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Naami Giraami

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Naami Giraami is a Hindi podcast by Aaj Tak Radio on biographies of influential and powerful people. Audio packages on Stories and life journeys of famous personalities of India and around the world. Catch up with a new episode every Monday. नायक और खलनायक. विद्वान और महारथी. कला के ऐसे सितारे जो अब भी आसमान में चमकते हैं. और ऐसी हस्तियां जो इतिहास में अमर हैं. उजले व्यक्तित्व के धनी भी. और स्याह पहलुओं वाले लोग भी. ये वो लोग हैं जो मशहूर हैं. ये हैं, नामी गिरामी. सुनिए, हर सोमवार आज तक रेडियो पर.

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5. Mai 2025

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वो अरबपति कलाकार जो रोम की सड़कों पर फटेहाल घूमता था: नामी गिरामी, Ep 251 13.05.2024

मिकल एंजलो ने ऐसी मूर्तियां बनाईं जिसे देख लगता हैं, वो अब बोल उठेंगी, पोप ने पेंटिंग्स बनाने के लिए कहा तो पूरे छत पर न्यूड सब्जेक्ट्स बना दिए और जब मौका मिला वास्तुकला में हाथ आज़माने का तो रोम को सबसे ख़ूबसूरत बिल्डिंग बना कर दिया, हथौड़े की आवज़ा उसके दिल की धड़कनों से मेल खा चुकी थीं, पत्थर टूटने से निकलने वाली धूल उसके नसों में बैठ गई थी, आज 'नामी गिरामी' में सुनिए किस्सा दुनिया के सबसे महान...

बलराज साहनी के लिए मुंबई के मज़दूर अस्पताल के बाहर क्यों जमा हो गए थे?: नामी गिरामी, Ep 250 06.05.2024

इसे संयोग ही माना जाएगा कि दुनिया जिस तारीख को मज़दूर दिवस मनाती है, उसी तारीख यानी पहली मई 1913 को पंजाब के रावलपिंडी में बलराज साहनी का जन्म हुआ, उनकी फ़िल्मों में किरदार और कहानियां अक्सर आम लोगों के हुआ करते थे, उन्होंने ज़िंदगी में कभी एक्टिंग की ट्रेनिंग नहीं ली थी, उन्होंने ज़िंदगी को ही ऐसे जिया, जैसे कोई स्कूल हो, सुनिए 'नामी गिरामी' में बलराज साहनी की ज़िंदगी से जुड़े किस्से. प्रोड्यूसर-...

चुनाव आयोग को अपनी शक्तियां याद दिलाने वाले जामवंत थे टी एन शेषन: नामी गिरामी, Ep 249 29.04.2024

तिरुनेलै नारायण अइयर शेषन इन शॉर्ट टी एन शेषन, 12 दिसंबर, 1990 को भारत के 10वें चुनाव आयुक्त बने थे. इनके बाद 15 लोग और इस कुर्सी पर बैठ चुके हैं, लेकिन शेषन ने अपने कार्यकाल में जो किया उसकी वजह से चुनाव आयोग के इतिहास को बिफ़ोर शेषन और आफ़्टर शेषन के तौर पर याद किया जाता है, बतौर चुनाव आयुक्त शेषन ने क्या बदलाव किए, सुनिए 'नामी गिरामी' में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी के साथ. प्रोड्यूसर- कुंदन साउंड मिक...

फ़िल्मों का ग्रामर गढ़ने वाले बस्टर कीटन क्यों भुला दिए गए?: नामी गिरामी, Ep 248 22.04.2024

बस्टर कीटन का जन्म स्टेज पर हुआ, ये कहना ज़्यादा ग़लत नहीं होगा. जब वो तीन साल के थे तब से ही वो अपने मां-बाप के साथ स्टेज पर दिखने लगे थे. जब ठीक से बोलना चलना सीख लिया तो पिता के प्ले में किरदार भी निभाने लगे. चार्ली चैप्लिन के समकालिन बस्टर कीटन ने फ़िल्म बनाने का तरीका सिखाया, अपने स्टंट से सबको हंसाया लेकिन क्यों उन्हें आज चैप्लिन की तरह याद नहीं किया जाता, कैसे प्रोडक्शन हाउस ने उनके करियर क...

