Siva Prasad

Gita Acharan

Bhagavad Gita is a conversation between Lord Krishna and Warrior Arjun. The Gita is Lord's guidance to humanity to be joyful and attain moksha (salvation) which is the ultimate freedom from all the polarities of the physical world. He shows many paths which can be adopted based on one's nature and conditioning. This podcast is an attempt to interpret the Gita using the context of present times. Siva Prasad is an Indian Administrative Service (IAS) officer. This podcast is the result of understanding the Gita by observing self and lives of people for more than 25 years, being in public life.

Autor

Siva Prasad

Categoria

Religion

Site do podcast

www.gitaacharan.org

Último episódio

9 de jul de 2026

Onde ouvir?

Podcasts no app Replaio Radio Em breve

Os podcasts estão chegando ao app. Instale agora e seja o primeiro a descobrir um jeito totalmente novo de curtir podcasts

Baixe no Google Play Instale grátis Android 5 mi+ downloads · nota 4,8 iOS em breve

Episódios

207. एकनिष्ठ भक्ति 14.01.2026

भगवद्गीता के चौदहवें अध्याय को ‘गुण त्रय विभाग योग’ कहा जाता है, जिसमे गुणों और गुणातीत की व्याख्या की गई है। श्रीकृष्ण इस अध्याय का समापन गुणों से परे जाने का उपाय बताते हुए करते हैं और कहते हैं, "जो लोग अनन्य (अव्यभिचारेण) भक्ति के साथ मेरी सेवा करते हैं, वे तीनों गुणों से ऊपर उठकर ब्रह्म (गुणातीत) के स्तर पर पहुँच जाते हैं (14.26), क्योंकि मैं ही उस निराकार ब्रह्म का आधार हूँ जो अमर, अविनाशी, श...

206. गुणातीत का आचरण 04.01.2026

श्रीकृष्ण गुणातीत के आचरण के बारे में बताते हैं जो प्रकृति के तीन गुणों से ऊपर उठ गए हैं और कहते हैं, “वे जो सुख और दुःख में समान रहते हैं;जो आत्मा में स्थित हैं; जो मिट्टी के ढेले, पत्थर और सोने के टुकड़े को समान मानते हैं; जो सुखद और अप्रिय घटनाओं में एक समान रहते हैं; जो बुद्धिमान हैं, जो निन्दा और प्रशंसा दोनों को समभाव से स्वीकार करते हैं; जो सम्मान और अपमान में एक समान रहते हैं; जो मित्र और...

205. गुण- दासता से प्रभुत्व तक 31.12.2025

यह समझाने के बाद कि सत्व, रजस् और तमस् नामक तीन गुण आत्मा को भौतिक शरीर से बांधते हैं, श्रीकृष्ण इन गुणों को पार करके गुणातीत या निर्गुण बनने के लिए कहते हैं। अर्जुन ने तुरंत पूछा कि इन तीनों गुणों से अतीत पुरुष के लक्षण क्या हैं, उसका आचरण कैसा होता है और वह इन तीनोंगुणों से कैसे परे जाता है (14.21)। श्रीकृष्ण कहते हैं, "तीनों गुणों से अतीत मनुष्य सत्वगुण से उत्पन्न प्रकाश, रजोगुण से उत्पन्न कर्म...

122. 'అంతా ఆయనే' అనే మంత్రం 22.12.2025

పరమాత్ముని రూపంలో ఉన్న శ్రీకృష్ణుడు, "సకల ప్రాణులయందును ఆత్మరూపముననున్న నన్ను (వాసుదేవుని) చూచుపురుషునకు, అట్లే ప్రాణులన్నింటిని నాయందు అంతర్గతములుగా ఉన్నట్లు చూచువానికి నేనుఅదృశ్యుడుని కాను, అతడును నాకు అదృశ్యుడు కాడు" అనిచెప్పారు (6.30). ఈ శ్లోకం భక్తి యోగానికి పునాది, ఇక్కడఅభ్యాసకులు ప్రతిచోటా మరియు ప్రతి పరిస్థితిలోనూ పరమాత్మను దర్శించగలుగుతారు. 'అంతా అయనే' అనే మంత్రంలో, &#39...

