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Naami Giraami

Society HI ↓ Επεισόδια: 303

Naami Giraami is a Hindi podcast by Aaj Tak Radio on biographies of influential and powerful people. Audio packages on Stories and life journeys of famous personalities of India and around the world. Catch up with a new episode every Monday. नायक और खलनायक. विद्वान और महारथी. कला के ऐसे सितारे जो अब भी आसमान में चमकते हैं. और ऐसी हस्तियां जो इतिहास में अमर हैं. उजले व्यक्तित्व के धनी भी. और स्याह पहलुओं वाले लोग भी. ये वो लोग हैं जो मशहूर हैं. ये हैं, नामी गिरामी. सुनिए, हर सोमवार आज तक रेडियो पर.

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Τελευταίο επεισόδιο

5 Μαϊ 2025

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Επεισόδια

कभी अमेरिका के लाड़ले रहे सद्दाम हुसैन का तख़्तापलट कैसे हुआ?: नामी गिरामी, Ep 78 04.01.2021

आज से ठीक अठारह साल पहले इराक में सद्दाम हुसैन की सत्ता का पतन हो गया था. 30 दिसंबर 2006 को इस तानाशाह को फांसी दे दी गई. अमेरिका ने इसकी पूरी पटकथा लिखी थी. लेकिन आज तक ये सवाल कायम है कि क्या सद्दाम पर हमला बोलने के लिए अमेरिका ने झूठा बहाना बनाया था, तो असल में खलनायक कौन था? कभी अमेरिका के लाड़ले रहे सद्दाम हुसैन को ये सब क्यों भुगतना पड़ा और आख़िर क्यों उसे उसकी चुनी हुई मौत भी नहीं नसीब नहीं हु...

भारत को यूरोप दिखाने वाले लेखक निर्मल वर्मा: नामी गिरामी, Ep 77 28.12.2020

निर्मल वर्मा ऐसे हिंदी लेखक हैं जिनकी कहानियों के पात्र देशी और विदेशी दोनों हैं. ना सिर्फ भारतीय बल्कि यूरोपीय जीवन को भी उन्होंने करीने से काग़ज़ों पर उतारा. नामी गिरामी में हिंदी साहित्य जगत के इस मूर्धन्य लेखक को याद कर रहे हैं नितिन ठाकुर.

पीवी नरसिम्हा राव- जिन्होंने जब भी संन्यास लेना चाहा पार्टी ने उनका प्रमोशन कर दिया: नामी गिरामी, Ep 76 21.12.2020

पी.वी. नरसिम्हा राव देश के उन प्रधानमंत्रियों में हैं, जो संयोग से इस कुर्सी पर बैठे, लेकिन अपनी छाप छोड़ गए. एक राजनेता होने के साथ-साथ बहुभाषी विद्वान रहे पी.वी. नरसिम्हा राव का राजनीतिक सफ़र कैसा रहा, वह कांग्रेस पार्टी में शीर्ष तक कैसे पहुंचे और राजनीति के पंडित उन्हें 'आधा शेर' क्यों कहते थे, नामी गिरामी में नितिन ठाकुर से सुनिए इस कद्दावर नेता के कुछ अनसुने क़िस्से.

ज़मींदार का बेटा जिसने अभिनय की दुनिया में नाम कमाया: नामी गिरामी, Ep 75 14.12.2020

फ़ारुक़ शेख भारतीय सिनेमा की आर्ट फ़िल्मों का एक बहुत बड़ा नाम. तक़रीबन 40 साल के अपने करियर में उन्होंने रुपहले पर्दे पर कई यादगार किरदार निभाए. पैरेलल सिनेमा के इस दमदार अभिनेता का करियर कैसा रहा? ज़मींदार घर से ताल्लुक़ रखने वाले फ़ारुक़ शेख फिल्मों में कैसे आए, नामी गिरामी के इस अंक में उनके कुछ दिलचस्प क़िस्से सुनिए नितिन ठाकुर से.

