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Pravachans / Moral-Stories / Chantings / Bhajans - by Mahatmas of Vedanta Ashram, Indore
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17. mar 2024
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सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 53 06.10.2021 1:22:38
सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 53वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि जब रावण का दूत रामजी के गुणों का मन ही मन गाने से प्रभावित हुआ, तो उसका कपट से धारण किया हुआ रूप समाप्त हो गया और वो अपने वास्तविक रूप में आ गया - और पकड़ा गया। उसकी बहुत पिटाई हुई और सुग्रीव ने तो उसके नाक-कान काटने का निर्णय किया। उसके बहुत रोने-चिल्लाने और अंत में रामजी की दुहाई देने पर लक्ष्मणजी ने सुना तो...
सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 52 05.10.2021 1:14:07
सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 52वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि जब विभीषणजी ने रामजी को यह सलाह दी की सागर आपके कुलगुरु हैं इसलिए नीति यह कहती है की उनसे आदर के साथ मार्ग दिखने के लिए निवेदन करना चाहिए, तो रामजी को यह नीति अच्छी लगी और उन्होंने सागर को सर झुकाके प्रणाम किया और तट पर आराधना हेतु बैठ गए। इस विषय को निमित्त बनाकर पू स्वामीजी ने प्रारब्ध और पुरुषार्थ के विषय प...
सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 51 04.10.2021 1:22:07
सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 51वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि जब रामजी ने विभीषणजी आदि से पूछा की आप लोग सलाह दीजिये की समुद्र के उस पार कैसे जाएँ, तो विभीषणजी ने अपनी राय दी की निति तो यह कहती है की पहले प्रेम से निवेदन करना चाहिए और समुद्र तो आपके कुलगुरु हैं। तो रामजी ने कहा की हे मित्र, तुम्हारी राय अच्छी है। लेकिन लक्षणामजी को यह अच्छा नहीं लगा, वे बोले की केवल कमज़ो...
सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 50 03.10.2021 1:23:57
सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 50वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि जब रामजी ने विभीषणजी का राज-तिलक कर दिया तो गोस्वामीजी कहते हैं की ऐसे प्रभु को छोड़ कर और किस का भजन करा जाये, जो मात्र भक्ति और शरणागति के कारण अत्यंत विनम्रता से भक्तों को बिना मांगे सब कुछ दे देते हैं। ऐसे सर्व-समर्थ, सर्वज्ञ, सबके अंतर्यामी प्रभु अब सुग्रीव और विभीषणजी से पूंछते हैं - की आप अपनी राय...
सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 49 02.10.2021 1:20:08
सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 49वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि जब रामजी ने बताया की कौन भक्तजन हमको प्रिय होते हैं और कब हमारी कृपा उनको प्राप्त होती है, फिर आगे भगवान् कहते हैं की 'हे विभीषण, तुम्हारे अंदर तो वो सब गुण हैं, इसीलिए वे भगवान् को अत्यंत प्रिय हैं। वभीषणजी कहते हैं के हे प्रभु, आपके दर्शन से पहले हमारे मन में कुछ वासनाएं थीं लेकिन आपके दर्शन और आपके प्रेम रु...
सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 48 01.10.2021 1:33:39
सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 48वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि जब विभीषणजी ने भगवान् को बताया की भगवन कुशल तो तब हो होता है जब आपकी कृपा किसी निर्मल भक्त तो मिल जाती है। तब प्रभु श्री राम बोले की हमारी कृपा किसी को भी प्राप्त हो सकती है, बशर्ते वो अपने मन के विकारों को किनारे कर ह्रदय से हमारी शरण में आ जाये। अपने मन के अनेकानेक ममता के तार बटोर के एक रस्सी बनाये और उससे...
सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 47 30.09.2021 1:29:00
सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 47वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि जब प्रभु श्री राम ने विभीषणजी से उनका कुशल पूँछा तब वे बोले की 'भगवन, जब तक किसी के मन में अनेकों दुष्टों का वास है तब तक लोभ, मोह, आदि ह्रदय में बसते हैं और जब ईश्वर भक्ति रुपी सूर्य उगता है तभी ये सब विकार समाप्त हो जाते हैं और मन में ये सभी विकार भाग जाते हैं। हमें तो आप की कृपा से उन चरणों के दर्शन का सौभा...
सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 46 29.09.2021 1:27:09
सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 46वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब विभीषणजी रामजी के पास लाये गए, तब दूर से ही जब उन्होंने रामजी और लक्ष्मणजी को देखा तो वे स्तब्ध होकर एक क्षण उन्हें देखते ही रह गए। फिर संभल कर अपना परिचय दिया और दंडवत प्रणाम किया। रामजी ने उन्हें अपने हाथों से उठाया और अपने पास बैठाया और उन्हें लंकेश कहते हुए उनका कुशल पूछा। विभीष...
सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 45 28.09.2021 1:18:34
सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 45वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब रामजी ने विभीषण को लाने की लिए कहा तो सब अत्यंत प्रसन्न होकर उन्हें लाने के लिए गए और बहुत आदर के साथ लाये। विभीषणजी ने दूर से रामजी और लक्ष्मणजी को देखा, वे स्तब्ध होकर एक क्षण के लिए खड़े हो गए। उन्होंने जो देखा उसका बहुत ही सुन्दर और विशद वर्णन है। मन में हर्ष और प्रफुल्लता थी। वे...
सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 44 27.09.2021 1:18:10
सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 44वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब सुग्रीव ने दुश्मन के भाई के बारे में सचेत रहना चाहिए, तब रामजी ने अपने उस प्राण के बारे में बताया की वे शरणागत का सदैव रक्षा करते हैं। उन्होंने आगे बताया की अगर किसी ने करोड़ों ब्राह्मणों की हत्या भी क्यों न करी हो लेकिन जब वो हमारी शरण में आ जाए तब भी हम उसकी रक्षा करते हैं। उन्होंन...
सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 43 26.09.2021 1:27:54
सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 43वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब विभीषण मन ही मन प्रभु राम के चरणों का स्मरण करते-करते समुद्र के उस पार पहुँच गए। उन्हें आता देख वानर प्रहरियों ने दूर से ही किसी को आते देख लिया और इस पार उतरते ही उन्हें पकड़ लिया। उन्होंने सुग्रीव को समाचार दिया की ऐसा कोई दूत आया है। सुग्रीव ने अधिक जानकारी निकली और पता चला की वो...
सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 42 25.09.2021 1:20:58
सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 42वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब विभीषणजी को रावण ने प्रताड़ित और अपमानित करके लंका से निकल जाने को कहा तब वे आकाश मार्ग से ऊपर उठे और पुनः बोले के रामजी के शरण में जाओ, अन्यथा ये सभा काल के वश में हो गयी है। शिवजी कहते हैं की जहाँ पर एक साधु व्यक्ति की अवज्ञा होती है वहां सब प्रकार के कल्याण समाप्त हो जाते हैं। विभ...
सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 41 24.09.2021 1:30:14
सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 41वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब विभीषण ने रावण को सीताजी को वापस देने के लिए समझाया और वह बहुत क्रोधित हो गया और विभीषणजी और माल्यवान जी को निकल जाने को कहा। माल्यवानजी तो खुद ही उठ के चले गए, लेकिन विभीषणजी रावण के चरण पकड़ के पुनः निवेदन करने लगे। अंततः रावण ने विभीषण जी को लात मार के कहा की जिनका गुणगान गए रहे ह...
सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 40 23.09.2021 1:19:31
सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 40वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब विभीषण ने रावण को अपना विचार बताया तो वहां बैठे माल्यवान जी, जो की रावण के सबसे बुद्धिमान सचिव एवं उसके नानाजी भी थे वे बहुत प्रसन्न हुए और कहा की हे रावण, आपका अनुज निश्चित रूप से नीति-विभूषण कहलाने योग्य है। इसने जो कहा है वो सही राइ है और मैं भी इसका अनुमोदन करता हूँ। इस पर रावण...
सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 39 22.09.2021 1:18:10
सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 39वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब रावण ने विभीषण से उनकी राय मांगी तो उन्होंने अत्यंत आदर और सम्मान पूर्वक रावण को बताया की काम आदि से दूर रहते हुए सीताजी को वापस भिजवा कर रामजी की शरण में जाना ही कल्याणकारी है। वे कहते हैं की रामजी सामान्य नारों के राजा नहीं हैं, वे साक्षात् ईश्वर हैं। यह सब बातें हमें अभी पुलस्त्य...
सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 38 21.09.2021 1:30:40
सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 38वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब रावण अपने सचिवों पूछ रहा था की आप अपनी-अपनी राय दीजिये तब उसी समय विभीषणजी भी आये और आदर से रावण को प्रणाम करके अपना स्थान ग्रहण करा। जब रावण ने उनसे अपनी राय देने को कहा तो वे बहुत आदर के साथ बोले की 'हे नाथ, हमारा तो यह विचार है की अगर अपना कल्याण कहते है तो परनारी को कभी भी...
सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 37 20.09.2021 1:19:35
सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 37वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब मन्दोदरी को अपनी प्रजा के मन में डर और चिंता के सतत समाचार प्राप्त हुए तो स्ने एक अच्छी महारानी के नाते अपनी प्रजा के हित और कल्याण की भाव से प्रेरित होकर रावण से इस विषय में पुनर्विचार हेतु निवेदन किया, लेकिन रावण अपने अभिमान के चलते उसके ऊपर हँसा और निश्चिन्त रहने की सलाह देकर अपन...
सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 36 19.09.2021 1:20:33
सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 36वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब रामजी की पूरी सेना सागर के पास पहुँच गयी, तब सब वानरों और भालुओं ने फल आदि खाये और विश्राम किया। दूसरी तरफ लंका की स्थिति का वर्णन का गोस्वामीजी बताते हैं की वहां की समस्त प्रजा बहुत ही डरी हुई थी। हनुमानजी का लंका में विनाश घर-घर में चर्चा का विषय था। सब बोल रहे थे की जिसका एक वानर...
सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 35 18.09.2021 1:17:25
सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 35वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब सब सुग्रीव की आज्ञा और आव्हान पर वानर और भालू गण इकट्ठा हो गए तब भगवान् राम ने सबको अत्यंत कृपा की नज़रों से देखा जिससे सब अत्यंत प्रेरित और उत्साही हो गए, और फिर गरजते हुए उत्साह से युक्त रामजी की सेना ने कूच किया। उस समय का दृश्य और वर्णन अत्यंत रोमांचकारी था, जिसका अत्यंत काव्यात्...
सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 34 17.09.2021 1:19:05
सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 34वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब भगवान् हनुमानजी की भूरी-भूरी प्रशंसा कर रहे थे तब हनुमानजी रामजी के चारों में गिर जाते हैं। रामजी ने उन्हें उठाया और अपने गले से लगाया और पास बैठाया, और पूछने लगे की बताओ हनुमान तुमने रावण के द्व्रारा रक्षित लंका को कैसे जलाया। तब हनुमानजी अत्यंत सरलता एवं निरभिमानता से कहते हैं की...
सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 33 16.09.2021 1:16:21
सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 33वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब हनुमानजी ने रामजी को सीताजी का सन्देश सुनाया तब रामजी भाव से विह्वल हो गए और आंख से आंसू निकलने लगे और हनुमानजी से बोलते हैं की हे हनुमान, जो हमारे प्रति मन, कर्म और वचन से समर्पित होता है उसे कैसे दुःख मिल गया। हनुमानजी कहते हैं हे प्रभु दुःख तो तभी मिलता है जब आपका स्मरण बाधित हो...
सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 32 15.09.2021 1:16:20
सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 32वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब रामजी ने हनुमानजी से सीता का कुशल-क्षेम पुछा तब उन्होंने अत्यंत मार्मिक शब्दों में सीता के हाल एवं उनका सन्देश रामजी को दिया। यह प्रसंग अत्यंत भाव-प्रधान एवं हृदयस्पर्शी है। सीताजी ने कहा की हमारी तरफ से अनुज समेत रामजी के चरण स्पर्श करना और पूछना की प्रभु तो भक्तवत्सल हैं तो हमें क...
सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 31 14.09.2021 1:11:05
सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 31वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब सुग्रीव एवं जाम्बवानजी समस्त वानर की मंडली एवं हनुमानजी के साथ रामजी के पास पहुँचे तब कुशल-क्षेम के बाद जाम्बवानजी ने ने रामजी की वंदना करके हनुमानजी की पूरी लंका-लीला बताना प्रारम्भ किया - और कहा की प्रभु हनुमानजी ने जो किया है वो तो हज़ार मुख से भी हम बता नहीं सकते। तो भी उन्होंने...
सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 30 13.09.2021 1:10:17
सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 30वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि हनुमानजी सीता के दर्शन कर उनका आशीर्वाद लेकर, एवं सीता जी के द्वारा दिया हुआ चिन्ह और सन्देश लेकर, जोर से गर्जना करके लंका से वापस निकल गए। वे वहां पहुँच कर वानरों से मिले और सब समाचार बताया। सब बहुत ही खुश हुए जैसे उनको नया जीवन मिल गया हो। सब फिर सुग्रीव के पास गए। नगर के बाहर सुग्र...
सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 29 12.09.2021 1:25:36
सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 29वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि हनुमानजी लंका दहन के बाद समुद्र में अपनी पूँछ बुझा कर पुनः छोटा रूप धारण करके सीताजी के पास आये और उन्हें प्रणाम करके बोले की हे माता, आप भी हमें रामजी के लिए कोई चिन्ह दीजिये जैसे प्रभु ने दिया था। तब सीता जी ने अपनी चूड़ामणि उतार कर उन्हें दी और साथ-साथ कुछ विशेष सन्देश भी दिया। उसके...
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