Prof. Subhash Saini

Subhash Saini Podcast

जिंदगी में भरोसा पैदा करने वाले व्यक्तियों, घटनाओं व रचनाओं से परिचय। साहित्यिक-सास्कृतिक-कलात्मक रूचियों का परिष्कार।सत्य आधारित संवेदनशील-समतामूलक, न्यायपूर्ण व विवेकशील समाज का निर्माण। महात्मा बुद्ध, कबीर, रैदास, गुरुनानक देव, जोतीबा फुले, सावित्री बाई फुले, डा. भीमराव आंबेडकर, शहीद भगतसिंह आदि प्रगतिशील विचारकों की चिंतन परंपरा का विकास।

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Epizódok

47 - ( निबंध ) साहित्यकारः व्यक्ति और समष्टि - महादेवी वर्मा 09.06.2021

साहित्यकारः व्यक्ति और समष्टि - महादेवी वर्मा

46 - ( निबंध ) नई संस्कृति की ओर - रामवृक्ष बेनीपुरी 08.06.2021

हिन्दोस्तान आज़ाद हो गया। आज़ाद हिन्दोस्तान का ध्यान एक नए समाज के निर्माण की ओर केन्द्रित हो रहा है। यह नया समाज कैसा हो?- उसका मूल आधार कैसा हो? उसका विकास किस प्रकार किया जाए? हिन्दोस्तान का हर देशभक्त इन प्रश्नों पर सोच-विचार कर रहा है। समाज को अगर एक वृक्ष मान लिया जाए, तो अर्थनीति उसकी जड़ है, राजनीति तना; विज्ञान आदि उसकी डालियाँ हैं और संस्कृति उसके फूल । इसलिए नए समाज की अर्थनीति या राजनी...

45 - ( निबंध ) शिरीष के फूल - आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी 08.06.2021

शिरीष के फूल - आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जहाँ बैठकर यह लेख लिख रहा हूँ उसके आगे-पीछे, दाएँ-बाएँ, शिरीष के अनेक पेड़ हैं | जेठ की जलती धूप में, जबकि धरित्री निर्धन अग्निकुंड बनी हुई थी, शिरीष नीचे से ऊपर तक फूलों से लद गया था | कम फूल इस प्रकार की गरमी में फूल सकने की हिम्मत करते हैं | कर्णीकार ( कनेर या कनियार ) और आराग्वध ( अमलतास ) की बात मैं भूल नहीं रहा हूँ | वे भी आस-पास बहुत हैं |लेकिन शि...

44 - ( पत्र ) अब्राहिम लिंकन का अपने बेटे के शिक्षक नाम पत्र 06.06.2021

अब्राहिम लिंकन का अपने बेटे के शिक्षक नाम पत्र  सम्माननीय सर मैं जानता हूँ कि इस दुनिया में सारे लोग अच्छे और सच्चे नहीं हैं। यह बात मेरे बेटे को भी सीखना होगी। पर मैं चाहता हूँ कि आप उसे यह बताएँ कि हर बुरे आदमी के पास भी अच्छा हृदय होता है। हर स्वार्थी नेता के अंदर अच्छा लीडर बनने की क्षमता होती है। मैं चाहता हूँ कि आप उसे सिखाएँ कि हर दुश्मन के अंदर एक दोस्त बनने की संभावना भी होती है। ये बातें...

43 - ( निबंध ) अंधविश्वास - प्रेमचंद 05.06.2021

अंधविश्वास - प्रेमचंद हिन्दू-समाज में पुजने के लिए केवल लंगोट बांध लेने और देह में राख मल लेने की जरूरत है; अगर गांजा और चरस उड़ाने का अभ्यास भी हो जाए, तो और भी उत्तम। यह स्वांग भर लेने के बाद फिर बाबाजी देवता बन जाते हैं। मूर्ख हैं, धूर्त हैं, नीच हैं, पर इससे कोई प्रयोजन नहीं। वह बाबा हैं। बाबा ने संसार को त्याग दिया, माया पर लात मार दी, और क्या चाहिए? अब वह ज्ञान के भंडार हैं, पहुंचे हुए फकीर,...