'अश्लील’ गाने गा कर भी चमकीला रिकॉर्ड कैसे तोड़ रहा था?: नामी गिरामी, Ep 247 15.04.2024

चमकीला जब स्टेज पर चढ़ता तब उसके रुआब को देखकर लोगों ने उसे पंजाब का एल्विस प्रेस्ली कहना शुरू कर दिया था. स्टेज पर जितना उसका अंदाज़ हिट था, मार्केट में उसके कैसेट सुपरहिट थे. एक तरफ उसके ऊपर अश्लील गीत लिखने और गाने के आरोप लगते थे, दूसरी ओर उसके रिकॉर्डिंग्स हाथों-हाथ बिक जाते थे, अमरजीत सिंह चमकीला की पूरी कहानी, सुनिए 'नामी गिरामी' में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. प्रोड्यूसर- कुंदन साउंड मिक्स- न...

फ़ोर्ड, जिसे हिटलर से मेडल मिला और गांधी से चरखा: नामी गिरामी, Ep 246 08.04.2024

जिस फ़ोर्ड कार कंपनी को हम आज जानते हैं, उसे बनाने से पहले हेनरी फ़ोर्ड ने तीन कार कंपनियां बनाईं. फोर्ड अमेरिका के हीरो थे. युद्ध विरोधी होने के बावजूद पहले और दूसरे विश्वयुद्ध में उन्होंने सेना की मदद में अपनी फ़ैक्ट्रियां खोल दीं. फोर्ड की तारीफ उस जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर तक ने की जो अमेरिका को दुश्मन मानता था और फ़ोर्ड ख़ुद महात्मा गांधी का फैन था, कार बनाने की दुनिया में क्रांति लाने वाले...

बॉलर बनने की चाहत रखने वाला मुख्तार अंसारी बाहुबली कैसे बना?: नामी गिरामी, Ep 246 01.04.2024

मुख़्तार अंसारी की कहानी कभी भी मुख़्तार अंसारी से नहीं शुरू की जा सकती, इसे संपूर्णता में समझने के लिए भारत की आज़ादी से पहले तक जाना होगा. अंसारी परिवार को ग़ाज़ीपुर का 'प्रथम राजनीतिक परिवार भी कहा जाता है. परिवार का रसूख़ पूरे गाज़ीपुर में था, मुख़्तार अंसारी ने इसकी चौहदी को और बढ़ाया, मुख़्तार अंसारी और उनके परिवार का राजनीतिक प्रभाव ग़ाज़ीपुर से लेकर मऊ, जौनपुर, बलिया और बनारस तक गया. कैसे...

कहानी बांग्‍लादेश में कत्‍लेआम कराने वाले पाकिस्तानी तानाशाह की: नामी गिरामी, Ep 245 26.03.2024

1971 भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा. पूर्वी पाकिस्तान आज़ाद हो गया और बांग्लादेश के रूप में एक नया देश बना. लेकिन इस युद्ध के दौरान पाकिस्तान आर्मी चीफ़ और राष्ट्रपति याहया खान पार्टी कर रहे थे. अपनी रंगीन-मिज़ाजी के लिए मशहूर याहया खान किन परिस्थितियों में वो पाकिस्तान के सत्ता के शीर्ष तक पहुंचे? बांग्‍लादेश में कत्‍लेआम करवाने वाले इस तानाशाह के ज़िंदगी से जुड़े सभी...

फिरोज़ गांधी और कमला नेहरू के पोस्टर इलाहाबाद में क्यों चिपकाए गए थे?: नामी गिरामी, Ep 244 18.03.2024

फिरोज़ गांधी जो कमला नेहरु के कहने पर कॉलेज की पढ़ाई छोड़ स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े और बाद में उनके दामाद भी बने और जब वो सासंद गए तो अपने ससुर और प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से तीखे सवाल पूछें और जब कांग्रेस ने केरल की राज्य सरकार को गिराया तो अपनी पत्नी इंदिरा को भी फ़ासिस्ट कहने से नहीं चूके, ‘नामी गिरामी’ में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से सुनिए उस गांधी की कहानी जिसे इतिहास और राजनीति में भुला...

