Vedanta Ashram
Vedanta Ashram Podcasts
Pravachans / Moral-Stories / Chantings / Bhajans - by Mahatmas of Vedanta Ashram, Indore
Forfatter
Vedanta Ashram
Kategori
Podcastens hjemmeside
Seneste episode
17. mar. 2024
Hvor kan du lytte?
Podcasts i appen Replaio Radio Kommer snartPodcasts kommer snart til appen. Installer nu, og vær den første til at se en helt ny tilgang til podcasts
Episoder
प्रेरक कहानियाँ : धन का लोभ (1222-03-sp) 24.12.2022 4:23
पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - धन का लोभ।
प्रेरक कहानियाँ : कर्म फल (1222-02-sp) 18.12.2022 5:14
पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - कर्म फल।
प्रेरक कहानियाँ : कर्म फल (1222-02-sp) 14.12.2022 4:58
पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - कर्म फल।
प्रेरक कहानियाँ : हरि हरेश्वर की लीला (1222-01-sp) 06.12.2022 7:54
पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - हरि हरेश्वर की लीला।
प्रेरक कहानियाँ : भगवान की कृपा (1122-05-sp) 30.11.2022 6:41
पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - भगवान की कृपा।
प्रेरक कहानियाँ : भरत बाण (1122-04-sp) 22.11.2022 5:36
पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - भरत बाण।
प्रेरक कहानियाँ : ईश्वर की निकटता (1122-03-sp) 15.11.2022 6:39
पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - ईश्वर की निकटता।
प्रेरक कहानियाँ : कर्ण की उदारता (1122-02-sp) 08.11.2022 5:05
पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - कर्ण की उदारता।
प्रेरक कहानियाँ : प्रशंसा और निंदा (1122-01-sp) 01.11.2022 4:14
पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - प्रशंसा और निंदा।
प्रेरक कहानियाँ : समर्पण (1022-04-sp) 25.10.2022 7:49
पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - समर्पण।
प्रेरक कहानियाँ : अलौकिक सुंदरता (1022-03-sp) 19.10.2022 4:39
पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - अलौकिक सुंदरता।
प्रेरक कहानियाँ : कठोर दंड (1022-02-sp) 11.10.2022 5:09
पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - कठोर दंड।
प्रेरक कहानियाँ : ईमानदारी (1022-01-sp) 05.10.2022 6:03
पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - ईमानदारी।
साधना पञ्चकं : प्रवचन-41 (सूत्र-40) 01.10.2022 1:07:13
साधना पञ्चकं ज्ञान यज्ञ के 41वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने साधना पञ्चकं ग्रन्थ के अंतिम सोपान अर्थात 40वें सूत्र की भूमिका एवं रहस्य पर विशद चर्चा करी। इसमें आचार्यश्री कहते हैं की " अथ परब्रह्म-आत्मना स्थीयतां " - अर्थात, अपने को ब्रम्ह जानते हुए स्थित रहो। इस सूत्र में पू. स्वामीजी ने बताया कि अंत में इस ब्रह्मवित अर्थात ब्रह्म-ज्ञानी को अब ब्रह्म मात्र होकर स्थित रहना चाहिए...
साधना पञ्चकं : प्रवचन-40 (सूत्र-39) 30.09.2022 1:02:23
साधना पञ्चकं ज्ञान यज्ञ के 40वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने 39वें सोपान की भूमिका एवं रहस्य पर प्रकाश डाला। इसमें भगवान् शंकराचार्यजी कहते हैं की " प्रारब्धं तु इह भुज्यतां " - अर्थात, अपने प्रारब्ध कर्म का यहीं भोग कर उनका क्षय करो। संचित एवं आगामी कर्मों की चर्चा करने के बाद अब आचार्यश्री प्रारब्ध कर्मों की बात करते हैं। प्रारब्ध कर्म धनुष से निकले हुए तीर के सामान हैं जो की...
साधना पञ्चकं : प्रवचन-39 (सूत्र-38) 29.09.2022 59:51
साधना पञ्चकं ज्ञान यज्ञ के 39वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने 38वें सोपान की भूमिका एवं रहस्य पर प्रकाश डाला। इसमें भगवान् शंकराचार्यजी कहते हैं की " चितिबलात नाप्युत्तरैः शिलिष्यतां " - अर्थात, विवेक से आगामी उतार-चढ़ाओ से लिप्त न होना। जब हम कर्ता और भोक्तापने से मुक्त हो जाते हैं तभी जीव-भाव समाप्त हो जाता है, और जब जीव भाव समाप्त हो जाता है तो उसके द्वारा अर्जित सभी प्रकार के...
साधना पञ्चकं : प्रवचन-38 (सूत्र-37) 28.09.2022 1:00:55
साधना पञ्चकं ज्ञान यज्ञ के 38वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने 37वें सोपान की भूमिका एवं रहस्य पर प्रकाश डाला। इसमें भगवान् शंकराचार्यजी कहते हैं की " प्राक कर्म प्रविलाप्यतां " - अर्थात, संचित कर्मों को समाप्त करें। जीव-भाव के धरातल पर रहते हुए हम लोग कर्म के दायरे में ही रहते हैं। जो मिलता है वो कर्म से ही मिलता है, अतः हम सब अपना भविष्य बनाने में समर्थ होते हैं। प्रत्येक जन्म म...
