कीर्ति बल्लभ जोशी

DEVINE VERSES (दिव्य श्लोक)

Religion HI ↓ 70 episodes

"दिव्य श्लोक" एक आध्यात्मिक पॉडकास्ट है जो वाल्मीकि रामायण और अन्य पवित्र हिंदू ग्रंथों की कालातीत कहानियों और शिक्षाओं को साझा करने के लिए समर्पित है। इस श्रृंखला में, हम प्राचीन ग्रंथों की गहरी और अद्भुत कथाओं को प्रस्तुत करेंगे, उनकी ज्ञानवर्धक शिक्षाओं को समझेंगे और आज के जीवन में उनकी प्रासंगिकता को खोजेंगे।हर एपिसोड में श्रोताओं को भगवान राम, सीता, और अन्य प्रमुख पात्रों की अद्भुत कहानियों की यात्रा पर ले जाया जाएगा, जैसा कि वाल्मीकि रामायण में वर्णित है। साथ ही, पॉडकास्ट में अन्य पवित्र ग्रंथों से प्रेरक चर्चाएँ और कथाएँ भी प्रस्तुत की जाएंगी, जो आध्यात्मिक ज्ञान और प्रेरणा का खजाना है

Author

कीर्ति बल्लभ जोशी

Category

Religion

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Nov 8, 2025

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Episodes

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड चतुर्दश:सर्ग 25.01.2025

बालकाण्ड के 14वें सर्ग में महर्षि वाल्मीकि ने राजा दशरथ के अश्वमेध यज्ञ के संपन्न होने का वर्णन किया है। इस सर्ग में राजा दशरथ अपने वंश को आगे बढ़ाने और राज्य की उन्नति के लिए यज्ञ करते हैं। मुख्य घटनाएँ इस प्रकार हैं: 1. अश्वमेध यज्ञ का प्रारंभ और आयोजन: • राजा दशरथ ऋषियों और विद्वानों की सहायता से यज्ञ की प्रक्रिया शुरू करते हैं। • यज्ञ के लिए विशेष प्रकार के घोड़े का चयन किया जाता है, जिसे अनुष...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड द्वादश:सर्ग 23.01.2025

वाल्मीकि रामायण के बाल काण्ड के द्वादश सर्ग में राजा दशरथ और उनके मंत्रियों के साथ चर्चा का वर्णन है। इस सर्ग में राजा दशरथ अपनी चिंता व्यक्त करते हैं कि उनके कोई पुत्र नहीं है, और यह उनके वंश की परंपरा को आगे बढ़ाने में बाधा उत्पन्न करेगा। राज्य के मंत्री और ऋषि उनकी इस समस्या को सुनते हैं और समाधान के रूप में एक यज्ञ कराने का सुझाव देते हैं।

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड त्रयोदश:सर्ग 23.01.2025

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के त्रयोदश सर्ग में राजा दशरथ अपने कुलगुरु वशिष्ठ से पुत्र प्राप्ति के उद्देश्य से यज्ञ करने की तैयारी के लिए निवेदन करते हैं। यह सर्ग पुत्रेष्टि यज्ञ की शुरुआत और उसकी योजना के लिए महत्वपूर्ण है। त्रयोदश सर्ग में राजा दशरथ की भक्ति, उनकी गुरु के प्रति श्रद्धा, और धर्म के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाया गया है। यज्ञ के लिए ऋषियों और गुरुओं की भूमिका इस सर्ग में स्पष्ट होती...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड एकादश:सर्ग 22.01.2025

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के एकादश सर्ग में राजा दशरथ का ऋष्यशृंग को अयोध्या लेकर आने का विस्तृत वर्णन मिलता है। इसमें बताया गया है कि राजा दशरथ ने संतान प्राप्ति के लिए अश्वमेध यज्ञ संपन्न कराने का निश्चय किया और इस कार्य हेतु ऋष्यशृंग मुनि को आमंत्रित करने का प्रबंध किया। ऋष्यशृंग का आमंत्रण सुमंत्र के सुझाव पर राजा दशरथ ने अंगदेश के राजा रोमपाद से संपर्क साधा। रोमपाद और दशरथ मित्र थे, और दशरथ...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड दशम: सर्ग 22.01.2025

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के दशम सर्ग में सुमंत्र ने राजा दशरथ को ऋष्यशृंग ऋषि के बारे में विस्तारपूर्वक वर्णन किया है। यह वर्णन उस समय हुआ जब राजा दशरथ अपने राज्य में संतान प्राप्ति के लिए अश्वमेध यज्ञ करने का विचार कर रहे थे और योग्य ऋषि की तलाश कर रहे थे, जो यज्ञ को सफलतापूर्वक संपन्न कर सके। सुमंत्र ने राजा दशरथ को बताया कि अंगदेश के राजा रोमपाद ने अपने राज्य में वर्षा न होने के कारण ऋष्यशृं...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड नवमः सर्ग 21.01.2025