बिशन सिंह बेदी जिसने एक सच बोल कर करोड़ों रुपये गंवा दिए: नामी गिरामी, Ep 243 11.03.2024

बिशन सिंह बेदी जब भी मैदान पर होते थे, उनकी पहचान क्रिकेट के आदर्श छात्र के रूप में होती थी. खेल के प्रति उनकी श्रद्धा अटूट थी, लेकिन वे अपने हक़ के लिए लड़ना भी जानते थे. जैसे लोग अमिताभ बच्चन को फ़िल्मों के 'एंग्री यंग मैन' के रूप में जानते थे, वैसे ही बेदी को क्रिकेट का 'एंग्री यंग मैन' कहा जाता था. 'सरदार ऑफ़ स्पिन' की ज़िंदगी के तमाम रंग जानने के लिए सुनिए 'नामी गिरामी' जमशेद क़मर सिद्दीकी के...

51 रुपये क्यों पंकज उधास को ज़िंदगी की सबसे बड़ी कमाई लगती थी?: नामी गिरामी, Ep 242 04.03.2024

मशहूर एक्टर राजकपूर एक बार काम के सिलसले में कहीं जा रहे थे, फ्लाइट के भीतर सीट पर बैठे-बैठे, टैक ऑफ़ होने के इंतज़ार में थे, तभी उन्हें अपनी सीट के पास से एक इंसान को गुज़रता देखा, राज कपूर साहब उसे जानते थे, उन्होंने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा, पंकज तुम अमर हो गए.. जी हां वो इंसान गायक पंकज उधास थे, गर्वित श्रीवास्तव से 'नामी गिरामी' में सुनिए उधास ज़िंदगी के ख़ास लम्हों की कहानी. प्रोड्यूस- कुंद...

अमीन सायानी सरकार की एक ग़लती से मशहूर हुए थे?: नामी गिरामी, Ep 241 26.02.2024

अमीन सायानी की आवाज़ को अपनी पहचान कैसे मिली, कैसे उन्होंने दशकों तक सुनने वालों के दिलों पर राज किया और ख़ुद रेडियो की पहचान बन गए, अमीन सायानी ने अपने पूरी जीवन में तकरीबन 54 हज़ार रेडियो प्रोग्राम्स को अपनी आवाज़ दी लगभग 19 हज़ार जिंगल्स भी उनके हिस्से आए. यहां तक कि बतौर रेडियो प्रेजेंटर वो कुछ फ़िल्मों में भी दिखे लेकिन कैसे सरकार के एक फ़ैसले ने उनकी ज़िंदगी बदल कर रख दी, सुनिए 'नामी गिरामी'...

हकीम अजमल खान को कैसे मिल गई हिंदू महासभा की अध्यक्षता?: नामी गिरामी, Ep 240 19.02.2024

कब्रों पर घास बहुत आम बात होती है.  लेकिन जब आम आदमी की हो.  ऐसे आदमी की कब्र की अनदेखी आप बर्दाश्त करेंगे जो स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा था? आज कहानी सुनिए हकीम अज़मल खान की जिनकी कब्र पर घास है लेकिन उनकी उपलब्धियों पर कोई टीका तक नहीं कर सकता 'नामी गिरामी' के इस एपिसोड में. प्रोड्यूसर: रोहित अनिल त्रिपाठी साउंड मिक्स: सचिन द्विवेदी

50 रुपये कम सैलरी लेने वाला डायरेक्टर जो अमिताभ को फ़िल्मों में लाया: नामी गिरामी, Ep 239 12.02.2024

ख़्वाजा अहमद अब्बास के बारे में अगर ये कहा जाए कि उन्होंने अपने पेशे से एक सेकेंडे के लिए भी बेइमानी नहीं की तो इसमें कुछ भी ग़लत नहीं होगा. उन्होंने जैसे लोग देखे वैसी कहानियां लिखी, जैसी कहानियां लिखी वैसी फ़िल्में बनाईं और बतौर मूवी क्रिटिक जैसी फ़िल्में देखी बिना किसी के प्रभाव में आए उसकी वैसी आलोचना लिखी, सुनिए 'नामी गिरामी' के इस एपिसोड में कहानी ख़्वाजा अहमद अब्बास के जीवन की. प्रड्यूस- कु...

खुशवंत सिंह ने नरगिस से क्यों कहा कि मैं लोगों से कहूँगा आप मेरे साथ सोई हैं?: नामी गिरामी, Ep 238 05.02.2024

हिन्दी फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री हुई हैं नरगिस. कई इंटरव्यूज में उन्होंने एक वाकये का जिक्र किया है. उन्होंने कहा कि उनके बेटे और ऐक्टर संजय दत्त उस वक्त हिमाचल प्रदेश के कसौली में लौरेंस स्कूल में पढ़ते थे. सुनील दत्त की अपनी व्यस्तता थी इसलिए उन्होंने अकेले जाने का निर्णय लिया. उस वक्त के एक मशहूर लेखक और पत्रकार वहीं रहते थे. नरगिस ने उनसे कहा कि क्या वो एक दिन के लिए उनके घर में रह सकती हैं. उ...

