Vedanta Ashram

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Pravachans / Moral-Stories / Chantings / Bhajans - by Mahatmas of Vedanta Ashram, Indore

Forfatter

Vedanta Ashram

Kategori

Religion

Podcastens hjemmeside

www.vmission.org.in

Seneste episode

17. mar. 2024

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Episoder

साधना पञ्चकं : प्रवचन-09 (सूत्र-8) 30.08.2022

साधना पञ्चकं ज्ञान यज्ञ के ९वें प्रवचन में पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ग्रन्थ में प्रतिपादित आठवें सोपान एवं सूत्र पर प्रकाश डाला। इसमें शंकराचार्यजी कहते हैं की " निजगृहात तूर्णं विनिर्गमयताम " - अर्थात अपने घर से शीघ्र बाहर निकलो। जीवन के प्रारंभिक चरणों में हम लोगों का घर अत्यंत आवश्यक होता है। यहीं पर हम सबका विकास प्रारम्भ होता है। शरीर की स्वस्थता, शिक्षा का प्रारम्भ, संस्कारो...

साधना पञ्चकं : प्रवचन-08 (सूत्र-7) 29.08.2022

साधना पञ्चकं ज्ञान यज्ञ के ८वें प्रवचन में पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ग्रन्थ में प्रतिपादित सातवें सोपान एवं सूत्र पर प्रकाश डाला। इस पर चर्चा से पूर्व उन्होंने पिछले सूत्र के महत्त्व पर पुनः बहुत जोर दिया, और कहा की भाव-सुख के प्रति द्वेष उत्पन्न करना यहाँ आपेक्षित नहीं है, बल्कि प्रयोजन यह है कि हम बाहरी दुनियां के प्रति उचित और प्रामाणिक दृष्टी उत्पन्न कर बाहरी सुख-दुःख के प्रति...

साधना पञ्चकं : प्रवचन-07 (सूत्र-6) 28.08.2022

साधना पञ्चकं ज्ञान यज्ञ के ७वें प्रवचन में पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ग्रन्थ में प्रतिपादित छठे सोपान एवं सूत्र पर प्रकाश डाला। इसमें शंकराचार्यजी कहते हैं की “भवसुखे दोषोनुसन्धीयताम" , अर्थात, संसारी सुखों में विचार और प्रमाण पूर्वक दोष देखो, बाहरी विषयों में दोष का अनुसन्धान करो। अंतर्मुखता की प्राप्ति का यह सबसे बड़ा कदम होता है। जो व्यक्ति अपने से बाहर दुनियां में सुख की धारणा र...

साधना पञ्चकं : प्रवचन-06 (सूत्र-5) 27.08.2022

साधना पञ्चकं ज्ञान यज्ञ के ६ठे प्रवचन में पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ग्रन्थ में प्रतिपादित पांचवे सोपान एवं सूत्र पर प्रकाश डाला। इसमें शंकराचार्यजी कहते हैं की “ पापौघः परिधूयतां " - अर्थात पाप के समूह को पूरी तरह से धो डालो। प्रत्येक जीवा का जन्म अज्ञान के कारण होता है, इसलिए बहार से देखा-देखी से गलत धारणाएं ही हम सब में घर कर जाती हैं, और मोहात्मक धारणाओं से प्रेरित विचार और कर्...

दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 18 27.08.2022

प्रवचन-10b : शिविर के अंतिम (पाँचवे) दिन के अंतिम (सायं काल) प्रवचन के दूसरे भाग में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ‘दृग-दृश्य विवेक’ ग्रंथ के 31वें श्लोक तक की व्याख्या कर ग्रन्थ का समापन किया।

साधना पञ्चकं : प्रवचन-05 (सूत्र-4) 26.08.2022

साधना पञ्चकं ज्ञान यज्ञ के ५वें प्रवचन में पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ग्रन्थ में प्रतिपादित चौथे सोपान एवं सूत्र पर प्रकाश डाला। इसमें शंकराचार्यजी कहते हैं की "काम्ये मतिः त्यज्यताम" अर्थात - कामना की मति को त्यागो। इस सूत्र की भूमिका बनाते हुए पू स्वामीजी ने कहा कि - किसी भी सत्कार्य को करने में जो बाधाएं आती हैं, जिनके वजह से हम असमर्थ से दिखते हुए गलत दिशा में प्रवाहित होते चले...

दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 17 26.08.2022

प्रवचन-10a : वेदान्त शिविर के अंतिम (पाँचवे) दिन के अंतिम (सायं काल) प्रवचन के पहले भाग में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ‘दृग-दृश्य विवेक’ ग्रंथ के 25वें श्लोक तक की व्याख्या करी।

साधना पञ्चकं : प्रवचन-04 (सूत्र-3) 25.08.2022

साधना पञ्चकं ज्ञान यज्ञ के चौथे प्रवचन में पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ग्रन्थ में प्रतिपादित तीसरे सूत्र पर प्रकाश डाला। इसमें आचार्यश्री कहते हैं की "तेनेशस्य विधीयताम अपचितिः" अर्थात - उसके द्वारा ईश्वर की पूजा संपन्न करो। उसके अर्थात अपने द्वारा अनुष्ठित सभी वेदोक्त कर्मों के द्वारा (जिसका पिछले सूत्र में विधान किया गया था) ईश्वर की पूजा करें। यहाँ यह दर्शनीय है कि हमारे सभी कर्म...

दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 16 25.08.2022

प्रवचन-9 : वेदान्त शिविर के पाँचवे दिन के प्रातःकाल के प्रवचन में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ‘दृग-दृश्य विवेक’ ग्रंथ के 23वें श्लोक तक की व्याख्या करी।

साधना पञ्चकं : प्रवचन-03 (सूत्र-2) 24.08.2022

साधना पञ्चकं ज्ञान यज्ञ के तीसरे प्रवचन में पू.स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ग्रन्थ में प्रतिपादित दूसरे सूत्र की चर्चा करी। इसमें आचार्यश्री कहते हैं की "तदुदितं कर्म स्वनुष्ठीयतां " अर्थात - वेदों में प्रतिपादित कर्मों का बहुत ही सुंदरता से अनुष्ठान करें। यहाँ सनातन धर्म का दर्शन एवं परम्पराएं स्पष्ट होती हैं, की यद्यपि हमें मूल रूप से अपने अंदर जगना है लेकिन तब भी समस्त बाहर के कर्म बहुत...

दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 15 24.08.2022

प्रवचन-8b : शिविर के चौथे दिन के सायं काल के प्रवचन के दूसरे भाग में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ‘दृग-दृश्य विवेक’ ग्रंथ के 20वें श्लोक तक की व्याख्या करी।

साधना पञ्चकं : प्रवचन-02 (सूत्र-1) 23.08.2022

साधना पञ्चकं प्रवचन माला के दूसरे दिन स्वामी आत्मानन्दजी महाराज ने ग्रंथ में प्रवेश किया, और श्लोक पाठ के बाद पहले सूत्र पर विशद प्रकाश डाला। उन्होंने बताया की अध्यात्म यात्रा का श्रीगणेश वेदों के प्रति श्रद्धा उत्पन्न कर अपने मन और इंद्रियों को समन्वित एवं जागृत करने से होता है। इसके लिए नियमित रूप से वेद का पाठ एक सरल और सुन्दर तरीका है। यहाँ अधीयतां शब्द का अर्थ ज्ञान की सीधे प्राप्ति नहीं है,...

दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 14 23.08.2022

प्रवचन-14 (8a) : शिविर के चौथे दिन के सायं काल के प्रवचन के पहले भाग में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ‘दृग-दृश्य विवेक’ ग्रंथ के 19वें श्लोक की आगे व्याख्या करी।

प्रेरक कहानियाँ : नज़रिआ (0822-03-sp) 23.08.2022

पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - नज़रिआ।

साधना पञ्चकं : प्रवचन-01 (भूमिका) 22.08.2022

साधना पञ्चकं प्रवचन माला का श्रीगणेश करते हुए वेदान्त आश्रम, इंदौर के प.पू. स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने "साधना पञ्चकं" नामक ग्रन्थ का अपनी अत्यंत प्रसन्न एवं गंभीर शैली में परिचय दिया। इसके अधिकारी, विषय, प्रयोजन एवं ग्रन्थ की भूमिका बताई। उन्होंने यह भी बताया की ‘साधना’ शब्द सापेक्ष्य होता है, अर्थात किसी भी साधक को सर्वप्रथम अपने साध्य की अति स्पष्टता एवं उसके प्रति अथाह प्रेम होना अनिव...

दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 13 22.08.2022

प्रवचन-13 (7b): शिविर के चौथे दिन के प्रातःकाल के प्रवचन के दूसरे भाग में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ‘दृग-दृश्य विवेक’ ग्रंथ के 19वें श्लोक तक की व्याख्या करी।

दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 12 20.08.2022

प्रवचन-7a : इस, शिविर के तीसरे दिन के प्रातःकाल के प्रवचन के पहला भाग में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ‘दृग-दृश्य विवेक’ ग्रंथ के 17वें श्लोक तक की व्याख्या करी।

दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 11 19.08.2022

प्रवचन-6b : इस, शिविर के दूसरे दिन के दूसरे प्रवचन के दूसरे भाग में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ‘दृग-दृश्य विवेक’ ग्रंथ के 15वें श्लोक की व्याख्या करी।

दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 10 18.08.2022

छठा प्रवचन-1 : शिविर के दूसरे दिन के दूसरे प्रवचन में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने दृग-दृश्य विवेक ग्रंथ के १4वें श्लोक की व्याख्या करी।

दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 09 17.08.2022

पाँचवा प्रवचन-2 : शिविर के दूसरे दिन के दूसरे प्रवचन में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने दृग-दृश्य विवेक ग्रंथ के १३वें श्लोक की व्याख्या करी।

दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 08 16.08.2022

पाँचवा प्रवचन-1 : शिविर के दूसरे दिन के दूसरे प्रवचन में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने दृग-दृश्य विवेक ग्रंथ के ११वें से १२वें श्लोकों की व्याख्या करी।

प्रेरक कहानियाँ : महाभारत युद्ध का भोजन प्रबंधन (0822-02-sp) 16.08.2022

पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - महाभारत युद्ध का भोजन प्रबंधन।

दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 07 (4) 15.08.2022

चौथा प्रवचन : शिविर के दूसरे दिन के दूसरे प्रवचन में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने दृग-दृश्य विवेक ग्रंथ के १०वें से १३वें श्लोकों की व्याख्या करी।

दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 06 (3b) 13.08.2022

तीसरे प्रवचन का दूसरा भाग : इस, शिविर के दूसरे दिन के पहले प्रवचन के दूसरे भाग में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने दृग-दृश्य विवेक ग्रंथ के 9वें श्लोक की व्याख्या करी।

दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 05 (3a) 12.08.2022

तीसरे प्रवचन का पहला भाग : इस, शिविर के दूसरे दिन के पहले प्रवचन के पहले भाग में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने दृग-दृश्य विवेक ग्रंथ के 8वें श्लोक की व्याख्या करी।

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