सेवागाथा । Sewagatha
Sewagatha - The Website of Sewa vibhag of Rashtriya swayamsewak sangh (RSS)
Millions of people spread across the vast country of India want to wipe tears of the needy people and want to serve for the nation. But the need is to win their confidence and join them. By this website we want to develop such belief in people that it is the stories of such dedicated persons of our society who serves for the country and by walking with them step by step they will be able to do the true service of humanity. These people dedicated to serve for the humanity are engaged in developing self respect and confidence in the people who are either the sufferers of the disaster
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सेवागाथा । Sewagatha
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Jun 15, 2026
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Episodes
सैंकड़ों गावों में बहाई विकास की गंगा सुयश चैरिटेबल ट्रस्ट ने जीती गरीबी से जंग 04.01.2022 5:48
ढगेवाडी-महाराष्ट्र का एक छोटा सा गांव। आप में से शायद ज्यादातर ढगेवाडी नही गए होंगे, और बहुत संभव है इसका नाम तक न सुना हो। मगर 32 वर्ष पूर्व एक दम्पति वहां पहुंचा और अपनी संकल्प शक्ति से इस गुमनाम से गांव की तस्वीर बदल दी।
जीवन की सांझ में संवारे सैकड़ो बचपन 01.01.2022 7:01
मीठा राम का गला तब भर आया जब वह अपने अतीत के अंधेरों में अपने अभावग्रस्त बचपन को टोह रहा था। मेहसाणा में 8 साल का बड़ा भाई 6 साल के छोटे भाई पिंटू व मां के साथ सड़क के किनारे फुटपाथ को अपना बिछोना और आसमान की चादर ओढ़े, सिकुड़ कर रात भर अनबुझे सवालों के जवाब खोजता था ।
હું તારા આંગણાની તુલસી 23.12.2021 6:09
પહેલાં લગ્ન, પછી છુટાછેડાની મર્મભેદી પીડા ને ફરી પાછો કોઈ એક માણસ પર વિશ્વાસ કરવો
और जिंदगी जीत गयी 03.12.2021 5:13
फ़ोन पर आवाज़ भी साफ़ नहीं आ रही थी फिर कृष्णा महादिक उन बंगाली बाबू को पहचान भी नहीं पा रहे थे। वे बड़े असमंजस में थे की कोई सिलीगुड़ी से विकास चक्रवर्ती अपने बेटे की शादी के लिए उन्हें फ्लाइट का टिकट क्यूँ भेज रहे हैं|बात आखिर 20 साल पुरानी जो थी जब चक्रवर्तीजी अपने बेटे को एक लाइलाज रोग के लिए टाटा मैमोरियल हास्पीटल मुंबई लाए थे।
पानी आया,जीवन लाया... डोंगरीपाडा (महाराष्ट्र) 30.11.2021 7:01
डोंगरीपाडा में आज सात दशकों का इंतजार खत्म हुआ था। गांव के लोग मानों खुशी से झूम रहे थे। घर-घर पानी पहुंचाने वाले सोलर पम्प को निहारती हुई 73 वर्ष की शांताबाई खंजोडे की आंखो से आंसू थमने का नाम ही नहीं ले रहे थे। मुम्बई से मात्र 80 किलोमीटर दूर पालघर जिले के इस गांव के लोग 72 वर्ष से गांव में पीने वाले पानी का इंतजार कर रहे थे।
सफलता की नई इबारत – स्वरूपवर्धिनी 30.11.2021 5:24
पुणे की मलीन बस्तियों की झुग्गियों में पला बड़ा नेत्रहीन चंद्रकांत आज उसी ब्लाइंड-स्कूल का प्रिंसिपल है, जहां से उसने अपनी पढ़ाई की थी। इससे ही मिलती-जुलती कहानी संतोष की है। मलखम में नेशनल लेवल के खिलाड़ी व पुणे पुलिस में हवलदार संतोष का बचपन भी घोर गरीबी व अभावों की भेंट चढ जाता यदि वो स्वरूपवर्धिनी के संपर्क में न आया होता।