204. मृत्यु के दो प्रकार 17.12.2025

श्रीकृष्ण कहते हैं, "जब बुद्धिमान व्यक्ति   (द्रष्टा) यह देखते हैं कि सभी कार्यों में प्रकृति के तीनों गुणों के अलावा कोई कर्ता नहीं है और जो तीनों गुणों से अत्यन्त परे मुझ परमात्मा को तत्त्व से जानते हैं, वे मेरी दिव्य प्रकृति को प्राप्त करते हैं (14.19)। शरीर से संबद्ध   तीन गुणों को पार करके गुणातीत होकर शरीरधारी जीव (देही) जन्म, मृत्यु, रोग, बुढ़ापे और दुःखों से मुक्त होकर अमरत्व (मोक्ष)...

121. నమస్కారం యొక్క శక్తి 17.12.2025

భారతీయులు తారసపడినప్పుడు ఒకరికొకరు నమస్తే, సమస్కారం అని అభినందించుకుంటారు. 'నీలోని దైవత్వానికి వందనం' అన్నది ఈ పదానికి అసలైన అర్థం. విభిన్న సంస్కృతులలోని శుభాకాంక్షలు ఇదే విధమైన సందేశాన్ని అందిస్తాయి. "అన్నిజీవులలో తన ఆత్మను మరియు అన్ని జీవులని తన ఆత్మలో చూడటం మరియు ప్రతిచోటా అదే చూడటం" (6.29) అన్న శ్రీకృష్ణుడు ప్రభోధాన్ని ఆచరణలో పెట్టటడమే ఈ పదము యొక్క ప్రయోగం. ఈ అవగాహనతో మనము...

203. गुणों के पहलू 08.12.2025

श्रीकृष्ण कहते हैं, "जब देहधारी जीव सत्त्वगुण की प्रधानता में मृत्यु को प्राप्त होता है, तब वह उत्तम ज्ञान वालों के शुद्ध लोकों को प्राप्त होता है(14.14)। जो व्यक्ति रजोगुण की प्रधानता में शरीर त्याग करता है, वह कर्मों में आसक्त लोगों के बीच जन्म लेता है। और जो तमोगुण में लीन होकर मृत्यु को प्राप्त होता है, वह मूढ़ (अविवेकी या अज्ञानमय) योनियों में जन्म लेता है"(14.15)। ​​श्रीकृष्ण ने पह...

202. प्रभावशाली गुण की पहचान 02.12.2025

श्रीकृष्ण कहते हैं, "सत्वगुण, रजोगुण और तमोगुण नामक प्रकृति से उत्पन्न तीन गुण अविनाशी जीवात्मा को शरीर में बांधते हैं (14.5)। इनमें, सत्वगुण निर्मल होने के कारण आत्मा को सुख और ज्ञान के भावों के प्रति आसक्ति उत्पन्न करके उसे बन्धन में डालता है (14.6)। रजोगुण की प्रकृति इच्छा है। यह कामना और आसक्ति   को जन्म देता है और आत्मा को कर्म में बांधता है (14.7)। तमोगुण अज्ञान से उत्पन्न होता है और दे...

201. माता और पिता 30.11.2025

भगवद्गीता के चौदहवें अध्याय का शीर्षक 'गुण त्रय विभाग योग' अर्थात्गुणों से परे जाकर एकता है। यह पहले बताए गए प्रकृति के वर्णनका विस्तार है। इस अध्याय में, श्रीकृष्ण प्रकृति से उत्पन्न गुणों के बारे में और ज्ञान प्राप्त करके उनको कैसे पार किया जाए इस विषय में गहराई से बताते हैं। श्रीकृष्ण कहते हैं, "अब मैं पुनः तुम्हें सभी ज्ञानों में उत्तम उस परम ज्ञान के विषय में बताऊँगा, जिसे जानकर...

200. आत्मा शरीर को प्रकाश देती है 16.11.2025

श्रीकृष्ण कहते हैं, "जिस प्रकार से एक सूर्य समस्त ब्रह्माण्ड को प्रकाशित करता है उसी प्रकार से आत्मा चेतना शक्ति के साथ पूरे शरीर को प्रकाशित करती है" (13.34)। शरीर में जीवन लाने के लिए आत्मा की आवश्यकता होती है। यह बिजली की तरह है जो उपकरणों में जीवन लाती है।  गीता के तेरहवें अध्याय का शीर्षक 'क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग' है जहां श्रीकृष्ण स्पष्ट करते हैं कि भौतिक शरीर को क्षेत...