मशहूर बैंड Beatles की कहानी जिसके कलाकारों ने शांति की खोज में ऋषिकेश आकर शरण ली: नामी गिरामी, Ep 74 07.12.2020

अपने लाजवाब संगीत से दुनियाभर में मशहूर हुए रॉक बैंड बीटल्स (The Beatles) की क्या कहानी है? जॉन लेनन ने कैसे बनाया था ये बैंड, इसके कलाकार शांति की तलाश में ऋषिकेश क्यों आए और जॉन लेनन को उनके फैन ने क्यों मार दी थी गोली, सुनिए नामी गिरामी के इस अंक में नितिन ठाकुर से.

हिटलर की ज़िंदगी का आख़िरी दिन: नामी गिरामी, Ep 73 30.11.2020

तानाशाह एडोल्फ हिटलर का जन्म 20 अप्रैल 1889 में हुआ था. दूसरे विश्व युद्ध के लिए उसे ही ज़िम्मेदार माना जाता है. मानव इतिहास का सबसे विनाशकारी युद्ध जिसमें करोड़ों लोगों की जान गई थी. इसके अलावा 60 लाख यहूदियों की बेरहमी से हत्या जिसमें न बच्चे बख्शे गए न बूढ़े. अंत में जब उसे हार सिर पर नज़र आने लगी तो 30 अप्रैल 1945 को उसने आत्महत्या कर ली. सुनिए उसके आख़िरी दिन का किस्सा अमन गुप्ता से.

अल्बर्ट आइंस्टाइन ने इस दुनिया को क्या दिया?: नामी गिरामी, Ep 72 23.11.2020

अल्बर्ट आइंस्टाइन जितने महान वैज्ञानिक थे उतने बड़े दार्शनिक. विज्ञान में उनका योगदान अतुलनीय है लेकिन एक समाज को कैसा होना चाहिए, इस पर भी उनकी राय बड़ी स्पष्ट थी. इस नामी गिरामी में अमन गुप्ता से सुनिए उनके कई अनसुने किस्से.

गैब्रियल गार्सिया मार्केज़- अनूठी लेखन शैली का उस्ताद: नामी गिरामी, Ep 71 16.11.2020

कोलंबियाई लेखक गैब्रियल गार्सिया मार्केज़ को जादुई यथार्थ का लेखक कहा जाता है. उनकी अनूठी शैली ऐसी थी कि असल घटनाएं भी जादुई होने का भरम पैदा करती थीं.  उनकी कहानियों के मुरीद साहित्य के पुरोधा भी हुए और आम पाठक भी. क्या ख़ास था उनके लेखन में, नामी गिरामी में उन्हें याद कर रहे हैं नितिन ठाकुर.

कहानी 'सारे जहाँ से अच्छा हिंदोस्तां हमारा' लिखने वाले अल्लामा इक़बाल की: नामी गिरामी, Ep 70 09.11.2020

'सारे जहाँ से अच्छा हिंदोस्तां हमारा', यह वही गीत है जिसे आपने बचपन में स्कूल असेम्बली में गाया होगा. यह वही गीत है जिसे आप देश के राष्ट्रीय पर्वों पर गाते हैं और यह वही गीत है जब आपसे कोई पूछता है कि भारत के बारे में आप क्या सोचते हैं तो आप जवाब में बस इसे गुनगुना भर देते हैं. लेकिन इस गीत को लिखने वाले शायर, दार्शनिक मोहम्मद इक़बाल को कितना जानते हैं आप? आज का 'नामी गिरामी' इक़बाल के जीवन पर, पेश...

अमर्त्य सेन: जिनके सम्मान में लंदन में हुई 'चेयर' की स्थापना: नामी गिरामी, Ep 69 02.11.2020

भारत की समृद्ध परंपरा को आधुनिक समय में जिस तरह अमर्त्य सेन दर्शन और अर्थशास्त्र की नज़र से देखते हैं, उसकी गिरहें खोलते हैं वह विरले देखने को मिलता है. बंगाल में जन्मे और वहीं शुरूआती शिक्षा हासिल करने वाले अमर्त्य सेन अपने तर्क और इंटेलिजेंस के दम पर न केवल कैम्ब्रिज और हार्वर्ड तक पहुंचते हैं बल्कि अपने ज्ञान के दम पर नोबेल पाने वाले एशिया के पहले अर्थशास्त्री भी बनते हैं. सुनिए, अमर्त्य सेन पर...