42 - ( निबंध ) सच्ची वीरता - सरदार पूर्ण सिंह 05.06.2021

सच्ची वीरता - सरदार पूर्ण सिंह सरदार पूर्ण सिंह जी (1881 से 1931) का जन्म वर्तमान पाकिस्तान के ज़िला एबटाबाद के गांव सिलहड़ में हुआ था । हाईस्कूल रावलपिंडी से उत्तीर्ण की और एक छात्रवृत्ति पाकर उच्च अध्ययन के लिए जापान चले गए । लौटकर पहले वे साधु जीवन जीने लगे और बाद में गृहस्थ हुए । देहरादून में नौकरी की, कुछ समय ग्वालियर में व्यतीत किया और फिर पंजाब में खेती करने लगे । उन्होंने ‘कन्यादान’, ‘पवित...

41 - ( निबंध ) अध्ययन - आचार्य रामचंद्र शुक्ल 04.06.2021

अध्ययन - आचार्य रामचंद्र शुक्ल

40 - ( निबंध ) यथास्मै रोचते विश्वम् - रामविलास शर्मा 03.06.2021

यथास्मै रोचते विश्वम् - रामविलास शर्मा  साहित्य का पांचजन्य समर भूमि में उदासीनता का राग नहीं सुनाता। वह मनुष्य को भाग्य के आसरे बैठने और पिंजड़े में पंख फड़फड़ाने की प्रेरणा नहीं देता। इस तरह की प्रेरणा देने वालों के वह पंख कतर देता है। वह कायरों और पराभव प्रेमियों को ललकारता हुआ एक बार उन्हें भी समरभूमि में उतरने के लिए बुलावा देता है। कहा भी है- “क्लीवानां धाष्ट्र्यजननमुत्साहः शूरमानिनाम्।”...

39 - (लघु कथा) अरब और उसका कुत्ता - मौलाना जलालुद्दीन रुमी 02.06.2021

अरब और उसका कुत्ता - मौलाना जलालुद्दीन रुमी एक अरब ने एक कुत्ता पाल रखा था। वह उससे बहुत प्यार करता था। वह उसे हमेशा पुचकारता और दुलारता रहता था लेकिन खाने के लिए कुछ नहीं देता था। एक दिन वह कुत्ता भूखों मर गया। अरब ज़ोर-ज़ोर से रोने लगा। उसने इतना शोर मचाया कि पास-पड़ोसी तंग आ गए। सब उसके पास आए और उन्होंने पूछा, “इतना क्यों रोते हो ? क्या हुआ?" अरब ने बताया कि उसका कुत्ता मर गया है। वह उसके शोक...

38 - (लघु कथा) तेली का तोता - रुमी 02.06.2021

तेली का तोता - रुमी एक तेली ने एक तोता पाल रखा था। तोता बड़ा बुद्धिमान था। वह तरह तरह की बोलियां बोलता था। उससे बात कर तेली बहुत ख़ुश हुआ करता था। तेली की ग़ैरेहाज़िरी में तोता ही उसकी दुकान की देख-भाल किया करता था। एक दिन जब तोता दुकान में अकेला था, एक बिल्ली अंदर घुस गई। बिल्ली तोते के ऊपर झपटी। तोता प्राण बचाने के लिए इधर-उधर उड़ने लगा। उड़कर • उसने अपनी जान तो बचा ली लेकिन इस कूद-फांद की वजह स...

37 - ( निबंध ) जापान में क्या देखा - भदन्त आनन्द कौशल्यायन 01.06.2021

जापान में क्या देखा - भदन्त आनन्द कौशल्यायन https://desharyana.in/archives/17661 किसी भी व्यक्ति के परिचय के लिए उसके साथ दीर्घकालीन सहवास आब श्यक है और किसी भी देश के परिचय के लिए वहाँ दीर्घकालीन निवास जापान में अपना न दीर्घकालीन निवास ही रहा और न कुछ कहने-सुनने लायक सामाजिक जीवन ही। तो भी दो-चार बातें सुनिए ।

36 - (लघु कथा) चीनी और यूनानी कलाकार - रूमी 01.06.2021

चीनी और यूनानी कलाकार - रूमी एक सुल्तान के दरबार में चीन और यूनान, दोनों देशों के कलाकार थे। दोनों वर्ग अपने को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ चित्रकार मानते थे। इस मुद्दे पर इन दोनों तबक़ो में हमेशा बहस होती रहती थी। इस झगड़े के निपटारे के लिए सुल्तान ने एक तजवीज की। सुल्तान ने दोनों वर्गों को एक-एक मकान आबंटित कर दिया। दोनों मकान आमने-सामने थे। उन्हें इन मकानों को अपनी चित्रकारी द्वारा सजाना था। उनकी कला...