प्रेरक कहानियाँ : हनुमान जी और भीम (0922-04-sp) 27.09.2022 9:18
पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - हनुमान जी और भीम।
साधना पञ्चकं : प्रवचन-37 (सूत्र-36) 27.09.2022 1:00:17
साधना पञ्चकं ज्ञान यज्ञ के 37वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने 36वें सोपान की भूमिका एवं रहस्य पर प्रकाश डाला। इसमें भगवान् शंकराचार्यजी कहते हैं की " जगदिदं तदबाधितं दृश्यतां " - अर्थात, इस दृष्ट जगत को बाधित होते हुए देखो। इससे पहले पिछले सोपान में अपनी पूर्ण-आत्मा को अत्यंत स्पष्टता से अपरोक्षतः देखने की बात कही थी। अब कह रहे हैं, की इसी ज्ञान के फलस्वरुप अपने से पृथक पूरे जगत...
साधना पञ्चकं : प्रवचन-36 (सूत्र-35) 26.09.2022 58:59
साधना पञ्चकं ज्ञान यज्ञ के 36वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने 35वें सोपान की भूमिका एवं रहस्य पर प्रकाश डाला। इसमें भगवान् शंकराचार्यजी कहते हैं की " पूर्णात्मा सुसमीक्ष्यतां " - अर्थात, अपनी पूर्ण-आत्मा का अत्यंत स्पष्टता से अपरोक्ष साक्षात्कार करें। अपने को पूर्ण-आत्मा देखना ही ईश्वर से ऐैक्य देखना होता है। यह ही मोक्ष होता है। यह ही जीवन का साफल्य होता है। जो अपनी आत्मा को पूर...
साधना पञ्चकं : प्रवचन-35 (सूत्र-34) 25.09.2022 1:10:21
साधना पञ्चकं ज्ञान यज्ञ के 35वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने 34वें सोपान की भूमिका एवं रहस्य पर प्रकाश डाला। इसमें भगवान् शंकराचार्यजी कहते हैं की " परतरे चेतः समाधीयताम " - अर्थात, जो सबसे परे है उसमे अपने चित्त को समाहित करो। इस प्रवचन में पू गुरूजी ने एकान्त शब्द के विविध अर्थ बताए और उसके बाद 'पर' शब्द का भी आशय बताया। जो सबको व्याप्त करते हुए सबको आत्मवान करता है लेकिन फिर...
साधना पञ्चकं : प्रवचन-34 (सूत्र-33) 24.09.2022 1:03:29
साधना पञ्चकं ज्ञान यज्ञ के 34वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ग्रन्थ के अंतिम श्लोक में प्रवेश करते हुए 33वें सोपान की भूमिका एवं रहस्य पर प्रकाश डाला। इसमें भगवान् शंकराचार्यजी कहते हैं की " एकान्ते सुखमास्यतां " - अर्थात, एकान्त में सुख पूर्वक बैठें। आत्मा को ब्रह्म जानने की साधना के अगले सोपान में इस ब्रह्म-ज्ञान के साधक को अब बताया जा रहा है की अब उसे समाधी का अभ्यास करना चाह...
साधना पञ्चकं : प्रवचन-33 (सूत्र-32) 23.09.2022 1:06:40
साधना पञ्चकं ज्ञान यज्ञ के 33वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ग्रन्थ के चौथे श्लोक में प्रतिपादित अंतिम सूत्र एवं ग्रन्थ के 32वें सोपान की भूमिका एवं रहस्य पर प्रकाश डाला। इसमें भगवान् शंकराचार्यजी कहते हैं की " जनकृपा नैष्ठुर्यम उत्सृज्यतां " - अर्थात, किसी व्यक्ति की ऐहसान के भाव से दी गई सेवा को कठोरता से अस्वीकार देना चाहिए। जिस व्यक्ति ने अपने जीवन में जो कुछ भी प्राप्त किया...
साधना पञ्चकं : प्रवचन-32 (सूत्र-31) 22.09.2022 1:06:37
साधना पञ्चकं ज्ञान यज्ञ के 32वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ग्रन्थ के 31वें सोपान की भूमिका एवं रहस्य पर प्रकाश डाला। इसमें भगवान् शंकराचार्यजी कहते हैं की " औदासिन्यम अभीप्स्यतां " - अर्थात, सैदव तटस्थता बनाए रखें। व्यावहारिक जगत में प्रत्येक व्यक्ति अपनी-अपनी समझ से जीता है और अनेकानेक प्रयोग करता रहता है। इनसे व्यक्ति की जरुरतें पूरी होती रहतीं हैं और साथ साथ ये शिक्षा भी प्...
साधना पञ्चकं : प्रवचन-31 (सूत्र-30) 21.09.2022 1:03:57
साधना पञ्चकं ज्ञान यज्ञ के 31वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ग्रन्थ के 30वें सोपान की भूमिका एवं रहस्य पर प्रकाश डाला। इसमें भगवान् शंकराचार्यजी कहते हैं की " न तु वृथा वाक्यं समुच्चार्यतां " - अर्थात, निष्प्रयोजन वाक्य कभी मत बोलो। हम लोगों की वाणी बहुत शक्तिशाली होती है, उसको सदैव सोच-समझ के ही प्रयोग करना चाहिए। जब हमारे वचन की सही में आवश्यकता हो तभी नाप-तौल के और प्रेम से अ...
Lignende podcasts
Replaio er ikke podcastudgiver; programmernes navne, coverbilleder og lyd tilhører deres ophavsmænd og distribueres via offentlige RSS-feeds.