199. एक जड़ एक मूल 10.11.2025

श्रीकृष्ण कहते हैं, "जब वे विविध प्रकार के प्राणियों को एक ही परम शक्ति परमात्मा में स्थित देखते हैं और उन सबको उसी से जन्मा समझते हैं तब वे ब्रह्म का ज्ञान प्राप्त करते हैं" (13.31)। समसामयिक वैज्ञानिक समझ के अनुसार ब्रह्माण्ड लगभग 14 अरब वर्ष पूर्व एक बिन्दु से प्रारम्भ हुआ और आज भी विस्तारित हो रहा है। विस्तार की इस प्रक्रिया से बड़ी संख्या में तारे और ग्रह बने। इसने विभिन्न प्रकार के...

119. చైతన్యం, కరుణల పొందిక 04.11.2025

ఈ భూలోకంలో జ్ఞానోదయం పొందిన ప్రతి వ్యక్తి చేసిన బోధనల సారాంశమూ సమానత్వమే. పదములు, భాషలు మరియుపద్ధతులలో తేడా ఉండవచ్చు కానీ సమత్వము సాధించుటమే ప్రతి ఒక్కరి సందేశం యొక్క సారాంశము. దీనికి భిన్నంగా సాగిన ఏ ప్రభోధనమైనా, ఆచరణ అయినా మూఢత్వంతో కూడుకున్నది తప్ప మరోటి కాదు. మనస్సు విషయములో ఒక వైపు ఇంద్రియాలు మరియు మరొక వైపు బుద్ధి మధ్య సమతుల్యత సాధించడం. ఒకరుఇంద్రియాల వైపు మొగ్గితే కోరికల్లో మునిగిపోతాడు. మే...

198. हवा में महल 04.11.2025

श्रीकृष्ण कहते हैं, "जितने भी चर और अचर सृष्टि तुम्हें दिखाई दे रही हैं वे सब क्षेत्र और क्षेत्र के ज्ञाता का संयोग मात्र हैं (13.27)। जो परमात्मा को सभी जीवों में आत्मा के रूप में देखता है और जो इस नश्वर शरीर में दोनों को अविनाशी समझता है केवल वही वास्तव में देखता है" (13.28)। इसी तरह का वर्णन श्रीकृष्ण ने पहले भी किया था जहां उन्होंने 'सत्' को शाश्वत और 'असत्' को वह बता...

197. व्यक्तित्व पर मार्ग आधारित होता है 02.11.2025

द्रोणाचार्य धनुर्विद्या में निपुण थे जो अपने शिष्य अर्जुन को धनुर्विद्या सिखा रहे थे। एक और छात्र एकलव्य भी द्रोणाचार्य से सीखना चाहता था, जिन्होंने उसे शिक्षा देने से इनकार कर दिया। एकलव्य ने वापस लौटकर द्रोणाचार्य की एक मूर्ति स्थापित की और मूर्ति को वास्तविक गुरु मानकर धनुर्विद्या सीखी। कहा जाता है कि वह अर्जुन से भी श्रेष्ठ धनुर्धर निकला। यह कहानी गुरु-शिष्य के रिश्ते और ज्ञान प्राप्ति के क्षे...

118. పరివర్తనయే శాశ్వతము 24.10.2025

వ్యక్తీకరించబడిన అంటే భౌతిక ప్రపంచంలో, పరివర్తనం శాశ్వతము. అవ్యక్తమైన లేదా ఆత్మ ఎల్లప్పుడూ మార్పు లేకుండాఉంటుంది. ఈ రెండు రకాల వ్యవస్థల మధ్య సమన్వయం, సమతుల్యం సాధించటానికి ఓ పద్ధతి అవసరం. ఈ పధ్ధతి ఓ స్థిరమైన కేంద్రంను ఆధారం చేసుకుని చక్రం తిరగడానికి బాల్‌ బేరింగ్‌ వ్యవస్థ తీసుకొనివచ్చే సమన్వయము లాంటిది. ఈ పద్ధతికి మరో ఉదాహరణ ఏమిటంటే కారులో ఉండే గేరు బాక్స్. అది కారు, ఇంజనుల వేర్వేరు వేగాల మధ్య సమన...