अशोक सिंघल को अटल बिहारी बाजपेई सरकार के खिलाफ अनशन क्यों करना पड़ा था?: नामी गिरामी, Ep 237 29.01.2024

विज्ञान पढ़ने वाला एक इंजीनियर लड़का कैसे बना राम मंदिर आंदोलन का मुख्य चेहरा, आरएसएस से विश्व हिन्दू परिषद तक का सफर तय करने वाले अशोक सिंघल का राम मंदिर बनवाने में क्या योगदान था, बाबरी विध्वंस के कितने जिम्मेदार थे सिंघल और अपने अंतिम दो दशकों में उनकी भारतीय जनता पार्टी से क्यों नहीं बन पाई? सुनिए ‘नामी गिरामी’ के इस एपिसोड में. साउंड मिक्स – सचिन द्विवेदी प्रोड्यूसर – रोहित अनिल त्रिपाठी

उस्ताद राशिद खान को संगीत की ट्रेनिंग से डर क्यों लगता था?: नामी गिरामी, Ep 236 22.01.2024

1968 की जुलाई में एक लड़का रामपुर-सहसवान गायकी घराने में जन्मा था. ये गायकी ग्वालियर घराने के काफी क़रीब मानी जाती है. चाचा दादा और यहां तक उसके नाना भी शास्त्रीय संगीत के उस्ताद लोग थे. लेकिन उस लड़के को गायकी पसन्द नहीं थी. रियाज़ उसे चिढ़ाता था. सात साल की उम्र में उसने अपनी मां को खो दिया. इस घटना ने उसके जीवन को ऐसा बदला कि संगीत के प्रति उस बच्चे की चिढ़ ना जाने कहां चली गई. चाचा के साथ मुम्बई आ ग...

मुनव्वर राना को अपनी ख़रीदी गाड़ी से क्यों नफ़रत हो गई थी?: नामी गिरामी, Ep 235 15.01.2024

एक शायर था. दुनिया उसे मां पर कहे शेरों से जानती थी. मुहाजिर उसके मुहाजिरनामा के शेर पढ़ कर खुश होते थे.  सरकारें उसे इनाम देती थीं. विवाद से उसका नाता भी था.  लेकिन आज के 8 बरस पहले उसने तय किया कि वो कोई सरकारी सम्मान या पुरस्कार नहीं लेगा.और ताज़िन्दगी उसने इसे फॉलो भी किया क्योंकि उसे लगता था कि हुकूमत और ये समाज कमज़ोरों के साथ ज्यादती कर रहे हैं. उर्दू का ये शायर हिंदी के काशीनाथ सिंह के साथ कं...

जमनालाल बजाज से अंग्रेजों ने क्यों मांगी थी मदद?: नामी गिरामी, Ep 234 08.01.2024

4 नवंबर 1889. सीकर के एक गांव काशी का बास में एक लड़का जन्मा था. बहुत ग़रीब परिवार था.लेकिन वो लड़का ग़रीबी में ही मर जाने को ही नहीं पैदा हुआ था.किस्मत उसके साथ थी. उसे एक बड़े कारोबारी सेठ बच्छराज ने गोद ले लिया. 1906 में उसने कारोबार सम्हाला. और तरक्की की वो सीढियां चढ़ीं कि आज उसकी कम्पनी ग़रीबों की मदद करने के बाद भी कॉरपोरेट दुनिया की उस ऊंचाई पर है जहां पर कोई भी कम्पनी पहुंचना चाहती होगी. या कई त...