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के नवम सर्ग में सुमंत, जो राजा दशरथ के मंत्रियों में से एक हैं, राजा को ऋष्यश्रंग के विषय में बताते हैं। इस सर्ग में उस समय की चर्चा होती है जब राजा दशरथ अपनी संतान प्राप्ति के लिए यज्ञ करने की इच्छा प्रकट करते हैं। सुमंत राजा को सुझाव देते हैं कि ऋष्यश्रंग, जो एक महान तपस्वी और ब्रह्मज्ञानी हैं, इस कार्य के लिए सर्वथा उपयुक्त हैं। ऋष्यश्रंग महर्षि विभाण्डक के पुत्र हैं...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड अष्टम:सर्ग 20.01.2025

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के सप्तम सर्ग में राजा दशरथ की पुत्र प्राप्ति की अभिलाषा का वर्णन किया गया है। इस सर्ग में बताया गया है कि राजा दशरथ ने एक उचित और धार्मिक उपाय के रूप में अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया। इसका उद्देश्य संतान प्राप्ति और राज्य की समृद्धि सुनिश्चित करना था। पुत्र प्राप्ति की इच्छा: राजा दशरथ के तीन रानियां—कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा—थीं, लेकिन उन्हें कोई संतान नहीं थी। दशरथ इ...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सप्तम:सर्ग 20.01.2025

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के सप्तम सर्ग में राजमंत्रियों के गुणों का वर्णन किया गया है। इसमें राजा दशरथ के मंत्रियों के गुणों और उनकी योग्यता का उल्लेख किया गया है। इन मंत्रियों को प्रशासन और नीतियों के संचालन में अत्यधिक कुशल बताया गया है। सर्ग में इन गुणों को निम्न प्रकार से वर्णित किया गया है: धर्मनिष्ठा: मंत्रियों का चरित्र उच्च और पवित्र था। वे धर्म के प्रति समर्पित और नीतियों में निष्पक्ष...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड षष्ठ:सर्ग 19.01.2025

बालकाण्ड के षष्ठ सर्ग में गोस्वामी तुलसीदास जी ने अयोध्या नगरी का अत्यंत सुंदर और मनोहारी वर्णन किया है। यह वर्णन इस बात को उजागर करता है कि अयोध्या न केवल भौतिक रूप से समृद्ध थी, बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी दिव्यता का प्रतीक थी। इस सर्ग में तुलसीदास जी ने अयोध्या को एक आदर्श नगरी के रूप में चित्रित किया है। नगरी की दिव्यता: अयोध्या नगरी इतनी भव्य और दिव्य है कि इसे देखकर देवता भी...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड पंचम: सर्ग 19.01.2025

बालकाण्ड के पंचम सर्ग में महाकवि तुलसीदास ने अयोध्या नगरी का अद्भुत और मनोहारी वर्णन किया है। यह वर्णन न केवल रामायण के कथानक को बल देता है, बल्कि उस समय की सामाजिक और सांस्कृतिक समृद्धि को भी उजागर करता है। स्वर्ग की उपमा: तुलसीदासजी ने अयोध्या को स्वर्ग के समान बताया है। वे कहते हैं कि अयोध्या नगरी इतनी दिव्य और सुंदर है कि स्वर्ग के देवता भी इसे देखकर मोहित हो जाते हैं। यह नगरी भगवत्कृपा और धर्...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड चतुर्थ:सर्ग 14.01.2025

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के चतुर्थ सर्ग में यह प्रसंग वर्णित है कि कैसे महर्षि वाल्मीकि ने लव और कुश को रामायण की कथा सुनाने के लिए तैयार किया। इस सर्ग में वाल्मीकि के आश्रम, लव-कुश का पालन-पोषण, और उनके कौशल का वर्णन है। यह भाग कथा की मौलिक शुरुआत को दर्शाता है, जो आगे भगवान राम के जीवन की दिव्यता और प्रेरणा को जनमानस तक पहुँचाने का माध्यम बनता है। वाल्मीकि का आश्रम जब सीता माता को भगवान राम क...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड तृतीय: सर्ग 14.01.2025

बाल काण्ड के तृतीय सर्ग में महर्षि वाल्मीकि द्वारा भगवान श्रीराम की अद्भुत कथा का प्रारंभिक विवरण मिलता है। यह सर्ग वाल्मीकि रामायण के आरंभिक और महत्वपूर्ण अंशों में से एक है। इसमें मुख्य रूप से श्रीराम के अवतार का उद्देश्य, महाराज दशरथ की पुत्रेष्टि यज्ञ के माध्यम से संतान प्राप्ति, और देवताओं द्वारा रावण वध के लिए श्रीराम के रूप में विष्णु के अवतार की कथा का वर्णन है। मुख्य घटनाएँ: 1. दशरथ की चि...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड द्वितीय:सर्ग 12.01.2025

बालकाण्ड के द्वितीय सर्ग में महर्षि वाल्मीकि ने भगवान राम की कथा का प्रारंभिक वर्णन किया है। इस सर्ग में प्रमुखतः निम्न घटनाओं और प्रसंगों का उल्लेख होता है: 1. नारदजी का आगमन और प्रश्न: सर्ग की शुरुआत महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में नारद मुनि के आगमन से होती है। वाल्मीकि ऋषि नारद जी से एक ऐसे महापुरुष के बारे में पूछते हैं, जिसमें सत्य, धर्म, शील, बल, और करुणा जैसे सभी उत्तम गुण हों। 2. नारद द्वारा...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड प्रथम: सर्ग 11.01.2025