पत्रकार जिसने दंगे रोकने की कोशिश में अपनी जान गंवा दी 26.10.2020

मार्च 1931 की बात है, देश में दो घटनाएं घटीं. पहली 23 मार्च को जब भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दी गयी और दूसरी 25 मार्च को जब कानपुर में भड़के दंगों को एक पत्रकार ने केवल कलम के दम पर नहीं बल्कि सशरीर सड़क पर उतरकर शांत करवाने की कोशिशें की और अमृतलाल नागर के शब्दों में वह पत्रकार अपने ही घर में शहीद हो गया: गणेश शंकर विद्यार्थी. नामी गिरामी में अंजुम शर्मा के साथ सुनिए, क्यों ज़रूरी है निडर,...

जब नेहरू से पहले सुभाष चंद्र बोस बने प्रधानमंत्री 19.10.2020

सुभाष चंद्र बोस का मानना था कि द्वितीय विश्व-युद्ध में फंसे अंग्रेज़ों की राजनितिक अस्थिरता का फ़ायदा उठाते हुए भारत को स्वतंत्रता के प्रयास करने चाहिएं, न कि इस बात का इंतज़ार करना चाहिए कि युद्ध ख़त्म होने पर अंग्रेज़ हमें ख़ुद स्वतंत्र कर देंगे. इन्हीं सब को देखते हुए 21 अक्टूबर 1943 को नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने सिंगापुर में आज़ाद हिंद सरकार स्थापित करने की घोषणा की थी। कैसे किया था उन्होंने यह सब,...

राम मनोहर लोहिया ने क्यों कही थी कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंकने की बात? 12.10.2020

राम मनोहर लोहिया आज़ादी से पहले कांग्रेस पार्टी के भीतर सक्रिय कांग्रेस समाजवादी दल के प्रमुख नेताओं में एक थे. साइमन कमीशन का विरोध, भारत छोड़ो आंदोलन से लेकर गोवा मुक्ति आंदोलन तक उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही, लेकिन आज़ादी के बाद राम मनोहर लोहिया पहले ऐसे राजनेता रहे जिन्होंने कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया था. आख़िर क्यों कहना पड़ा उन्हें कि ज़िंदा क़ौमें पांच साल तक इंतज़ार नहीं करत...

ज्ञान की खोज में एक बाबा से मिलने नैनीताल पहुंचे थे स्टीव जॉब्स 05.10.2020

अमरीकी बिज़नेस टाइकून और एप्पल इंक कंपनी के सह संस्थापक स्टीव जॉब्स रोज़ सुबह आइने में अपना चेहरा देखते थे और सोचते थे कि यदि आज उनके जीवन का आखिरी दिन है, तो उन्हें वो करना चाहिए जो वे चाहते हैं. उनकी इसी सोच ने उन्हें दुनिया के बड़े बिज़नेस टाइकून, टेक्नॉलजी की दुनिया में बदलाव करने वाले सबसे बड़े नायकों में शुमार कर दिया था. लेकिन एप्पल की स्थापना से पहले स्टीव जॉब्स भारत आये थे, यहां वे कई मंदिरों...

केवल सलमान या दक्षिण की नहीं, पूरे भारत की पहचान थे एसपी बालासुब्रमण्यम 28.09.2020

कहते हैं दक्षिण में एसपी बालासुब्रमण्यम ने अपनी गायिकी से एकछत्र राज किया है. वह डिज़र्व भी करते थे क्योंकि इसके पीछे उनका कठिन रियाज़ था. ऊंचे सुरों को तो वो साधते ही थे लेकिन अवरोह में आते आते, जो मिठास वो घोलते थे- आह! बारीक हरकतों के साथ यूडलिंग का पुट भी डालते थे फलसेतो का भी. उनके चेहरे की हल्की सी हंसी उनके गायन में महसूस की जा सकती थी. एसपी बालासुब्रमण्यम केवल सलमान खान की रोमांटिक आवाज नहीं...