प्रेमचंद की किताब अंग्रेजों ने क्यों जला दी थी?: नामी गिरामी, Ep 233 01.01.2024

हरिशंकर परसाई का एक लेख है. लेख क्या है तस्वीर है. एक लेखक के फ़टे जूतों के बारे में. लिखते हैं कि उसने कुरीतियों को इतनी बार जूते मारे की वो फट गए. उसने बेईमानी नहीं की इसलिए नए जूते भी नहीं ख़रीद सका. इस लेखक का नाम है: प्रेमचंद, नमक का दारोगा से लेकर निर्मला और गोदान जैसी उपन्यासों के लेखक मुंशी प्रेमचंद. सुनिए उनकी कहानी इस एपिसोड में. प्रोड्यूसर – रोहित अनिल त्रिपाठी साउंड मिक्स – सचिन द्विवेदी

अमृता की मोहब्बत ने इमरोज़ को कैसे बदला?: नामी गिरामी, Ep 232 25.12.2023

मशहूर लेखिका और शायर अमृता प्रीतम की एक किताब छपनी थी. उन्होंने एक आर्टिस्ट जिसका नाम सेठी था, अपनी किताब 'आख़िरी ख़त' का कवर डिज़ाइन करने को कहा. सेठी ने कहा कि वो एक ऐसे बंदे को जानते हैं जो ये काम उनसे बेहतर कर सकता है. अमृता ने कहा ठीक है उसे बुलाओ.सेठी के कहने पर अमृता ने उस शख्स को बुलवाया. शुरुआत में उस आर्टिस्ट ने साफ मना कर दिया. लेकिन अमृता ने रिक्वेस्ट कर उन्हें मनाया और फिर किताब आख़िरी...

प्रधानमंत्री ना बन पाने की कौन सी 3 वजहें गिनाते थे प्रणब मुखर्जी?: नामी गिरामी, Ep 231 18.12.2023

एक नेता था, जो सियासी हलकों में बहुत योग्य कहा जाता था. जिसके पास प्रधानमंत्री बनने के भी बहुत मौके आए, पर किस्मत ने उसका साथ कभी नहीं दिया. मंत्रालयों से काम चलाता रहा. लेकिन एक दिन देश का राष्ट्रपति बना. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो उनकी पार्टी के नहीं थे फिर भी उनके प्रति सम्मान ज़ाहिर करते रहे. इस नेता का नाम है प्रणब मुखर्जी. देश के पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न प्रणब मुखर्जी. सुनिए प्र...

जूनियर महमूद सुपरस्टार होने के बावजूद छोटे किरदार क्यों निभाते रहे?: नामी गिरामी, Ep 230 11.12.2023

नईम सय्यद कैसे बने जूनियर महमूद, 265 फिल्मों में ऐक्टिंग और दर्जनों मराठी फिल्मों में डायरेक्शन और प्रोडक्शन के बावजूद उनका करियर कहाँ अधूरा रह गया, राजेश खन्ना से उनकी क्या शिकायत रही और महमूद उनसे कैसे प्रभावित हुए कि अपना नाम तक दे दिया? सुनिए जूनियर महमूद की पूरी कहानी ‘नामी गिरामी’ के इस एपिसोड में. प्रोड्यूसर – रोहित अनिल त्रिपाठी साउंड मिक्स – कपिल देव सिंह

एक छतरी के कारण कैसे पकड़ा गया सीरियल किलर रमन राघव! :नामी गिरामी, Ep 229 04.12.2023

60 का वो दशक जब बंबई में गरीब, भिखारी, झुग्गियों में रहने वाले, फुटपाथ पर सोने वाले लोग एक-एक कर मारे जा रहे थे. कभी-भी, कहीं भी, कोई भी मार दिया जाता था. मरने वालों के बीच कहीं कोई संबंध नहीं होता था. सिर्फ दो बातों को छोड़कर- पहला, उन्हें मारने का वीभत्स तरीका और दूसरा, खुद मारने वाला. इन्हें मौत की नींद सुलाने वाले का नाम था रमन राघव. जिसे भारत का पहला सीरियल किलर कहा जाता है. इस बार के 'नामी गि...

निर्मला नागपाल से डांस क्वीन कैसे बनी सरोज खान?: नामी गिरामी, Ep 228 27.11.2023

फिल्म इंडस्ट्री की मास्टरजी कही जाने वाली सरोज खान ने कई अभिनेत्रियां चाहे वो साधना हो, माधुरी हो, श्रीदेवी हो या ऐश्वर्या सबको डांस की कला में पारंगत बनाया है. लेकिन उनके बेस्ट कोरियोग्राफर बनने का सफर कहां से शुरू होता है, क्यों सरोज खान अपने जैसी एक ही थीं? सुनिए 'नामी गिरामी' में नितिन ठाकुर के साथ. प्रड्यूसर: ख़ुशबू कुमार साउंड मिक्सिंग: कपिल देव सिंह

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