और स्वयंसेवकों के साहस के आगे भीषण आग ने भी कर दिया समर्पण 30.11.2021 4:51
भीषण आग की लपटें - और चारों ओर बस त्राहि-माम। दृष्टि जहॉ तक जा सकती थी, वहॉ तक था बस दम घोंटू धुऑ और बरसते आग के शोले। मृत्यु के इस तांडव के बीच फंसी इंसानी जिन्दगी चीख-पुकार मचाती बेबस सी नज़र आ रही थी।
एक आदर्श गाँव -मोहद 30.11.2021 3:27
यहाँ प्रवेश करते ही लगता है कि, हम किसी विशेष गांव में आ गए हैं। घर-घर के दरवाजे पर ओम व स्वस्तिक की छाप, दीवारों पर जतन से उकेरे गए सुविचार, तो कहीं ब्रम्हांड के रहस्यों को परत दर परत खोलती जानकारियाँ, तो कहीं चौपालों पर संस्कृत में अभिवादन करते लोग
साथी हाथ बढ़ाना 23.11.2021 5:33
आज वो चाहकर भी अपने आंसू रोक नहीं पा रही थी, दरअसल यह खुशी का अतिरेक था, जो आखों से बह निकला था, थोड़े से पैसों की खातिर 20 बरस पूर्व, पिता द्वारा साहूकार के पास गिरवी रख दी गयी ज़मीन सीता ने आज सूद समेत पूरे 60,000 रुपये चुका कर छुड़वा ली थी। तमिलनाडू के एक छोटे से गांव कडापेरी की सीता का परिवार अब कर्ज की बेड़ियों से मुक्त था।
10- Datar me faila shiksha ka ujala Ms. Sudhi siddharth Sahu 28.10.2021 7:22
आज समूचे गांव में सुगंधित सुवासित इत्र छिड़का गया था। गांव की आबोहवा में एक अलग ही स्फूर्ति थी। घर-घर में बड़े जतन से साफ-सफाई की गई थी। मानो जैसे कोई उत्सव हो। वक़्त के पन्नो को थोड़ा पीछे पलटें तो अमूमन आम दिनों में इसके बिल्कुल विपरीत इस गाँव में लगभग सभी घरों में कच्ची शराब बनायी जाती थी, जिसके कारण यहाँ वातावरण में एक अजीब सी कसैली दुर्गंध घुली रहती थी।
वैदिक परंपराओं का पुनर्जागरण सुरभि शोध संस्थान (वाराणसी) 05.10.2021 7:11
त्रिपुरा के बालक मुक्ति की बांसुरी की धुन व नेपाल की आशा के ढोलक की थाप पर कृष्ण भजन, सुनकर मन भाव विभोर सा हो गया। पूर्वोत्तर राज्यों के इन बच्चों को, हिंदी भाषा में गीत गाते बजाते देख मैं ही नहीं मेरे संग गौशाला की गायें भी मानो झूम रहीं थी। बात करते हैं वाराणसी की ,भौतिकता की ओर अग्रसर वर्तमान आधुनिक समाज में विलुप्त होती शिक्षा पद्धति, कृषि पद्धतियां एवं वैदिक परंपराओं का, पुनर्जागरण है, यहां...
हर मुश्किल के साथी। 05.10.2021 6:02
कोरोना महामारी काल ने पग-पग पर समाज के सामने मुश्किलें खड़ीं की हैं। कोविड-19 संक्रमित मरीजों का अंतिम संस्कार हो या परिवारों के भोजन की व्यवस्था । उखड रही सांसों तक ऑक्सीजन पहुँचाने की जद्दोजहद या फिर सरकारी हॉस्पिटलों के पास भटकते मरीजों के परिजनों की भूख व बेबसी, हर मुश्किल घड़ी में समाज को उसके साथ खड़े मिले हैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक। आइये बात करते हैं झारखण्ड के जमशेदपुर से 126 कि...
एक आधुनिक संत – माधवराव काणे 05.10.2021 5:08
सर्दी, गर्मी और वर्षा हर मौसम में पैरों में हवाई चप्पल तन पर बेहद साधारण कुर्ता-धोती पहने तलासरी के बीहड़ वनवासी गांवों में लम्बी लम्बी दूरी पैदल चलकर वहां के बच्चों के लिए ज्ञान के दरवाजे खोलने वाले माधवराव जी काणे का जीवन 50 वर्षों के समपर्ण की वो कथा है, जो इस पीढी को पढ़ना भी चाहिए और पढाना भी। 15दिसम्बर 1927 को कल्याण के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे माधवराव काणे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के...