35 - ( निबंध ) बौद्धकालीन भारतीय विश्वविद्यालय - आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी 30.05.2021

बौद्धकालीन भारतीय विश्वविद्यालय - आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी

34 - ( निबंध ) उपभोक्तावाद की संस्कृति - श्यामाचरण दुबे 30.05.2021

उपभोक्तावाद की संस्कृति और विज्ञापन की चमक-दमक हमें वास्तविकता से दूर ले जा रही है। दिखावा और प्रदर्शन जीवन का पर्याय बनते जा रहे हैं। इस संस्कृति के दुष्परिणामों की ओर संकेत करता निबंध।

33 - ( निबंध ) गेहूं बनाम गुलाब - रामवृक्ष बेनीपुरी 29.05.2021

रामवृक्ष बेनीपुरी का जन्म 23 दिसंबर, 1899 को बेनीपुर, मुजफ्फरपुर (बिहार) में हुआ था। वे स्वाधीनता सेनानी के रूप में लगभग नौ साल जेल में रहे। कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के संस्थापकों में से एक बेनीपुरी जी 1957 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से विधायक चुने गए थे। ‘गेहूँ और गुलाब’ 1948 से 1950 के बीच लिखे शब्दचित्रों का संग्रह है, जिसमें 25 शब्दचित्र हैं। इस संग्रह में गेहूं और गुलाब’ शीर्षक एक शब्द चित्र भ...

32 - ( कविता ) महासच - कुंवर नारायण 28.05.2021

कुंवर नारायण की कविता ध्यान खींचती है कि सत्ता अपने मीडिया के संसाधनों का प्रयोग करके सच को छुपाता है. किस तरह बड़े बड़े आख्यानों के नीचे छोटे छोटे सच ओझल कर दिए जाते हैं। 

31 - ( निबंध ) निंदा रस - हरिशंकर परसाई 27.05.2021

क' कई महीने बाद आए थे। सुबह चाय पीकर अखबार देख रहा था कि वे तूफान की तरह कमरे में घुसे, साइक्लोन जैसा मुझे भुजाओं में जकड़ लिया। मुझे धृतराष्ट्र की भुजाओं में जकड़े भीम के पुतले की याद गई। जब धृतराष्ट्र की पकड़ में भीम का पुतला गया तो उन्होंने प्राणघाती स्नेह से उसे जकड़कर चूर कर डाला। ‘क' से क्या मैं गले मिला? हरगिज नहीं। मैंने शरीर से मन को चुपचाप खिसका दिया। पुतला उसकी भुजाओं में सौंप दिया। मुझ...

30 - (लघु कथा) सच्चा राजा 27.05.2021

सच्चा राजा लघुकथा एक व्यंग्य है अहंकार पर। धन, रूप और बल की प्राप्ति नहीं बल्कि अपनी इच्छाओं पर जीत हासिल करने वाला ही सच्चा राजा होता है।

28 - (पत्र) सावित्रीबाई फुले का जोतीबा फुले को दूसरा पत्र 26.05.2021

29 अगस्त 1868 नायगांव, पेटा खंडाला सतारा सच्चाई के अवतार, मेरे स्वामी ज्योतिबा, सावित्री का प्रणाम! मुझे आपका पत्र मिला. हम सब यहां सकुशल हैं, मैं अगले महीने के पांचवें दिन तक आऊंगी. इस विषय पर चिंता मत करिये. इस बीच, यहां एक अजीब बात हुई है. किस्सा इस तरह है कि गणेश नाम का एक ब्राह्मण, गांवों में घूमकर धार्मिक संस्कार करता है और लोगों को उनकी किस्मत बताता है. यह उसकी रोज़ी रोटी है. गणेश और शारजा...