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड का प्रथम सर्ग (अर्थात पहला अध्याय) में भगवान श्रीराम के जन्म की कथा का प्रारंभ होता है। यह अध्याय विशेष रूप से श्रीराम के जन्म के कारण, उनके जन्म के समय का वातावरण, और उनकी माता-पिता के साथ संबंधों के बारे में बताता है। इसमें भगवान श्रीराम के जीवन के पहले चरण की आधारशिला रखी गई है। प्रथम सर्ग का सारांश: 1. दशरथ का नामकरण और राज्याभिषेक: • इस अध्याय की शुरुआत राजा दशरथ स...

वाल्मीकि रामायण अध्याय ५ 11.01.2025

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के पांचवे अध्याय में रामायण के श्रवण का फल और श्रवण के महत्व का वर्णन किया गया है। इस अध्याय में यह बताया गया है कि रामायण का श्रवण और पाठ करने से व्यक्ति को किस प्रकार के फल प्राप्त होते हैं और यह जीवन को कैसे धर्म, सत्य, और भक्ति की ओर प्रवृत्त करता है। साथ ही, इस अध्याय में भगवान श्रीराम के चरित्र का आदर्श और उनकी कृपा के प्रभाव का भी वर्णन है। अध्याय का सार: 1. रामा...

वाल्मीकि रामायण अध्याय ४ 11.01.2025

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के अध्याय 4 में चैत्र मास के महत्व, रामायण कथा के माहात्म्य और उतंक मुनि की कथा का वर्णन मिलता है। यह अध्याय रामायण के महत्व को स्पष्ट करता है और भगवान श्रीराम के चरित्र की दिव्यता को उजागर करता है। अध्याय का सारांश: 1. चैत्र मास का महत्व: • सनतकुमार ऋषि ने कहा कि चैत्र मास (वसंत ऋतु का समय) भगवान श्रीराम की कथा के लिए अत्यंत शुभ और पवित्र है। • इस मास में रामायण कथा का...

वाल्मीकि रामायण अध्याय ३ 11.01.2025

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड का तृतीय अध्याय (सर्ग 3) में देवर्षि नारद और महर्षि वाल्मीकि के बीच संवाद का विस्तार होता है। इस अध्याय में नारद मुनि भगवान श्रीराम के जीवन की प्रमुख घटनाओं का संक्षेप में वर्णन करते हैं। अध्याय का सार: 1. वाल्मीकि का प्रश्न: • महर्षि वाल्मीकि ने नारद मुनि से पूछा कि कौन ऐसा व्यक्ति है जो: • गुणों से सम्पन्न हो। • पराक्रमी, सत्यवादी, दृढ़प्रतिज्ञ, धर्मपरायण हो। • सब प्र...

वाल्मीकि रामायण अध्याय २ 11.01.2025

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के अध्याय 2 में नारद मुनि और सनत्कुमार के संवाद का वर्णन किया गया है। इस अध्याय में नारद मुनि ने सनत्कुमार से रामायण कथा के महत्व और भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र के विषय में सुना। इसके बाद नारद ने वाल्मीकि को श्रीराम की कथा सुनाई। अध्याय का सार: 1. सनत्कुमार का आगमन: • देवर्षि नारद तपस्या में लीन थे। उसी समय सनत्कुमार, जो ब्रह्माजी के चार मानस पुत्रों में से एक हैं, वह...

बाल्मीकि रामायण अध्याय १ 11.01.2025

वाल्मीकि रामायण के पहले अध्याय (बालकाण्ड, सर्ग 1) में वाल्मीकि ऋषि और नारद मुनि के संवाद का वर्णन है। इस अध्याय में महर्षि वाल्मीकि ने नारद से एक आदर्श पुरुष के बारे में पूछा, जो सभी गुणों से संपन्न हो। नारद ने भगवान श्रीराम के चरित्र और गुणों का वर्णन किया। अध्याय का मुख्य सारांश: 1. वाल्मीकि का प्रश्न: महर्षि वाल्मीकि ने नारद मुनि से पूछा: • ऐसा व्यक्ति कौन है, जो सत्यवादी, धर्मपरायण, वीर, पराक्...

संपूर्ण सुन्दरकाण्ड 11.01.2025

सुंदरकाण्ड गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस का पाँचवाँ अध्याय है, जिसे रामायण के सबसे पवित्र और प्रभावशाली हिस्सों में से एक माना जाता है। इसे "सुंदरकाण्ड" नाम इसलिए दिया गया क्योंकि इसमें भगवान हनुमान के अद्भुत पराक्रम, सुंदरता, और दिव्यता का वर्णन है। यह अध्याय न केवल हनुमानजी की महिमा को उजागर करता है, बल्कि यह भक्तों को साहस, भक्ति, और आत्मविश्वास का मार्गदर्शन भी प्रदान करता है। सुंद...

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