Aaj Tak Radio

Storybox with Jamshed Qamar Siddiqui

जमशेद क़मर सिद्दीकी के साथ चलिए कहानियों की उन सजीली गलियों में जहां हर नुक्कड़ पर एक नया किरदार है, नए क़िस्से, नए एहसास के साथ. ये कहानियां आपको कभी हसाएंगी, कभी रुलाएंगी और कभी गुदगुदाएंगी भी. चलिए, गुज़रे वक्त की यादों को कहानियों में फिर जीते हैं, नए की तरफ बढ़ते हुए पुराने को समेटते हैं. सुनते हैं ज़िंदगी के चटख रंगों में रंगी, इंसानी रिश्तों के नर्म और नुकीले एहसास की कहानियां, हर इतवार, स्टोरीबॉक्स में. Jamshed Qamar Siddiqui narrates the stories of human relationships every week that take the listener on the rollercoaster of emotions, love, and laughter. Stories are written by Jamshed...

Forfatter

Aaj Tak Radio

Kategori

Fiction

Podcastens hjemmeside

www.aajtak.in

Seneste episode

11. jul. 2026

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Episoder

त्रास : कहानी दिल्ली की एक सड़क की | स्टोरीबॉक्स | EP 52 03.09.2023

मेरी कार से उस साइकिल सवार की टक्कर हो गयी थी। ग़लती तो मेरी ही थी लेकिन दिल्ली की सड़क पर एक्सीडेंट के बाद बचाव का तरीका यही है कि गुस्सा करते हुए बाहर निकलो, ताकि लगे ग़लती दूसरे की है - सुनिए भीष्म साहनी की कहानी 'त्रास' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.

सांवली सी एक लड़की | स्टोरीबॉक्स | EP 51 27.08.2023

लड़के वाले आ चुके थे। बगल वाले कमरे से उनकी बातचीत की आवाज़ सुनाई दे रही थी। मां ने मुझे उस दिन बैंगनी साड़ी पहनाई थी क्योंकि उन्हें लगता था कि उसमें मेरा रंग कम सांवला लगता है। कमरे में ले जाते हुए मम्मी ने मेरे कंधों को ऐसे थामा जैसे मैं हमेशा सहारे से चलती हूं। कमरे में दाखिल होती ही तमाम नज़रें मुझ पर घिर गयीं जैसे किसी बाज़ार में सामान पर गड़ जाती हैं। मेरे चेहरे को, मेरे रंग को नज़रें तौलने...

दूसरी शादी | स्टोरीबॉक्स | EP 50 20.08.2023

पूरे घर को बदल दिया गया था। पापा ने मेज़ पर बिछे मेज़पोश से लेकर पर्दे तक, सब नए मंगवाए थे। दीवारों पर लगी धुंधली तस्वीरों को साफ किया। चाय के लिए पड़ोस से मंहगा वाला टी सेट मांग कर लाए। शहर की सबसे अच्छी बेकरी शॉप से बिस्किट और नमकीन खरीदे। घर की कालीनें बालकनी से लटका कर तीन बार झाड़ी गयी थीं। आने वाले खास मेहमानों को घर बिल्कुल नया लग रहा था पर वो नहीं जानते थे कि उसे मकान के एक कमरे में कुछ पु...

चुन्ने ख़ान का जिन्न | स्टोरीबॉक्स | EP 49 13.08.2023

मस्जिद की दीवार से लगी हुई बैटरी रिपेयर की दुकान चलाने वाले चुन्ने खान को पता चला कि एक लड़की पर आ गया है किर्गिस्तान का जिन्न और उस जिन को उतारने के लिए बुलाया गया है उनके दुश्मन हसीन अहमद को। अब क्या करेंगे चुन्ने खान... सुनिए स्टोरीबॉक्स में नई कहानी 'चुन्नू खान का जिन्न' जमशेद कमर सिद्दीक़ी से.

नीली जुराबें | स्टोरीबॉक्स | EP 48 06.08.2023

पाखी की उम्र बारह साल थी। उसकी ज़िंदगी के रंग अभी कच्चे थे। वो रात के वक्त छत पर लेटे हुए चुंधियाई आंखों से आसमान की तरफ चमकते तारों को हैरानी से देखती थी और सोचती थी इन्हीं तारों के बीच से उसकी मां उसे देख रही होंगी। वही मां जिन्होंने अपनी ज़िंदगी के आखिरी दिनों में उसके लिए नीली जुराबें बनाई थीं - सुनिए 'नीली जुराबें' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.

