SARVAJEET D CHANDRA
Unpen by Sarvajeet
The podcast is about the poems, songs, novel and stories of Sarvajeet D Chandra in english and hindustani. It features his novels poems, musings, stories and writings. Occasionally he will also share stories and songs of others which resonate with him. Sarvajeet is based in Mumbai, India. He writes on life, love, longing, romance, purpose etc.
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Episodes
पिहरवा- सर्वजीत. Piharwa, a Hindustani song by Sarvajeet D Chandra 27.08.2021 2:38
पिहरवा- सर्वजीत पिहरवा, पिहरवा पिहरवा, पिहरवा ख़्वाबीदा, पिहरवा शोरीदा, पिहरवा याद होगा तुझे खुले बालों का जहां अनसोयी रातें भूला अफ़साना सुकून से भरा तेरा मुस्कुराना सितारों से दूर हमारा आबोदाना पिहरवा, पिहरवा पिहरवा, पिहरवा ख़्वाबीदा, पिहरवा शोरीदा, पिहरवा याद होगी तुझे मेरी खामोशियाँ सुर्ख़ होंठों का पुराना याराना फ़ासलों में बसी अपनी नज़दीकियाँ अपने इश्क़ की मुकम्मल दास...
I Feel All That - Poem by Sarvajeet D Chandra 02.06.2021 2:48
I Feel All That In my last life We lived in a small village Of butterflies and mango trees We met in orchards, near the village pond The freshness of your smell, your curves Dirt marks, scratches on my back Dry grass, twigs in your tousled hair We misbehaved, sang improper songs Your floral dresses, wind-blown skirt Monsoon evenings, the disorder of your curls Your body, half-open eyes, a river in...
लॉकडाउन नगरिया-सर्वजीत Lockdown Nagariya - Poem by Sarvajeet D Chandra 17.05.2021 1:35
लॉकडाउन नगरिया- सर्वजीत शोर में डूबा हुआ शहर सन्नाटे से झूझ रहा है गाड़ियों से रौंदा रास्ता इंसानो को ढूँढ रहा है सारी रात दौड़ती मुंबई नज़रबंद सिमटी अकेली है मर्सेडीज़ में दुकान छानते को मिल ना पायी एक मैगी है पटरियों पर उमड़ती भीड़ अब व्हाट्सएप पर बैठी है पोछा लगाते मैनेजर साहब महीने भर ना आयी महरी है चार दीवारों में क़ैद बचपन खेल ना सका, बुझा सा है गाँव से दूर, बेबस मज़दूर सहमा, लाचार, भू...
मन की बात - सर्वजीत Mann Ki Baat- Poem in Hindustani by Sarvajeet D Chandra 14.05.2021 2:56
मन की बात - सर्वजीत कैसे दिलासा दूँ मैं तुमको कैसे दुःख का भागीदार बनूँ तुम्हारी व्यथा को समझूँ कैसे कैसे पीड़ा का निस्तार करूँ गंगा में लावारिस ,बहते शव के संग डूबती मानवता का कैसे उत्थान करूँ आख़िरी यात्रा की मर्यादा छिन्न ना हो देह का कैसे उपयुक्त संस्कार करूँ मूक तानाशाह खून पीते दरिंदों के ख़िलाफ़ बुलंद कैसे आवाज़ करूँ शमशान बनाने वाले, लुब्ध भेड़ियों से देश को कैसे उन्मुक्त, आज़ाद करूँ रोज़...
तुम दूर होते काश- सर्वजीत Tum Door Hote Kaash- Sarvajeet D Chandra 28.04.2021 1:55
तुम दूर होते काश तेरी कशिश में कट जाती जिंदगी की रातें तेरी बेरुखी में बीत जाता मीलों का सफ़र तेरी यादों में तन्हा डूब जाती मेरी शाम तुम दूर होते काश, ना मिलते इधर उधर सपने की तरह बिखर जाती तुम्हारी आस सदियों तक बेक़रार रहती तुम्हारी जुस्तजू ग़ज़ल में ढल जाता तुम्हारा फ़ितूर, जज़्बा अनजान हो जाती तुम, टूटा फूटा सा राब्ता ना गुमान होता कि तुमको भी याद आता हूँ ना ख़लिश सी उभरती दफ़अतन सीने में...
तुम बीच नदी , तुम ही किनारा - सर्वजीत .Tum Beech Nadi, Tum Hi Kinara- Hindi Poem on Love, Longing by Sarvajeet D Chandra 21.03.2021 3:08
तुम बीच नदी, तुम ही किनारा -सर्वजीत दीपक भी तुम, तुम ही अंधियारा तुम बीच नदी, तुम ही किनारा कभी अकाल, कभी बारिशों का मौसम कभी चुभता दर्द, कभी दिल का सहारा कुछ अपनी, कुछ माँग लिया तुमको कोहरे की आग, जलती-बुझती हो कभी मिली सी, कभी हो जुदा छूकर मुझे, कहीं ओझल सी हो कुछ बंधी हुई, कुछ उन्मुक्त पवन पतंग सी दूर आसमाँ में रहती हो कभी अपने, कभी बेगाने से नयन अकेला हूँ या फिर साथ में बैठी हो आँगन में झाँकती...
Caravan Awaits- Poem by Sarvajeet D Chandra. 15.03.2021 1:43
Caravan Awaits-Poem by Sarvajeet D Chandra Would you be free and not safe To not be a citizen but a lonely sage Row a little boat in the rough sea Fly in a rainy night, unable to see Would you be curious, not full of pride Sit still and marvel, as world speeds by Feel the child in you, that’s barely alive Your creativity awaits, ready for a flight Would you be a lonely shore, not city of lights Li...
