हर दिन वहाँ जाता हूँ लौट आने के लिए कोई विश्वास ऐसा नहीं कोई प्रतिज्ञा काम नहीं आती! सारे बहाने जो बनाए थे सच निकले अंत में अब मेरे पाँव उलझ जाते हैं और मेरे कहे पे नहीं जाते! मैं बाहर से चुप अंदर के शोर को सुनता हूँ क्यूँकि मेरे शब्द भी म...
"Ab To Baat badalani Hogi"(A Hindi Poem) 29.09.2022 1:21
अब तो बात बदलनी होगी चाल नई कोई चलनी होगी जब मंजिल ठिकाने बदले हमें भी राह बदलनी होगी चाल नई कोई चलनी होगी! अब तक सबकी सुनता आया राग पुराना धुनता आया बदले तेवर समय ने तब फिर तुम्हें भी तौर बदलनी होगी चाल नई कोई चलनी होगी! बूँद-बूँद से नहीं भरेगा घड़ा समय का क्षण में खाली गागर में सागर भर जाए जतन कुछ ऐसी करनी होगी चाल नई कोई चलनी होगी! काली रात के काले साए जब–जब सोए तभी डराएं मन टटोल वो आग खोज नई स...
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