जीवन पटल पर मेहनत के कसीदे (राजस्थान, अनूपगढ़) 05.10.2021 7:52
मांग में सिंदूर, हाथों में मेहंदी और सुर्ख लाल जोड़े में सजी राखी,उषा व सीमा की खुशियां आज नए जीवन की अंगड़ाइयां ले रही थी। सेवा भारती अनूपगढ़ द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में दुल्हन बनी ये युवतियां कभी जिन गलियों में भीख मांगती,आज जब उन गलियों से उनकी डोली उठी तो इनके माता-पिता ही नहीं मोहल्ले वालों ने भी सेवाभारती के कार्यकर्ताओं को आशीर्वाद की झड़ियों में भिगो दिया। भीख मांगने वाले परिव...
सृजन के अंकुर 05.10.2021 8:28
वे जिनके स्वेदकणों से धरती पर सुनहरी फसलें लहलहाती हैं जो अपने प्रेम सेवा व समर्पण से धरती को सींचते हैं, कोरोनाकाल में उनकी व्यथा को हम सभी भूल गए। विडंबना तो यह है कि अन्नदाता की झोली से ही बरकत सूख गई। खडी फसलें बाजारों तक नहीं पहुंच सकीं। रांची व उसके आसपास के गांवों में जमीन को जैविक खाद से पोषित कर,करीब 3 वर्ष इंतजार के बाद बड़े जतन, धैर्य और प्यार को सींचते किसानों को ऑर्गेनिक अनाज, फल, सब्...
आस्था के पुष्प 05.10.2021 5:51
चमचमाती रेत के टीले कितने खूबसूरत दिखाई देते हैं, पर यही विशालकाय टीले पानी के बहाव से बहकर यदि घरों में घुस जाएं तो पल भर में सब कुछ तहस-नहस हो जाता है। 14 अगस्त 2020 की सुबह 10 बजे जयपुर की कच्ची बस्ती गणेशपुरी में बारिश ने तबाही की ऐसी कहानी लिखी कि तिनका-तिनका कर बनाए घरौंदे चंद ही मिनटों में टनों मिट्टी के नीचे दब गए। स्थिति ऐसी बनी कि क्या कपड़े,क्या बर्तन,क्या चूल्हा,स्कूल के बस्ते यहां तक...
आशाओं का सृजन 05.10.2021 7:18
5 साल के राजू को भूख लगी, तो मां ने एक चम्मच आटे को पानी में घोलकर पिला दिया। वहीं पास रहने वाले रामू का परिवार दो दिन से रोटी के 5 टुकड़े कर जैसे-तैसे अपना पेट भर रहा था। 6 महीने के बच्चे की मां ने पिछले दो दिन से कुछ नहीं खाया था, अब तो तन से दूध भी सूख गया था। यह कल्पना नहीं,राजधानी दिल्ली में यमुना खादर के उस हिस्से की हकीकत है,जहां आज भी लोग बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं से दूर, शह...
सेवा को समर्पित "भारतीय नारी" 05.10.2021 9:30
बेतरतीब पड़े, एक छोटे से कमरे में टी बी जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा 11 बरस का बालक सोनू, अपनी 6वर्षीय बहन खुशबू के साथ कहीं से मांगकर लाई दाल को आज भी पानी से छौंकने की तैयारी कर रहा था । तभी रीना दीदी किशोरी विकास केंद्र की लडकियों के साथ राशन किट लेकर उसके पास पहुंची, तो सोनू की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। ये तो सिर्फ़ शुरुआत थी, आगरा की बस्ती में रहने वाले इन अनाथ भाई बहनों की देखरेख के साथ ही, पढ...
चले निरंतर साधना 05.10.2021 6:52
डेढ़ वर्ष की गीता व 6 माह के आयुष लोहार के सर से मां का साया तो चार माह पहले ही उठ गया था। लॉकडाऊन ने रिक्शा चालक पिता की कमाई का जरिया भी छीन लिया। रांची के पाहनकोचा में रोज कमा कर खाने वाला यह परिवार दो वक्त की रोटी के लिए भी जगह- जगह बंटने वाले कढी-चावल व खिचड़ी पर आश्रित हो गया। बूढ़ी नानी जूलिया मिंज दुधमुंहे आयुष को दूध की जगह पडोस के परिवार से चावल का माढ़ मांग कर उसमें चीनी घोलकर पिलाने को...