एनी बेसेंट: अंग्रेज़ जो भारत के लिए अंग्रेज़ों से लड़ीं 21.09.2020

एनी बेसेंट, भारतीय राजनीतिक इतिहास में एक ऐसी महिला रहीं जो साल 1893 में भारत आती हैं और भारत की हो कर रह जाती हैं. उन्होंने न केवल सामाजिक शैक्षणिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई बल्कि ब्रिटिशर होते हुए अंग्रेज़ी साम्राज्यवाद के ख़िलाफ ऐसी आवाज़ बुलंद की कि उन्हें उस वक़्त की सबसे बड़ी राजनीतिक संस्था भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष बनने का गौरव प्राप्त हुआ. आज तक रेडियो के इस पॉडकास्...

अंडरवर्ल्ड डॉन से लेकर नेताओं के गुनाह धोने के लिए मशहूर थे राम जेठमलानी 14.09.2020

राम जेठमलानी अपने समय के सबसे चर्चित, विवादित और महंगे वकीलों में से एक थे। वो किसी को भी इंटेरोगेट करने से नहीं चूकते थे। राजीव गांधी से बोफोर्स मामले में उन्होंने सैकड़ों सवालों की झड़ी लगा दी थी, इंदिरा गांधी का मामला हो या अपनी ही पार्टी के मंत्रियों के खिलाफ मोर्चा खोलना हो, राम जेठमलानी जो कहते थे डंके की चोट पर कहते थे। अंडरवर्ल्ड डॉन हाजी मस्तान से लेकर राजीव गांधी और इंदिरा गांधी के हत्या...

जयंती विशेष: हिंदी को नई चाल में ढालने वाले लेखक थे भारतेंदु हरिश्चंद्र 07.09.2020

भारतेंदु हरिश्चंद्र, हिंदी साहित्य में ऐसे लेखक हुए जो महज़ 34 बरस जिये लेकिन हिंदी भाषा और साहित्य को इतना कुछ दे गए कि जिस पर चलकर बाद के लेखकों ने अपनी राह बनाई. साहित्य का जो स्वरूप आज हम देखते हैं उसके मूल में उनका और उनके युग के रचनाकारों का बहुत बड़ा योगदान रहा है. हिंदी साहित्य में आधुनिकता के अगुआ भारतेंदु हरिश्चन्द्र के लेखन की क्या थी ख़ासियत, क्या था उनका पत्रकारिता, नाटक, कविता, निबंध जै...

क्या मेसी दुनिया के सबसे महान फ़ुटबॉल खिलाड़ी हैं? 31.08.2020

भारत में आमतौर पर क्रिकेट की दीवानगी के आगे बाक़ी खेल थोड़े फीके पड़ जाते हैं, लेकिन उनके फैन्स और आलोचक इतने भी कम नहीं हैं कि उन खेलों और उनसे जुड़े खिलाड़ियों पर हम बात न करें. फुटबॉल, पूर्वोत्तर भारत के अलावा जम्मू कश्मीर और कुछ अन्य राज्यों में ख़ासा लोकप्रिय है. लेकिन एक खिलाड़ी ऐसा है जिसे हर कोई जानता होगा या उसका नाम ज़रूर सुना होगा: लियोनेल मेसी. अगर आप उन्हें नहीं जानते तो अंजुम शर्मा के साथ सु...

पुण्यतिथि विशेष: नील आर्मस्ट्रॉन्ग ने क्यों मांगी थी इंदिरा गांधी से माफ़ी? 24.08.2020

नील आर्मस्ट्रॉन्ग को दुनिया चंद्रमा की सतह पर पहला क़दम रखने वाले शख़्स के तौर पर जानती है. चंद्रमा की सतह पर क़दम रखते हुए उन्होंने कहा था कि मानव का छोटा सा क़दम मानवता के लिए बड़ी छलांग है. नील जब धरती पर वापस लौटे तो उन्होंने विश्व यात्रा की. इसी दौरान वो दिल्ली आए और उनकी मुलाक़ात भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से हुई. मुलाक़ात के दौरान उन्होंने एक बात के लिए इंदिरा गांधी से माफ़ी मांगी। क्...