196. एकता ही मुक्ति है 24.10.2025

श्रीकृष्ण कहते हैं, "इस शरीर में स्थित पुरुष को साक्षी (दृष्टा),अनुमन्ता, भर्ता, भोक्ता, महेश्वर और परमात्मा भी कहा जाता है'' (13.23)। इस जटिलता को समझने के लिए आकाश सबसे अच्छा उदाहरण है। इसे इसके स्वरूप के आधार पर अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है जैसे एक कमरा, एक घर, एक बर्तन आदि। मूलतः, आकाश एक है और बाकी इसकी अभिव्यक्तियां हैं। श्रीकृष्ण आश्वासन देते हैं, "वे जो परमात्मा, जीवात...

195. प्रकृति और पुरुष 14.10.2025

श्रीकृष्ण कहते हैं, "जान लो कि प्रकृति और पुरुष दोनों अनादि हैं। तीनों गुण और शरीर में होने वाले विकार (विकास या परिवर्तन) प्रकृति से पैदा होते हैं (13.20)। प्रकृति कारण और प्रभाव के लिए जिम्मेदार है, पुरुष सुख और दुःख के अनुभव के लिए जिम्मेदार है (13.21)। प्रकृति के प्रभाव में, पुरुष गुणों का अनुभव करता रहता है। गुणों के प्रति आसक्ति ही विभिन्न योनियों में जन्म का कारण है" (13.22)।  परि...

117. నిగ్రహము అనే కళ 03.10.2025

మన మెదడు ఓక అద్భుతమైన అవయవం. దానికున్న ఓక ముఖ్యమైన లక్షణం ఏమిటంటే దానికి నొప్పి ఏమిటో తెలీదు ఎందుకంటే నొప్పిని గురించి మెదడుకు సూచనలు పంపే నోసిసెప్టార్లు మెదడులో ఉండవు. న్యూరో సర్జన్లు ఈ లక్షణాన్ని ఉపయోగించి మనిషి మేలుకొని ఉన్నప్పుడు మెదడు యొక్క శస్త్రచికిత్స చేస్తారు. శారీరక నొప్పులు మరియు ఆహ్లాదాలు మన మెదడు యొక్క తటస్థ స్థితితో పోల్చడం వలన కలిగే అనుభవాలు. అలాగేమానసిక భావాలకు కూడా ఇదే వర్తిస్తుంద...

194. परमात्मा सभी के दिलों में बसते हैं 03.10.2025

श्रीकृष्ण कहते हैं, "परमात्मा सबका पालनकर्ता, संहारक और सभी जीवों का जनक है। वे अविभाज्य हैं, फिर भी सभी जीवित प्राणियों में विभाजित प्रतीत होते हैं (13.17)। वे समस्त प्रकाशमयी पदार्थों के प्रकाश स्रोत हैं, वे सभी प्रकार की अज्ञानता के अंधकार से परे हैं। वे ज्ञान हैं, वे ज्ञान का विषय हैं और ज्ञान का लक्ष्य हैं। वे सभी जीवों के हृदय में निवास करते हैं (13.18)। इसे जानकर मेरे भक्त मेरी दिव्य प...

116. ఆధ్యాత్మికతకు సులభమైన మార్గం 26.09.2025

ఆధ్యాత్మిక మార్గం గురించి ఒక సాధారణ భావన ఏమిటంటే దానిని అనుసరించడం కష్టతరమైనది. అందువలననే, చిన్న ప్రయత్నాల ద్వారా కర్మయోగంలో పెద్ద లాభాలను పొందగలమని శ్రీకృష్ణుడు ఇంతకుముందు హామీ ఇచ్చారు(2.40). దీనిని మరింత సులభతరం చేస్తూ శ్రీకృష్ణుడు ఈ విధముగా చెప్పారు, "ఆహారవిహారాదులయందును, కర్మాచరణముల యందును, జాగ్రత్స్వప్నాదుల యందును, యథాయోగ్యముగా ప్రవర్తించు వానికి దుఃఖనాశకమగు ధ్యాన యోగము సిద్ధించును"...

