Radio Azad

RADIO AZAD HIND 90.8 FM

A community radio station (CRS) License No. FMCR117, governed by Swaraj Sansthan Sanchalnalaya, Bhopal, A cultural wing of Govt. of M.P. currently producing programmes in Hindi language in different genre.

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Jul 9, 2026

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Episodes

विशेष कार्यक्रम - स्वामी विवेकानन्द 04.07.2023

स्वामी विवेकानन्द वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे। उनका वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो में सन् 1893 में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था। भारत का आध्यात्मिकता से परिपूर्ण वेदान्त दर्शन अमेरिका और यूरोप के हर एक देश में स्वामी विवेकानन्द की वक्तृता के कारण ही पहुँचा। उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना...

शौर्य गाथा - कैप्टन मनोज कुमार पांडेय 03.07.2023

कैप्टन मनोज कुमार पांडेय भारतीय सेना के अधिकारी थे जिन्हें सन १९९९ के कारगिल युद्ध में असाधारण वीरता के लिए मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च वीरता पदक परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

वतन का राग - सिराजुद्दौला 02.07.2023

वतन का राग - सिराजुद्दौला

आज़ाद हिन्द- असित भट्टाचार्य 02.07.2023

असित भट्टाचार्य  भारत के महान क्रांतिकारियों में से एक थे। असित प्रारंभ से ही क्रांतिकारी गतिविधियों से जुड़े हुए थे और क्रांति दल के सदस्य थे। 31 मार्च, 1933 को हबीबगंज में एक डकैती हुई, जिसमें असित भट्टाचार्य ने महत्वपूर्ण रूप से भाग लिया।

सीप के मोती - भाग - 01 - अवचेतन मान की शक्ति. 02.07.2023

रेडियो कार्यक्रम "सीप के मोती" मैं प्रो. ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव अध्यक्ष, इतिहास विभाग, अध्यक्ष, जीवनपर्यंत शिक्षा विभाग, डॉ हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर (म.प्र.) एवं मोटीवेशनल स्पीकर से चर्चा |

वतन का राग - बिधान चंद्र राय 01.07.2023

डॉ॰ बिधान चंद्र राय  चिकित्सक तथा स्वतंत्रता सेनानी थे। बिधान रॉय को आधुनिक पश्चिम बंगाल का निर्माता माना जाता है।[1] उनके जन्मदिन १ जुलाई को भारत मे 'चिकित्सक दिवस' के रूप मे मनाया जाता है। उन्हे वर्ष १९६१ में भारत रत्न से सम्मनित किया गया।

आज़ाद हिन्द - पुरुषोत्तम दास टंडन 01.07.2023

भारतरत्न राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन भारत के स्वतन्त्रता सेनानी एवं राजनेता थे। वे भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के अग्रणी पंक्ति के नेता तो थे ही, समर्पित राजनयिक, हिन्दी के अनन्य सेवक, कर्मठ पत्रकार, तेजस्वी वक्ता और समाज सुधारक भी थे। हिंदी को भारत की राजभाषा के पद पर प्रतिष्ठित करवाने में उनका महत्त्वपूर्ण योगदान था।

वतन का राग - दादाभाई नौरोजी 30.06.2023

दादाभाई नौरोजी ब्रिटिशकालीन भारत के एक पारसी बुद्धिजीवी, शिक्षाशास्त्री, कपास के व्यापारी तथा आरम्भिक राजनैतिक एवं सामाजिक नेता थे। उन्हें 'भारत का वयोवृद्ध पुरुष' कहा जाता है। १८९२ से १८९५ तक वे युनाइटेड किंगडम के हाउस आव कॉमन्स के सदस्य ( एम पी) थे।

वतन का राग - राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी 29.06.2023

राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी,  भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण स्वतंत्रता सेनानी थे। युवा क्रान्तिकारी लाहिड़ी की प्रसिद्धि काकोरी काण्ड के एक प्रमुख अभियुक्त के रूप में हैं।

याद करो कुर्बानी -शिव प्रसाद गुप्त 28.06.2023

बाबू शिव प्रसाद गुप्त   भारत के सेनानी, परोपकारी, राष्ट्रवादी कार्यकर्ता तथा महान द्रष्टा थे। उन्होने काशी विद्यापीठ की स्थापना की। शिव प्रसाद ने 'आज' नाम से एक राष्ट्रवादी दैनिक पत्र निकाला। उन्होंने बनारस में 'भारत माता मन्दिर' का भी निर्माण करवाया।

वतन का राग - मान कुमार बसु ठाकुर 28.06.2023

वतन का राग - मान कुमार बसु ठाकुर

वतन का राग - बंकिमचंद्र चटर्जी 27.06.2023

बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय बांग्ला भाषा के प्रख्यात उपन्यासकार, कवि, गद्यकार और पत्रकार थे। भारत का राष्ट्रगीत 'वन्दे मातरम्' उनकी ही रचना है जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के काल में क्रान्तिकारियों का प्रेरणास्रोत बन गया था। रबीन्द्रनाथ ठाकुर के पूर्ववर्ती बांग्ला साहित्यकारों में उनका अन्यतम स्थान है।

वतन का राग - चाफेकर बन्धु 25.06.2023

दामोदर हरि चापेकर, बालकृष्ण हरि चापेकर तथा वासुदेव हरि चापेकर सगे भाई थे जिन्होने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना बलिदान दिया। तीनों भाइयों को संयुक्त रूप से चापेकर बन्धु कहा जाता है। दामोदर हरि चाफेकर ने २२ जून १८९७ को रैंड को और उसके सहायक लेफ्टिनेंट आयस्टर को गोली मारकर हत्या कर दी।