एक फटकार ने पं. जसराज को तबलावादक से संगीतकार बना दिया 19.08.2020

पंडित जसराज यानि यश के राजा जिन्होंने अपनी सुर साधना के बूते खुद को संगीत का मार्तण्ड कहलवाया. मार्तण्ड यानि सूर्य. और इस सूर्य की संगीतमय किरणों ने देश-दुनिया में सुरों का उजेरा बिखेर दिया. वे जिस ऊंचाई तक जाकर आलाप लगाते वहां पहुंचने के लिए अच्छे-अच्छे संगीतकारों के फेफड़ों में दम नहीं होता. आज 'नामी-गिरामी' में सुनिए संगीत के रसराज पंडित जसराज की ज़िंदगी के तमाम क़िस्से और उनकी बंदिशें अमन गुप्...

जन्मदिन विशेष: गुलज़ार, जिनके लिखे में हर कोई अपना हिस्सा ढूंढ लेता है 17.08.2020

अपने गीतों में गुलज़ार मानवीकरण की जो शैली अपनाते हैं वे उन्हें अलहदा बनाती है. उनके गीतों में बिम्ब लगातार बोलते चले जाते हैं. उनके लेखन का फ़लक गीत, शायरी, फिल्म निर्देशन, पटकथा संवाद लेखन, कहानी से लेकर बाल साहित्य और अनुवाद तक विस्तृत है. आख़िर ऐसा क्या है कि गुलज़ार हर पीढ़ी को छू जाते हैं, सुनिये आज तक रेडियो की इस पॉडकास्ट में अंजुम शर्मा के साथ. इस प्रस्तुति की साउंड-मिक्सिंग की है तिलक भाटिया...

राहत इंदौरी: 'वो मुझको मुर्दा समझ रहा है, उससे कहो मैं मरा नहीं हूँ' 13.08.2020

भरोसे से परे है कि राहत इंदौरी अब नहीं रहे. इंदौर के थे और अपनी मिट्टी से इतना प्यार करते थे कि राहतउल्ला कुरैशी की जगह शहर के नाम को अपना नाम बना लिया और हो गए राहत इन्दौरी. समकालीन शायरों में कई नाम ऐसे हैं जो जदीद शायरी को उसके उरूज तक ले गए, राहत इन्दौरी भी उनमें से एक थे. जब वो शेर पढ़ते थे तो लोग देर तक खड़े होकर तालियां बजाते रहते. मुशायरों में उनके प्रति दीवानगी देखते बनती थी. मंच पर कैसे थे...

जब मनोहर श्याम जोशी ने बताया स्क्रिप्ट राइटिंग का एक आसान सा फॉर्मूला 10.08.2020

मनोहर श्याम जोशी हिंदी लेखन की दुनिया में ऐसी शख्सियत में से थे जिनके बारे में कहा जा सकता है कि एक शख़्स आख़िर क्या-क्या हो सकता है. उपन्यासकार, व्यंग्यकार, प्रखर पत्रकार, धारावाहिक लेखक, फ़िल्म पटकथा लेखक, एक डबिंग आर्टिस्ट और भी बहुत कुछ. कह सकते हैं कि एक मनोहर श्याम जोशी में कई मनोहर श्याम जोशी थे, आप जिसे जानना चाहें अपनी रुचि के हिसाब से जान सकते हैं. आज की इस प्रस्तुति में उन्हें आप से थोड़ा...

जब प्रधानमंत्री मोदी ने कहा 'अमर सिंह सबकी हिस्ट्री शीट खोल देंगे' 03.08.2020

जिस समय अमर सिंह समाजवादी पार्टी से जुड़े थे तो सपा वैसी ग्लैमराइज़्ड पार्टी नहीं थी जैसी धीरे-धीरे होती चली गई. लोग कहते हैं, यह चमक धमक अमर सिंह की ही देन थी. धीरे-धीरे उनका क़द पार्टी में इतना बड़ा हो गया था कि वो जिस पर हाथ रख दें उसे मुलायम सिंह का ही निर्णय माना जाता. अमर सिंह से जब भी कोई सवाल पूछा जाता तो वो बेहद फ़िल्मी अंदाज़ में उसका जवाब देते या कोई शेर कह देते. यह उनका अपना अंदाज़ था, अपना त...

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