Prof. Subhash Saini

Subhash Saini Podcast

Society HI ↓ 172 episodes

जिंदगी में भरोसा पैदा करने वाले व्यक्तियों, घटनाओं व रचनाओं से परिचय। साहित्यिक-सास्कृतिक-कलात्मक रूचियों का परिष्कार।सत्य आधारित संवेदनशील-समतामूलक, न्यायपूर्ण व विवेकशील समाज का निर्माण। महात्मा बुद्ध, कबीर, रैदास, गुरुनानक देव, जोतीबा फुले, सावित्री बाई फुले, डा. भीमराव आंबेडकर, शहीद भगतसिंह आदि प्रगतिशील विचारकों की चिंतन परंपरा का विकास।

Author

Prof. Subhash Saini

Category

Society

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desharyana.in

Latest episode

Jan 13, 2026

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Episodes

72. Bachhon Ko Swadheen Banao ( निबंध ) बच्चों को स्वाधीन बनाओ - प्रेमचंद 26.06.2021

बच्चों को स्वाधीन बनाओ - प्रेमचंद

71. Kagjee Hakumat ( किसानी नजरिया ) कागजी हुकुमत -चौ. छोटूराम 25.06.2021

चौधरी छोटू राम, अनुवाद-हरि सिंह किसान नेता चौधरी छोटूराम का लेख। वे जाट गजट अखबार प्रकाशित करते थे। किसानों को जागृत करने के लिए अनेक कदम उठाए। किसान आंदोलन उनके ऋणी रहेंगे। किसान राजनीति की उन्होंने शुरुआत की थी। हिंदू-मुस्लिम एकता व सांप्रदायिक सदभाव के कार्य किया। भारत-विभाजन के वे खिलाफ थे। जी चाहता है कि शिमला की ऊंची पहाड़ियों पर रहने वाले सरकारी अफसरों को और लाहौर की ठंडी सड़क और सुंदर पार्को...

70. Swasthya Aur Shiksha (निबंध) स्वास्थ्य और शिक्षा - प्रेमचंद 24.06.2021

(निबंध) स्वास्थ्य और शिक्षा - प्रेमचंद

69. Sampradayikta Aur Sanskriti - Premchand/(निबंध) सांप्रदायिकता और संस्कृति - प्रेमचंद 24.06.2021

सांप्रदायिकता और संस्कृति - प्रेमचंद

68.Bolna Seekh - Ch. Chotu Ram/( किसानी नजरिया ) बोलना सीख - चौ. छोटू राम 24.06.2021

Bolna Seekh - Ch. Chotu Ram/ बोलना सीख - चौ. छोटू राम  चौ. छोटूराम चौधरी छोटूराम स्वतंत्रता से पहले किसान नेता व चिंतक-विचारक थे। किसानों को जागृत करने के लिए उन्होंने जाट-गजट नाम का उर्दू साप्ताहिक प्रकाशित किया। इसमें किसानों में व्याप्त बुराइयों, अंधविश्वास, पांखड, अज्ञानता को दूर करने के लिए तीखे लेख लिखे। किसानों का शोषण करने वाले महाजनों, पंडा-पुजारी वर्ग व शासकों को भी खरी खरी सुनाई। ह...

67. ( किसानी नजरिया ) नया उपदेश - चौ. छोटू राम 23.06.2021

नया उपदेश - चौ. छोटू राम किसानों के नाम संदेश -चौ. छोटूराम चौधरी छोटूराम स्वतंत्रता से पहले किसान नेता व चिंतक-विचारक थे। किसानों को जागृत करने के लिए उन्होंने जाट-गजट नाम का उर्दू साप्ताहिक प्रकाशित किया। इसमें किसानों में व्याप्त बुराइयों, अंधविश्वास, पांखड, अज्ञानता को दूर करने के लिए तीखे लेख लिखे। किसानों का शोषण करने वाले महाजनों, पंडा-पुजारी वर्ग व शासकों को भी खरी खरी सुनाई। हिंदू-मुस्लिम...

66. ( किसानी नजरिया ) जिंदगी का मरकज़ -चौ. छोटूराम 22.06.2021

जिंदगी का मरकज़ -चौ. छोटूराम किसानों के नाम संदेश -चौ. छोटूराम चौधरी छोटूराम स्वतंत्रता से पहले किसान नेता व चिंतक-विचारक थे। किसानों को जागृत करने के लिए उन्होंने जाट-गजट नाम का उर्दू साप्ताहिक प्रकाशित किया। इसमें किसानों में व्याप्त बुराइयों, अंधविश्वास, पांखड, अज्ञानता को दूर करने के लिए तीखे लेख लिखे। किसानों का शोषण करने वाले महाजनों, पंडा-पुजारी वर्ग व शासकों को भी खरी खरी सुनाई। हिंदू-मुस्...

