Umesh Pratap Singh
Main Aur Tum
कुछ अनकहे से ख्याल
Author
Umesh Pratap Singh
Category
Podcast website
Latest episode
Nov 22, 2023
Where to listen?
Podcasts in the app Replaio Radio Coming soonPodcasts are coming to the app soon. Install now and be the first to see a whole new take on podcasts
Episodes
एक मेरी आखें जिसमें तेरे ख्वाब ठहरे 27.10.2022 3:43
एक मेरी आखें जिसमें तेरे ख्वाब ठहरे
सुना है उसने बेटे का नाम 'उमेश' रखा है 25.10.2022 2:52
सुना है उसने बेटे का नाम 'उमेश' रखा है
ये दरवाजे खुले क्यों रखे है ‘उमेश‘ 09.10.2022 2:52
ये दरवाजे खुले क्यों रखे है ‘उमेश‘
क्या मैं तुम्हें याद हूं? बोलो ना। 29.09.2022 3:25
क्या मैं तुम्हें याद हूं? बोलो ना।
वो जहां छोड़ गया था मुझे वहीं खड़ा हूं मैं 28.09.2022 3:10
वो जहां छोड़ गया था मुझे वहीं खड़ा हूं मैं
तब तुम याद आए 24.09.2022 3:21
तब तुम याद आए
दिया जलाया है और हवा चल रही है 22.09.2022 3:42
दिया जलाया है और हवा चल रही है
एक जमाने बाद हमने कुछ अच्छा सोचा 07.09.2022 2:56
एक जमाने बाद हमने कुछ अच्छा सोचा
ये खयाल अच्छा लगा, तो सोच लिया 03.09.2022 3:22
ये खयाल अच्छा लगा, तो सोच लिया
ना जाने क्या आलम होगा तुम्हारे कमरे का 22.08.2022 3:43
ना जाने क्या आलम होगा तुम्हारे कमरे का
जो तुमने छू लिया, बहक जाएंगे हम 29.07.2022 4:15
जो तुमने छू लिया, बहक जाएंगे हम
क्या पता कौन गया, कौन दिल में आया है. 27.07.2022 3:40
क्या पता कौन गया, कौन दिल में आया है.
अभी उसकी आखों में रहते हैं, कल उसके दिल में मिलेंगे। 23.07.2022 3:56
अभी उसकी आखों में रहते हैं, कल उसके दिल में मिलेंगे।
मेरी तरह तुम्हारे लिए फूलों के बगीचे लगाता है क्या वो कोई? 13.07.2022 3:16
मेरी तरह तुम्हारे लिए फूलों के बगीचे लगाता है क्या वो कोई?
मैं रुक गया हूं, वक्त चल रहा है 04.07.2022 2:27
मैं रुक गया हूं, वक्त चल रहा है
कमरे से पुरानी तस्वीर हटाई जाए 02.07.2022 2:48
कमरे से पुरानी तस्वीर हटाई जाए
नई नई मोहब्बत है, तुम्हें तो मेरी बाहों में होना चहिए 29.06.2022 3:07
नई नई मोहब्बत है, तुम्हें तो मेरी बाहों में होना चहिए
हर रोज मैं तेरे शहर की तरफ कबूतर उड़ाता हूं। 02.06.2022 3:21
हर रोज मैं तेरे शहर की तरफ कबूतर उड़ाता हूं।
उस बूंद से चलो हम मोतियां बनाते हैं। 22.05.2022 2:52
उस बूंद से चलो हम मोतियां बनाते हैं।
उनका किस्सा भी अपने किस्से जैसा है. 25.04.2022 3:11
उनका किस्सा भी अपने किस्से जैसा है.
मैं हिज़्र की रात में उसकी याद चाहता हूं 18.04.2022 2:30
मैं हिज़्र की रात में उसकी याद चाहता हूं
अब एक जिस्म को कई बदन संवारते देखा है. 10.04.2022 2:28
अब एक जिस्म को कई बदन संवारते देखा है.
तुम सच में आए हो या दिवाली आयी है 28.03.2022 4:01
तुम सच में आए हो या दिवाली आयी है
ये गुलाब फिर क्यों लिए जा रहे हैं हम 23.03.2022 3:40
ये गुलाब फिर क्यों लिए जा रहे हैं हम
लिख ना पाए तुम्हारा नाम कागज पे हम 10.03.2022 3:23
लिख ना पाए तुम्हारा नाम कागज पे हम
Similar podcasts
Replaio is not a podcast publisher; show names, artwork and audio belong to their authors and are distributed through public RSS feeds.