तेरा वैभव अमर रहे मां 05.10.2021 6:35
रामरति की आंखों से अश्रु कृतज्ञता बनकर बरस रहे थे। पिछले 3 दिनों से खाली चावल उबालकर बच्चों व पति को खिलाने के बाद अक्सर वह खुद भूखे ही सो जाती थी। मजबूरी में पास लगे पेड़ से सहजन तोड़कर बेचने से होने वाली आमदनी से भला तीन बच्चों और सास ससुर का पेट कैसे भरता। लॉकडाउन ने पति के रोजगार के साथ ही घर का दाना पानी भी छीन लिया था। भोपाल में गोविन्दपुरा सेक्टर-सी के नजदीक एक कच्चे मकान में रह ने वाले इस प...
एक अनूठी तपस्या : दिव्य प्रेम सेवा मिशन- हरिद्वार 05.10.2021 6:13
हरिद्वार के चंडी घाट पर गंगा स्नान करने आए लाखों श्रद्धालुओं में एक युवक ऐसा भी था जिसने अलकनंदा की आंखों में आंसू देखे, मां गंगा की ये पीड़ा उसके घाट पर भीख मांग कर जीवन गुजारा करने वाले कुष्ठ रोगियों के लिए थी। टेढ़ा - मेढा शरीर,घावों से गिरता मवाद व उस पर भिनभिनाती मक्खियां, जीते जी नरक भोग रहे इन अभिशप्त रोगियों की पीड़ा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इस युवा प्रचारक से देखी नहीं गई। अक्टूबर1996 को...
गौमुखी सेवा धाम ने 40 गाँवो को दिखाई विकास की राह (छत्तीसगढ़) 05.10.2021 6:18
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से 60 किलोमीटर की दूरी पर बसा है छोटा सा गांव देवपहरी। आज से अट्ठारह बरस पहले देवपहरी पहुंचना हिमालय चढ़ने जैसा कठिन था। गांव तक पहुंचने के लिए ट्रैकिंग कर तीन-तीन घाटियां पार करनी पड़ती थीं, कभी-कभी इसमें दो दिन भी लग जाते थे। देवपहरी ही नहीं लेमरू,डीडासराय, जताडाड समेत कोरबा जिले के इन चालीस गांवो तक पहुंचने के लिए ना कोई सड़क थी ना ही सरकारी वाहन। पढ़ने के लिए स्कूल नहीं था...
हीरे को मिला जौहरी 05.10.2021 5:46
वो कक्षा के बैक बेंचर्स, जिन्हें ब्लैकबोर्ड पर लिखे अक्षर समझ नहीं आते थे। गणित जिन्हें अंधेरी काली सुरंग सा लगता था अंग्रेजी तो सर के ऊपर से ही गुजर जाती थी। पढ़ाई में कुछ नहीं कर पाने के कारण नाकारा मान लिए गए इन छात्रों में छिपे हुनर को तराशकर उनके लिए संभावनाओं के द्वार खोलता है कल्पतरू। झारखंड की राजधानी रांची से 35 किलोमीटर दूर बसी हेचल पंचायत मे एक हैक्टर में फैले इस ट्रेनिंग सेंटर ने इंटर...
मैं तुलसी तेरे आंगन की 05.10.2021 5:43
पहले शादी। फिर विवाह का एक रुपहले सपने का एक दुःस्वप्न में बदल जाना व फिर तलाक की मर्मांतक पीड़ा। ….और फिर दोबारा किसी पुरुष पर भरोसा कर पुनः विवाह सूत्र में बंधना। जीवन के यह उतार-चढ़ाव अच्छे-अच्छे जीवट वाली लड़की को भी तोड़ कर रख देते हैं और फिर सुनीता (बदला हुआ नाम) तो एक अनाथ थी। मगर इस कठिन परिस्थिति से गुज़रने के बावजूद वह टूटी नहीं, तो सिर्फ इसलिये कि उसका अनूठा परिवार हर कदम पर उसके साथ मज़बूती...
अंधकार में डूबे लोंगो को थमाई रोशनी की मशाल (उड़ीसा) 05.10.2021 5:18
फैनी का इटालियन भाषा में अर्थ होता है मुक्त! 200 कि.मी प्रतिघंटे से भी अधिक गति की इन बेलगाम हवाओं ने उडीसा में जो कहर बरपाया है वो हम सब की कल्पना से भी परे है। कटक, भुवनेश्वर, खुर्दा, पुरी समेत, पांच जिलों के अधिकांश कस्बे अंधेरे में डूब गए है। एक लाख 56 हजार बिजली के पोल उखड़ गए हैं, डेढ़ करोड़ से अधिक नारियल के पेड़ इन तेज हवाओं से तहस-नहस हो गए हैं। गांव के गरीब किसानो के पास न खेती बची न घर।...
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