65.( किसानी नजरिया ) भारत में मजहब - चौ. छोटूराम 22.06.2021

भारत में मजहब - चौ. छोटूराम  चौ. छोटूराम चौधरी छोटूराम स्वतंत्रता से पहले किसान नेता व चिंतक-विचारक थे। किसानों को जागृत करने के लिए उन्होंने जाट-गजट नाम का उर्दू साप्ताहिक प्रकाशित किया। इसमें किसानों में व्याप्त बुराइयों, अंधविश्वास, पांखड, अज्ञानता को दूर करने के लिए तीखे लेख लिखे। किसानों का शोषण करने वाले महाजनों, पंडा-पुजारी वर्ग व शासकों को भी खरी खरी सुनाई। हिंदू-मुस्लिम एकता, धार्मिक...

64. ( किसानी नजरिया ) दुश्मन की पहचान - चौ. छोटू राम 21.06.2021

दुश्मन की पहचान - चौ. छोटू राम चौधरी छोटूराम स्वतंत्रता से पहले किसान नेता व चिंतक-विचारक थे। किसानों को जागृत करने के लिए उन्होंने जाट-गजट नाम का उर्दू साप्ताहिक प्रकाशित किया। इसमें किसानों में व्याप्त बुराइयों, अंधविश्वास, पांखड, अज्ञानता को दूर करने के लिए तीखे लेख लिखे। किसानों का शोषण करने वाले महाजनों, पंडा-पुजारी वर्ग व शासकों को भी खरी खरी सुनाई। हिंदू-मुस्लिम एकता, धार्मिक सद्भाव व भाईचा...

63. ( किसानी नजरिया ) किसान की कराहट -चौ. छोटूराम 21.06.2021

 किसान की कराहट -चौ. छोटूराम चौधरी छोटूराम स्वतंत्रता से पहले किसान नेता व चिंतक-विचारक थे। किसानों को जागृत करने के लिए उन्होंने जाट-गजट नाम का उर्दू साप्ताहिक प्रकाशित किया। इसमें किसानों में व्याप्त बुराइयों, अंधविश्वास, पांखड, अज्ञानता को दूर करने के लिए तीखे लेख लिखे। किसानों का शोषण करने वाले महाजनों, पंडा-पुजारी वर्ग व शासकों को भी खरी खरी सुनाई। हिंदू-मुस्लिम एकता, धार्मिक सद्भाव व भा...

62.Lalkar - Ch. Chotu Ram/ ( किसानी नजरिया ) ललकार - चौ. छोटूराम 20.06.2021

Lalkar - Ch. Chotu Ram/ ललकार - चौ. छोटूराम, अनुवाद-हरि सिंह वर्तमान युग तरक्की का युग है, विज्ञान का युग है, ज्ञान और हुनर का युग है, भाषण और लिखाई का युग है, संगठन का युग है! परन्तु बेचारा किसान है कि वर्तमान युग की इन सब विशेषताओं से अनभिज्ञ है। पुरानी कुंड का ठेकरा है और समझता है कि आखिर दुनिया ऐसी भी क्या मानवता से खाली होगी कि इसको एक अपवित्र और व्यर्थ की वस्तु की भांति पांव की ठोकर से ठुकरा...

61 (निबंध) मैं मजदूर हूं - भगवतशरण उपाध्याय 19.06.2021

मैं मजदूर हूं - भगवतशरण उपाध्याय

60. ( निबंध ) आचरण की सभ्यता - सरदार पूर्ण सिंह 19.06.2021

आचरण की सभ्यता - सरदार पूर्ण सिंह

59. ( निबंध ) समाज और धर्म - संपूर्णानंद 18.06.2021

समतामूलक समाज ही सुखी जीवन का आधार है.

58. ( निबंध) मजदूरी और प्रेम (भाग 2) - सरदार पूर्ण सिंह 17.06.2021

मजदूरी और प्रेम (भाग 2) - सरदार पूर्ण सिंह

57. ( निबंध )प्रेम और मजदूरी (भाग- 1) - सरदार पूर्ण सिंह 17.06.2021

सरदार पूर्ण सिंह  का निबंध प्रेम और मजदूरी (भाग-1)

56 - ( निबंध ) भीष्म को क्षमा नहीं किया गया - आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी 16.06.2021

भीष्म को क्षमा नहीं किया गया - आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी सत्ता के अत्याचारों के खिलाफ जो बोलने का साहस नहीं करते वे बुद्धिजीवी महाभारत के भीष्म की तरह हैं. उस मेधा, ज्ञान और बल का क्या जो वक्त पर निर्णय न ले सके और जनहित में उपयोग न हो.