193. पास होकर भी दूर 26.09.2025

एक बार एक पिता अपने दस साल के बेटे को खेल के मैदान में ले गया। उसने एक गेंद फेंकी और खेल का नियम यह था कि लड़के को गेंद वापस लाकर अपने पिता को देना है। मैदान खिलौनों से भरा था। रास्ते में, लड़के का ध्यान एक खिलौने की तरफ आकर्षित होता है और वह उसके साथ खेलना शुरू कर देता है। तब उसके पिता उसे गेंद के बारे में याद दिलाने के लिए आवाज लगाते हैं। वह खिलौने को छोड़कर फिर से गेंद के पीछे दौड़ना शुरू कर दे...

192. ‘वह’ हैं भी और नहीं भी 18.09.2025

जीवित रहने के लिए जिज्ञासा आवश्यक है। वर्त्तमान के संदर्भ में,अपने व्यावसायिक और व्यक्तिगत जीवन में अद्यतन (up-to-date)रहने की उम्मीद की जाती है। अर्जुन प्रश्न करते हैं कि क्या जानने योग्य है (13.1)। इसके बारे में, श्रीकृष्ण ने पहले उल्लेख किया था कि "जब 'उसे'जान लेते हैं तो जानने के लिए कुछ भी नहीं बचता" (7.2)।   श्रीकृष्ण कहते हैं, "जो जाननेयोग्य है तथा जिसको जानकर मनुष्य...

115. ధ్యాన విధానము 18.09.2025

శ్రీకృష్ణుడు, మీరు మీ స్వంత మిత్రుడు లేదా మీ స్వంతశత్రువు అని చెప్పారు (6.6). మన స్వంత స్నేహితుడిగా మారడానికి ఇంద్రియాలను నియంత్రించడం ద్వారా (6.8) సుఖ-దుఃఖ భావాల పట్ల (6.7), బంగారు-రాయి వంటి వస్తువుల పట్ల (6.8) మరియు స్నేహితులు-శత్రువుల వంటి వ్యక్తుల పట్ల (6.9),సమానత్వ భావముతో ఉండాలని శ్రీకృష్ణుడు సూచించారు. దీనితోపాటు ధ్యాన మార్గమును కూడా అనుసరించవచ్చని శ్రీకృష్ణుడు చెప్పారు (6.10-6.15). శ్రీకృష...

114. అతిని విసర్జించాలి 13.09.2025

శ్రీకృష్ణుడు బంగారం, రాయి మరియు మట్టిని సమదృష్టితో చూడమని చెప్పిన తర్వాత (6.8), అయన ఈ సమత్వాన్ని గురించి మరింత విస్తారంగా ఇలా చెప్పారు, "సుహృదులయందును, మిత్రులయందును, శత్రువులయందును, ఉదాసీనులయందును, మధ్యస్థుల యందును, ద్వేషింపదగినవారి యందును, బంధువుల యందును, ధర్మాత్ములయందును, పాపులయందును, సమబుద్ధి కలిగియుండువాడు మిక్కిలి శ్రేష్ఠుడు" (6.9). శ్రీకృష్ణుడు బాహ్య విషయాలను, పరిస్థితులను సమదృష్ట...

191. आध्यात्मिक होना 13.09.2025

ज्ञान के बारे में अर्जुन के अनुरोध के जवाब में श्रीकृष्ण कहते हैं, "विनम्रता, दम्भहीनता, अहिंसा, क्षमा, मन-वाणी आदि की सरलता, गुरु की सेवा,पवित्रता, दृढ़ता, आत्मसंयम (13.8); इंद्रिय विषयों के प्रति वैराग्य, अहंकार रहित होना, जन्म, रोग, बुढ़ापा और मृत्यु के दोषों की अनुभूति (13.9); अनासक्ति, सन्तान, स्त्री, घर या धन आदि वस्तुओं की ममता से मुक्ति, प्रिय और अप्रिय प्राप्ति में सदा ही शाश्वत समभा...

Ouça o podcast Gita Acharan no Replaio

Rádio e podcasts em um só app - grátis e sem cadastro. Instale hoje e não perca o lançamento

Baixe no Google Play

O Replaio não é o publicador dos podcasts; os nomes dos programas, as capas e o áudio pertencem aos seus autores e são distribuídos por feeds RSS públicos