वतन का राग-रानी दुर्गावती 24.06.2023

रानी दुर्गावती चन्देल गढ़ा साम्राज्य की शासक महारानी थीं। वो भारत की एक प्रसिद्ध चन्देल क्षत्राणी वीरांगना थीं, जिनका जन्म दुर्गाष्टमी के दिन 5 अक्टूबर 1524 इस्वी को कालिंजर के राजा कीर्तिवर्मन चन्देल (द्वितीय) के यहाँ हुआ था।

वतन का राग -डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी 23.06.2023

डॉ॰ श्यामाप्रसाद मुखर्जी  शिक्षाविद्, चिन्तक और भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे।

याद करो कुर्बानी -बब्बर हरि सिंह सूंध 23.06.2023

ग़दर और बब्बर अकाली आंदोलन के शेरदिल देशभक्त हरि सिंह का जन्म 1887 में शहीद भगत सिंह नगर में बंगा तहसील से लगभग सत्ताईस किलोमीटर दूर सूंध गांव में हुआ था। उनके पिता शेर सिंह बोएल थे और उनकी माता का नाम रल्ली था। 1908 में, वह, कई अन्य पंजाबियों की तरह, बेहतर अवसरों की तलाश में कनाडा चले गए। हरि सिंह ने कनाडा में एक अलग सामाजिक और राजनीतिक माहौल देखा। भारतीयों को ब्रिटिश नागरिक के बजाय ब्रिटिश प्रजा...

वतन का राग - सेठ अमरचंद बांठिया 22.06.2023

सेठ अमरचंद बांठिया जैन भारत की स्वतंत्रता के प्रथम संग्राम के एक नायक थे। जब 1858 की भीषण गर्मी में लू के थपेड़ों के बीच, झांसी की वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई तथा उनके योग्य सेना नायक राव साहब और तात्या टोपे आदि सब, अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध करने के लिए ग्वालियर के मैदान-ए-जंग में आ डटे थे।

विश्व संगीत दिवस - स्वर आलोक 21.06.2023

विश्व संगीत दिवस - स्वर आलोक

वतन का राग -विश्व योग दिवस 21.06.2023

वतन का राग -विश्व योग दिवस

विश्व योग दिवस - जीवन के लिए महात्वपूर्ण योग 21.06.2023

विश्व योग दिवस - जीवन के लिए महात्वपूर्ण योग

हिंदुस्तान हमारा-केशव बलिराम हेडगेवार 21.06.2023

हिंदुस्तान हमारा-केशव बलिराम हेडगेवार

वतन का राग - रानी लक्ष्मी बाई 18.06.2023

रानी लक्ष्मीबाई, झाँसी की रानी (उच्चारण (सहायता · जानकारी); 19 नवंबर 1828 - 18 जून 1858), [1] [2] महाराजा गंगाधर राव से विवाह करके 1843 से 1853 तक झांसी की रियासत की महारानी पत्नी थीं। नेवलकर। वह 1857 के भारतीय विद्रोह में प्रमुख शख्सियतों में से एक थीं, जो एक राष्ट्रीय नायक बन गईं और भारतीय राष्ट्रवादियों के लिए भारत में ब्रिटिश शासन के प्रतिरोध का प्रतीक बन गईं। बनारस में एक मराठी करहाडे ब्राह्म...

-याद करो कुर्बानी- वान्चीनाथन अय्यर 17.06.2023

17 जून 1911 को, वांची, जो 25 वर्ष का था, ने तिरुनेलवेली के जिला कलेक्टर रॉबर्ट ऐश की हत्या कर दी, जिन्हें कलेक्टर दोराई के नाम से भी जाना जाता था। जब ऐश की ट्रेन मद्रास जाने के रास्ते में मनियाची स्टेशन पर रुकी थी, तब उसने ऐश को बेहद करीब से गोली मारी थी। उसके बाद उसने आत्महत्या कर ली थी। तब से रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर वांची मनियाची कर दिया गया है। हत्या के पीछे का मास्टरमाइंड नीलकांत ब्रह्मचारी...

वतन का राग-ज्योतिप्रसाद आगरवाला 17.06.2023

ज्योतिप्रसाद का जन्म 17 जून 1903 को डिब्रुगढ़ जिले में स्थित तामुलबारी चायबागान में हुआ। बहुमुखी प्रतिभा के धनी ज्योतिप्रसाद अगरवाल न सिर्फ एक नाटककार, कथाकार, गीतकार, पत्र संपादक, संगीतकार तथा गायक सभी कुछ थे। मात्र 14 वर्ष की उम्र में ही 'शोणित कुंवरी' नाटक की रचना कर आपने असमिया साहित्य को समृ्द्ध कर दिया।

वतन का राग-नलिनीकांत बागची 16.06.2023

22 साल की छोटी उम्र में शहीद हुए नलिनीकांत बागची का जन्म मुर्शिदाबाद के कंचनतला गांव में हुआ था, जहां उनके पिता पहले नादिया से आकर बसे थे। बेरहामपुर के कृष्णा कॉलेज के छात्र के रूप में, वह क्रांतिकारी समूह में शामिल हो गए। पुलिस उत्पीड़न से बचने के लिए, वह बांकीपुर, बिहार में एक संक्षिप्त कार्यकाल के बाद भागलपुर कॉलेज चले गए। आईए पास करने के बाद परीक्षा में, वह भूमिगत हो गया और दानापुर छावनी के सै...

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