55. ( समीक्षा ) बाबूू भारतेंदु हरिश्चंद्र- प्रेमचंद 15.06.2021

बाबूू भारतेंदु हरिश्चंद्र- प्रेमचंद

54 - ( पत्र ) अपनी नजर में - प्रेमचंद 14.06.2021

अपनी नजर में - प्रेमचंद प्रेमचंद के दो पत्र जो उन्होंने इंद्रनाथ मदान को लिखे थे, जिसमें उनके प्रश्नों के उत्तर दिए हैं। उससे उनके साहित्यिक सरोकारों व रचना प्रक्रिया का पता चलता है। 

53 - ( निबंध ) मानसिक पराधीनता - प्रेमचंद 14.06.2021

मानसिक पराधीनता म दैहिक पराधीनता से मुक्त होना तो चाहते हैं, पर मानसिक पराधीनता में अपने-आपको स्वेच्छा से जकड़ते जा रहे हैं। किसी राष्ट्र या जाति का सबसे बहुमूल्य अंग क्या है? उसकी भाषा, उसकी सभ्यता, उसके विचार, उसका कल्चर। यही कल्चर हिंदू को हिंदू मुसलमान को मुसलमान और ईसाई को ईसाई बनाए हुए हैं। मुसलमान इसी कल्चर की रक्षा के लिए हिंदुओं से अलग रहना चाहता है, उसे भय है, कि सम्मिश्रण से कहीं उसके क...

52 - ( निबंध ) अदभुत अपूर्व स्वप्न - भारतेंदु हरिश्चंद्र 13.06.2021

अदभुत अपूर्व स्वप्न - भारतेंदु हरिश्चंद्र आज रात्रि को पर्यंक पर जाते ही अचानक आँख लग गई। सोते में सोचता क्‍या हूँ कि इस चलायमान शरीर का कुछ ठीक नहीं। इस संसार में नाम स्थिर रहने की कोई युक्ति निकल आवे तो अच्‍छा है, क्‍योंकि यहाँ की रीति देख मुझे पूरा विश्‍वास होता है कि इस चपल जीवन का क्षण भर का भरोसा नहीं। ऐसा कहा भी है – स्‍वाँस स्‍वाँस पर हरि भजो वृथा स्‍वाँस मति खोय। ना जाने या स्‍वाँस को आवन...

51 - ( निबंध ) घर जोड़ने की माया - आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी 12.06.2021

घर जोड़ने की माया - आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी सन् 1942-43 ई. में मैंने कबीरदास के सम्बंध में एक पुस्तक लिखी पुस्तक लिखने की तैयारी दो-ढाई साल से कर रहा था और नाना प्रकार के प्रश्न मेरे मन में उठते रहे। मुझे सबसे अधिक आश्चर्य कबीरदास के परवर्ती साहित्य को पढ़कर हुआ। जिस धर्मवीर ने पीर, पैगंबर, औलिया आदि के भजन-पूजन का निषेध किया था, उसी की पूजा चल पड़ी, जिस महापुरुष ने संस्कृत को कूप जल कहकर भाष...

50 - ( निबंध ) परीक्षा - पं. प्रताप नारायण मिश्र 12.06.2021

जीवन में परीक्षा हमेशा ही भयभीत करती है। सामाजिक संबंधों की परीक्षा हो तो बहुत कम ही पास होते हैं।

49 - ( निबंध ) प्रेमचंद का महत्व - आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी 11.06.2021

अगर उत्तर भारत को समस्त जनता के आचार-विचार, भाव-भाषा, रहन-सहन, आशा-आकांक्षा, दुःख-सुख और सूझ-बूझ को जानना चाहते हैं तो में आपको निःसंशय बता सकता हूँ कि प्रेमचन्द से उत्तम परिचायक आपको दूसरा नहीं मिल सकता । झोपड़ियों से लेकर महलों तक, खोमचेवालों से लेकर बैंकों तक, गाँव पंचायतों से लेकर धारा-सभाओं तक, आपको इतने कौशलपूर्वक और प्रामाणिक भाव से कोई नहीं ले जा सकता । आप बेखटके प्रेमचन्द का हाथ पकड़ कर म...

48 - ( निबंध ) इतिहास और पुराण - राहुल सांकृत्यायन 10.06.2021

सत्ता पिपासु लोग इतिहास को विकृत करके समुदायों और वर्गों को एक-दूसरे खिलाफ भड़काते हैं और अपना उल्लू सीधा करते हैंं। इतिहास और पुराण का घालमेल समाज में मिथ्या चेतना व अवैज्ञानिकता को बढ़ावा देते हैं। राहुल सांकृत्यायन का यह लेख इसके बारे में हमारी दृष्टि निर्मित करने में मदद करता है। प्रस्तुत है राहुल सांकृत्यायन का लेख - इतिहास और पुराण।

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