दो ख़त | स्टोरीबॉक्स | EP 47 30.07.2023

वो कहते हैं कि प्रेम पत्रों का ज़माना चला गया, अब आजकल तो इधर मैसेज टाइप किया उधर भेज दिया। लेकिन सूचना की इस आंधी में प्रेम पत्र फिर भी प्रेम पत्र ही रहेंगे क्योंकि भेजे हुए सेंदेश पढ़ कर ऊपर सरक जाते हैं लेकिन प्रेम पत्र कई कई बार पढ़ा जाता है। सुनिए हिंद पॉकेट बुक्स की किताब 'यारेख' से चुने हुए दो ख़त, जिन्हें लिखा है कवि आलोक धन्वा और आकांक्षा पारे काशिव ने 'स्टोरीबॉक्स' में जमशेद क़मर सिद्दीक...

शकूर भाई नहीं रहे | कॉमेडी | स्टोरीबॉक्स | EP 46 23.07.2023

शकूर भाई हमारे पड़ोसी, बहुत नेक आदमी थे। शहर में बर्फ के तीन कारखाने थे। निहायत शरीफ आदमी लेकिन एक सुबह अचानक ख़बर आई कि नहीं रहे। हम भी पहुंच गए उनके परिवार की मातमपुर्सी करने लेकिन ये फैसला हमारी ज़िंदगी का सबसे बुरा फैसला साबित हुआ। सुनिए स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से, कहानी 'शकूर भाई नहीं रहे'.

हम रहे न हम | स्टोरीबॉक्स | EP 45 16.07.2023

गर्वित और वैष्णवी की शादी को दो साल भी नहीं हुए थे कि वैष्णवी को न जाने क्यों लगने लगा कि गर्वित उसे अब उस तरह नहीं चाहता जैसे शादी के पहले चाहता था। क्या हर रिश्ते का अंजाम यही होता है? क्यों वक्त की धूप में इश्क़ के चटक रंग खुरदुरे हो जाते हैं? मिस्र जाने की ख्वाहिश पाले वैष्णवी के सपने क्या पूरे हो पाएंगे? सुनिए कहानी - 'हम रहे न हम' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.

तुम्हें शायद न याद हो | स्टोरीबॉक्स | EP 44 09.07.2023

तो.. तुम्हारी बीवी कैसी है?" ज़ेहरा ने शादमान ने पूछा तो उसने उसे सच नहीं बताया कि उसकी पत्नी की मौत हो चुकी है, बस इतनी ही कहा, "ठीक है वो... तुम बताओ तुम्हारे शौहर कैसे हैं?" ज़ेहरा भी शादमान को ये बताकर उदास नहीं करना चाहती थी कि उसके शौहर से उसकी तलाक हो चुकी है। बोला, "ठीक हैं वो" पंद्रह साल बाद मिले शादमान और ज़ेहरा अपने अपने हिस्से का झूठ छुपाए एक दूसरी की नम आंखों में देखते हुए मुस्कुरा रह...

बड़े भाई साहब | मुंशी प्रेमचंद | स्टोरीबॉक्स | EP 43 02.07.2023

मेरे बड़े भाई साहब उम्र में मुझसे पांच साल बड़े थे लेकिन सिर्फ तीन क्लास आगे थे। वो दिन भर पढ़ते रहते थे और कहीं मुझे सड़क पर लड़कों के साथ खेलते देख लिया तो डांट लगाते थे। कहते "इन बाज़ारी लड़कों के साथ खेलते हुए शर्म नहीं आती तुम्हें? मुझे देखो मैं कितना पढ़ता हूं, मुझसे कुछ सीखते क्यों नहीं तुम?" कई बार तो ये भी कह चुके थे कि अगर पढ़ाई में मन नहीं लगता तो वापस चले जाओ, क्यों पैसे ख़राब करते हो?...

फैंसी हेयर कटिंग सलून | स्टोरीबॉक्स | EP 42 25.06.2023

चार बाल काटने वाले हजाम मिलकर एक हेयर कटिंग सलून चलाते थे। दुकान बढ़िया चलती थी। कस्टरमर्स की भीड़ लगी रहती थी। एक शख्स उनकी दुकान पर एक शख्स आया। कपड़े मैले, बाल बिखरे हुए। बोला, "मुझे बस थोड़ी सी जगह दे दीजिए, यहीं पड़ा रहूंगा और दुकान को झाड़ पोंछ दिया करूंगा। मैं खाना भी बना लेता हूं। मुझे पैसा नहीं चाहिए" उन लोगों ने उसे काम पर रख लिया पर धीरे-धीरे वक्त बदला और एक रोज़ ऐसा भी आया कि उस बूढ़े...

