Umesh Pratap Singh

Main Aur Tum

Society HI ↓ 111 episodes

कुछ अनकहे से ख्याल

Author

Umesh Pratap Singh

Category

Society

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Latest episode

Nov 22, 2023

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Episodes

एक मेरी आखें जिसमें तेरे ख्वाब ठहरे 27.10.2022

एक मेरी आखें जिसमें तेरे ख्वाब ठहरे

सुना है उसने बेटे का नाम 'उमेश' रखा है 25.10.2022

सुना है उसने बेटे का नाम 'उमेश' रखा है

ये दरवाजे खुले क्यों रखे है ‘उमेश‘ 09.10.2022

ये दरवाजे खुले क्यों रखे है ‘उमेश‘

क्या मैं तुम्हें याद हूं? बोलो ना। 29.09.2022

क्या मैं तुम्हें याद हूं? बोलो ना।

वो जहां छोड़ गया था मुझे वहीं खड़ा हूं मैं 28.09.2022

वो जहां छोड़ गया था मुझे वहीं खड़ा हूं मैं

तब तुम याद आए 24.09.2022

तब तुम याद आए

दिया जलाया है और हवा चल रही है 22.09.2022

दिया जलाया है और हवा चल रही है

एक जमाने बाद हमने कुछ अच्छा सोचा 07.09.2022

एक जमाने बाद हमने कुछ अच्छा सोचा

ये खयाल अच्छा लगा, तो सोच लिया 03.09.2022

ये खयाल अच्छा लगा, तो सोच लिया

ना जाने क्या आलम होगा तुम्हारे कमरे का 22.08.2022

ना जाने क्या आलम होगा तुम्हारे कमरे का

जो तुमने छू लिया, बहक जाएंगे हम 29.07.2022

जो तुमने छू लिया, बहक जाएंगे हम

क्या पता कौन गया, कौन दिल में आया है. 27.07.2022

क्या पता कौन गया, कौन दिल में आया है.

अभी उसकी आखों में रहते हैं, कल उसके दिल में मिलेंगे। 23.07.2022

अभी उसकी आखों में रहते हैं, कल उसके दिल में मिलेंगे।

मेरी तरह तुम्हारे लिए फूलों के बगीचे लगाता है क्या वो कोई? 13.07.2022

मेरी तरह तुम्हारे लिए फूलों के बगीचे लगाता है क्या वो कोई?

मैं रुक गया हूं, वक्त चल रहा है 04.07.2022

मैं रुक गया हूं, वक्त चल रहा है

कमरे से पुरानी तस्वीर हटाई जाए 02.07.2022

कमरे से पुरानी तस्वीर हटाई जाए

नई नई मोहब्बत है, तुम्हें तो मेरी बाहों में होना चहिए 29.06.2022

नई नई मोहब्बत है, तुम्हें तो मेरी बाहों में होना चहिए

हर रोज मैं तेरे शहर की तरफ कबूतर उड़ाता हूं। 02.06.2022

हर रोज मैं तेरे शहर की तरफ कबूतर उड़ाता हूं।

उस बूंद से चलो हम मोतियां बनाते हैं। 22.05.2022

उस बूंद से चलो हम मोतियां बनाते हैं।

उनका किस्सा भी अपने किस्से जैसा है. 25.04.2022

उनका किस्सा भी अपने किस्से जैसा है.

मैं हिज़्र की रात में उसकी याद चाहता हूं 18.04.2022

मैं हिज़्र की रात में उसकी याद चाहता हूं

अब एक जिस्म को कई बदन संवारते देखा है. 10.04.2022

अब एक जिस्म को कई बदन संवारते देखा है.

तुम सच में आए हो या दिवाली आयी है 28.03.2022

तुम सच में आए हो या दिवाली आयी है

ये गुलाब फिर क्यों लिए जा रहे हैं हम 23.03.2022

ये गुलाब फिर क्यों लिए जा रहे हैं हम

लिख ना पाए तुम्हारा नाम कागज पे हम 10.03.2022

लिख ना पाए तुम्हारा नाम कागज पे हम

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