रावी- सर्वजीत Ravee- A poem by Sarvajeet D Chandra 08.03.2021 2:22
रावी - सर्वजीत ज़िंदगी गुजर सी गयी है तुम्हारे इश्क़ को समझने में मौसम बीतते रहे उम्र ढलती रही तुम सुलझती रही तुम आसान होती रही साथ होकर सदियों से भी राज़ थी पहले, कुछ खुलने लगी रातें गुजरती रहीं चिराग़ जल के बुझते रहे मसरूफ़ ज़िंदगी में उलझकर भी तुमसे बेख़बर हम रह ना सके रुखसत हुई तुम जब भी कभी शफ़क की ख़ामोशी में ढूँढते रहे मुख़्तलिफ़ मिज़ाज थे फिर भी रास्ते तुम्हारी ओर मुड़ते ही रहे तुम्हा...
तुमसे जो मिला - सर्वजीत Tumse Jo Mila- Hindi Poem by Sarvajeet D Chandra. Poems on Love,Romance,Longing 27.02.2021 2:05
तुमसे जो मिला-सर्वजीत. Tumse Jo Mila- Hindi Poem by Sarvajeet तुमसे जो थोड़ा-बहुत मिला उतना ही मुझे ,सब कुछ लगा थोड़ी जो मोहब्बत मिली उसको संग ले ,जी लिया सूखी नदी पर बसा गाँव गीतों में छिपी खामोशी दूर बैठी सी मुलाक़ात मुख़्तलिफ़ सी अपनी दोस्ती रूखी सी तुम्हारी मुस्कान ठंड की सुबह सी रुसवा भूली हुई सी हमारी याद कभी तो आती होगी तुमको ना मुराद तेरी, ना तुमसे जुदा मंज़िल नहीं, मैं सफ़र का रास्ता नाया...
Man-At-Arms : Poem by Sarvajeet D Chandra 24.02.2021 2:34
Man-At-Arms Everyday I rise for a fresh, new battle Who knows if I will be back home alive How wild is the jungle that I have to cross How skilled the sniper aiming at my heart How big is the fight inside me How far I can swim in a rough sea What kind of fighter they wanted me to be My ancestors never really told me Every day, each fight is a daring adventure Full of tactics, retreats,...
मैं तुम्हारा सपना - सर्वजीत . Main Tumhara Sapna- Hindi Poem by Sarvajeet D Chandra. On Love, Longing,Romance 23.02.2021 1:27
मै तुम्हारा सपना हूँ मेरी तालाश में तुम जन्मों का सफर तय करके आयी हो सर्द रातो में ठंडे चूल्हे के पास तुम जब भी किसी का इंतज़ार करोगी वह मेरा इंतज़ार होगा जंगली सड़कों बेजान इमारतों के अकेलेपन में मैं हमेशा तुम्हारे पास रहूँगा इस उदास नीरस जिंदगी में मैं उमंग की लहर बनकर तुम्हारे शरीर में दौड़ूगा और तुम खिल-खिलाकर हँस दोगी तुम्हारे दिल की तेज धड़कन बनकर जब भी तुमसे बात करूँगा मुझे टोकना नही कितनी...
अन्लॉक ज़िंदगी- सर्वजीत. Unlock Jindagi- Hindi Poem by Sarvajeet D Chandra on Unlocking India & Unlocking Lives 16.02.2021 2:04
अन्लॉक ज़िंदगी-सर्वजीत रात है उजड़ी हुई सी देखा फ़िर सपना नया है डूबी हुई सी कश्तियों में आस का दीपक जला है छोड़ गाँव,माँ,छोटी सी बिटिया ४ गज की झुग्गी में करा गुज़ारा बेरहम शहर ने फ़िर से उजाड़ा श्रमिक,ग़रीबी ही गुनाह है ख़ौफ़ में सुकून को ढूँढता घमंडी इंसान, टूटा हुआ सा डर और वाइरस के गब्बर को ललकारे, वह रहनुमा कहाँ है दूर हो रहा था मैं अपनो से मसरूफ,अब फ़ुरसत मिली क़ैद होकर सही,अपने मकाँ को फिर...
कोई विकल्प नहीं -सर्वजीत Koi Vikalp Nahin - Hindustani Poem by Sarvajeet D Chandra . Poetry on Love and Longing 13.02.2021 1:38
Koi Vikalp Nahi -Sarvajeet कोई विकल्प नही-सर्वजीत इतना झुलस गया हूँ सहरओं में इतनी नींद कभी मुझे आयी नही उमंग भरता रहा, आस का एक पंछी कैसी है यह प्यास ,गयी बुझाई नहीं कभी एक था मैं, कभी दो बन जाता कभी एक ना रहता, कहाँ जाने खो जाता कभी लगता था मेरे कई हिस्से कुछ अपने रहे ,कुछ बन गये किसके एक क्षण तुम्हारा, मेरी कई रातें एक शब्द तुम्हारा, कहे कितनी बातें एक स्म्रती तुम ,उमड़े मेरा यौवन एक प्रे...
But You’ll Always Know - Poem by Sarvajeet D Chandra in Indian English. Reflecting on Love, Gratitude, Dreams 13.02.2021 1:38
But You’ll Always Know - Sarvajeet D Chandra Nobody will know If you didn’t count your blessings Gratitude buds that failed to bloom Unthankful for little joys, moments, things Unhappy But you’ll always know Nobody will know If you didn’t avow your love Feelings swept away in monsoon waters Life withering away like a waning moon&...
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