29 - (पत्र) सावित्रीबाई फुले का जोतीबा फुले को तीसरा पत्र 26.05.2021

सावित्रीबाई फुले का जोतीबा फुले को तीसरा पत्र  20 अप्रैल, 1877 ओटुर, जुननर सच्चाई के अवतार, मेरे स्वामीज्योतिबा, सावित्री आपको प्रणाम करती है! वर्ष 1876 चला गया है, लेकिन अकाल नहीं है – यह सबसे अधिक भयानक रूपों में रहता है. लोग मर रहे हैं, जानवर भी मरकर ज़मीन पर गिर रहे हैं. भोजन की गंभीर कमी है जानवरों के लिए कोई चारा नहीं. लोग अपने गांवों को छोड़ने के लिए मजबूर हैं. कुछ लोग अपने बच्चों, उनक...

27 - (लघु कथा) चतुर तोता - मौलाना जलालुद्दीन रुमी 24.05.2021

चतुर तोता - मौलाना जलालुद्दीन रुमी एक व्यापारी ने एक हिंदुस्तानी तोता पाल रखा था। वह उसे पिंजड़े में सदैव बंद रखता था। एक बार व्यापार के सिलसिले में वह हिंदुस्तान जाने को हुआ। उसने तोते से पूछा, “अपनी बिरादरी के भाई-बंदों के लिए अगर कोई संदेश भिजवाना हो, तो मुझे बता दो। मैं तुम्हारा संदेश उन तक पहुंचा दूंगा।" तोते ने कहा कि मेहरबानी करके उन्हें सिर्फ इतना बता दीजिएगा कि मुझे यहां रात-दिन पिंजड़े म...

26 - (साक्षात्कार) अलीबख्श के जीवन और ख्यालों पर जीवन सिंह से प्रोफेसर सुभाष चंद्र का साक्षात्कार 24.05.2021

अलीबख्श रेवाड़ी-नारनौल क्षेत्र में सक्रिय थे। इनके कुल 9 ख्याल अथवा स्वांग कहे जाते हैं। इनके स्वागों में  लोक जीवन का सत्य व साझी संस्कृति के दर्शन होते हैं।  अलीबख्श के जीवन और ख्यालों पर आलोचक जीवन सिंह से कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में हिंदी विभाग में प्रोफेसर व देसहरियाणा पत्रिका के संपादक सुभाष चंद्र का साक्षात्कार। इस साक्षात्कार में अलीबख्श के संबंध में कई महत्वपूर्ण...

25 - (पत्र) सावित्रीबाई फुले का जोतीबा फुले को पहला पत्र 24.05.2021

सावित्रीबाई फुले ने जोतीबा फुले को तीन पत्र लिखे। ये  पत्र ऐतिहासिक दस्तावेज हैं, जिनसे तत्कालीन समाज का विश्वसनीय ढंग से पता चलता है। फुले दंपति के संघर्षों व उनके प्रभाव की जानकारी मिलती है साथ ही इसका भी पता चलता है कि तत्कालीन स्वार्थी तत्व किस तरह उनको बदनाम करते थे। फुले दंपति के जीवन संघर्ष व भारतीय नवजागरण के समझने के लिए ये महत्वपूर्ण हैं।1856 में लिखा पहला पत्र यहां प्रस्तुत है। &nb...

24. ( कविता ) सफलता की कुंजी - कुंवर नारायण 23.05.2021

व्यवस्था के चरित्र को उदघाटित करती कविता जिसमें असली गुनाहगार साफ बचकर निकल जाता है और हमेशा मारा जाता है आम जन।  सफलता की कुंजी - कुंवर नारायण दोनों के हाथों में भरी पिस्तौलें थीं दोनों एक-दूसरे से डरे हुए थे दोनों के दिल एक-दूसरे के लिए पुरानी नफ़रतों से भरे हुए थे उस वक़्त वहाँ वे दो ही थे लेकिन जब गोलियाँ चलीं मारा गया एक तीसरा जो वहाँ नहीं चाय की दुकान पर था... पकड़ा गया एक चौथा जो चाय की...

23.( लघु कथा ) न्याय - एक लघु कथा 23.05.2021

न्याय लघुकथा समाज में व्याप्त आर्थिक विषमता को दर्शाती है।

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