AKTANU899

कविताएं (Poetry Hindi -Urdu)

Arts HI ↓ 533 episodi

I like poetry. I have made this podcast to recite some of my favourite poets poem and some of my own.

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Autore

AKTANU899

Categoria

Arts

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Ultimo episodio

13 ott 2026

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Episodi

चांदनी कुछ चित्र कुछ प्रश्न 25.05.2026

गिरिजा कुमार माथुर की कविता चांदनी कुछ चित्र कुछ प्रश्न

प्रार्थना और चीख़ों के बीच 25.05.2026

अशोक वाजपेयी

चुपचाप 25.05.2026

सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

यूं मुझसे रुठकर जाने का शुक्रिया 25.05.2026

कुंअर बेचैन की ग़ज़ल यूं मुझसे रुठकर जाने का शुक्रिया

किसी हिचकी से आती है 25.05.2026

कुंअर बेचैन की ग़ज़ल

कितनी लघु अंजली हमारी 25.05.2026

अज्ञेय की कविता कितनी लघु अंजली हमारी

आवारा 2 21.05.2026

असरारुल हक़ मजाज़ की प्रसिद्ध नज़्म आवारा का दूसरा हिस्सा

आवारा 1 20.05.2026

असरारुल हक़ मजाज़ की प्रसिद्ध नज़्म आवारा का पहला हिस्सा

तूं मुझे इतने प्यार से मत देख 20.05.2026

अली सरदार जाफ़री की नज़्म तूं मुझे इतने प्यार से मत देख

मैं मोम की बती हूं 20.05.2026

लुत्फ़ी की एक ग़ज़ल

अलविदा 20.05.2026

विजयदेव नारायण साही की कविता अलविदा का पाठ

कबीर (४) 05.08.2025

ठाकुर प्रसाद सिंह जी के खण्ड काव्य कबीर का चौथा भाग

कबीर (३) 05.08.2025

ठाकुर प्रसाद सिंह जी के खण्ड काव्य कबीर का तीसरा भाग

कबीर ( २) 01.08.2025

ठाकुर प्रसाद सिंह के खण्ड काव्य कबीर का दूसरा भाग

कबीर (१) 01.08.2025

ठाकुर प्रसाद सिंह के खण्ड काव्य कबीर का पहला भाग

पर्वत की घाटी का जल चंचल (वंशी और मादल) 27.07.2025

वंशी और मादल ठाकुर प्रसाद सिंह के संथाली ताप में ताए छोटे छोटे गीतों का अमूल्य संग्रह है

मेरे घर के पीछे चन्दन है (वंशी और मादल) 27.07.2025

वंशी और मादल ठाकुर प्रसाद सिंह के संथाली ताप में ताए छोटे छोटे गीतों का अमूल्य संग्रह है

चिड़ियों ने पर्वत पर घोंसला बनाया (वंशी और मादल) 27.07.2025

वंशी और मादल ठाकुर प्रसाद सिंह के संथाली ताप में ताए छोटे छोटे गीतों का अमूल्य संग्रह है

आछी के बन (वंशी और मांदल ) 27.07.2025

वंशी और मांदल ठाकुर प्रसाद सिंह के संथाली ताप में ताए छोटे छोटे गीतों का अमूल्य संग्रह है

नदिया का घना घना कूल है (वंशी और मादल) 27.07.2025

वंशी और मादल ठाकुर प्रसाद सिंह के संथाली ताप में ताए छोटे छोटे गीतों का अमूल्य संग्रह है

पात झरे फिर फिर होंगे हरे (वंशी और मांदल) 27.07.2025

वंशी और मांदल ठाकुर प्रसाद सिंह के संथाली ताप में ताए छोटे छोटे गीतों का अमूल्य संग्रह है

चलो चलें चम्पागढ़ सपनों के देश(वंशी और मांदल) 27.07.2025

वंशी और मांदल ठाकुर प्रसाद सिंह के संथाली ताप में ताए छोटे छोटे गीतों का अमूल्य संग्रह है

कबसे तुम गा रहे, कबसे तुम गा रहे (वंशी और मादल) 27.07.2025

वंशी और मादल ठाकुर प्रसाद सिंह के संथाली ताप में ताए छोटे छोटे गीतों का अमूल्य संग्रह है

अब मत सोचो (वंशी और मादल) 27.07.2025

वंशी और मादल, ठाकुर प्रसाद सिंह की संथाली गीतों के ताप में ताए छोटे छोटे अमूल्य गीतों का संग्रह है

खुली हथेली और तुलसी गंध 25.07.2025

ठाकुर प्रसाद सिंह की कविता जो काशी के प्रति उनके गहने अनुराग का प्रतीक होते के साथ-साथ पढ़ने वाले को काशी का भ्रमण करा देती है

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