आलाँ का इश्क़ | स्टोरीबॉक्स | EP 41 18.06.2023

आलाँ गरीब थी, उसके वालिद गाँव में जूता बनाते-बनाते मर गए थे। अब कोई नहीं था जो उसके सर पर हाथ रखता। पर वो खूबसूरत थी। लोगों के घरों में छोटे-मोटे काम करती थी। वो रात जिसकी अगली सुबह मुझे वापस निकलना था। उसने मुझे एक कुर्ता दिया, जो उसने अपनी मेहनत की कमाई से मेरे लिए बनाया था। बोली, "आपके कुर्ते का आखिरी बटन टाकना था। इस कुर्ते के लिए आपके बैग में जगह तो होगी न?" मैं उसे देखता रहा। मैंने झुंझलाते...

एक तवायफ़ का ख़त | स्टोरीबॉक्स | EP 40 11.06.2023

मैं बम्बई के फ़ारस रोड की एक तवायफ़ हूं। मैंने एक हिंदू और एक मुस्लिम लड़की को खरीदा है जो मेरे साथ मेरी ही कोठरी में रहती हैं। मैं उनके लिए ये खत नेहरू और जिन्ना को लिख रही हूं" - सुनिए कृष्ण चंदर की लिखी कहानी 'एक तवायफ़ का ख़त' 'स्टोरीबॉक्स' में जमशेद कमर सिद्दीक़ी से.

मिट्ठू-बेटे | स्टोरीबॉक्स | EP 39 04.06.2023

"बेगम अपने मिट्ठू बेटे को दिन रात सबक रटाया करती थीं लेकिन वो ज़हन से कुछ गधे मालूम होते थे, कुछ न सीख सके। बल्कि सुनते-सुनते मुझे याद हो गया। एक रात बिल्ली ने पिंजड़े को गिराया और मिट्टू मियां को मुंह में दबा लिया। वो चीखे तो मैं और बेगम डंडा लेकर भागे। बिल्ली ने उन्हें छोड़ तो दिया पर लगा कि आज मिट्ठू मियां गए काम से लेकिन तभी क्या देखते हैं कि मिट्टू पंख झाड़कर खड़े हो गए।" सुनिए शौकत थानवी की...

मैं एक पति हूं | स्टोरीबॉक्स | EP 38 28.05.2023

ट्रेन खिसकना शुरु हो गयी थी। मेरी बीवी रौशन आरा ने कहा, "अपना ख्याल रखिएगा, फोन करते रहिएगा" मैंने कहा "हां" मेरा मन भारी हो रहा था। ट्रेन ने रफ्तार पकड़ ली हमने एक दूसरे की आंखों में देखा और फिर वो धड़धड़ाती ट्रेन में चली गयी। मैं भारी कदमों से स्टेशन के बाहर आया घर की तरफ चलने लगा पर तभी अंदर से एक आवाज़ आई। जब कहीं भी जा सकते हैं तो घर ही क्यों जाएं, एक शैतानी मुस्कुराहट चेहरे पर चमक रही थी। सु...

चचाजान का कुत्ता सीज़र | स्टोरीबॉक्स | EP 37 21.05.2023

उनके सीज़र से इतना प्यार था कि अगर कोई दौड़ा-दौड़ा उनके घर आए और कहे कि फायर ब्रिगेड को फोन करना है तो भी वो पहले उसे अपने प्यारे कुत्ते का एल्बम दिखाएंगे उसके बाद ही फोन छूने देंगे। सुनिए मुश्ताक अहमद युसूफ़ी की किताब ज़रगुज़िश्त से एक मज़मून स्टोरीबॉक्स मे. साउंड मिक्स - अमृत रज़्जी

चचा छक्कन | स्टोरीबॉक्स | EP 36 14.05.2023

मोहल्ले के झगड़े की आवाज़ सुनकर चचा नीचे आए तो देखा कि मजमा लगा है। बोले, "अरे भई क्या मामला हो गया" एक साहब ने कहा, "अरे कुछ नहीं, मामला सुलट गया है" चचा बोले, "मगर फिर भी, ग़लती किसकी थी, ज़्यादती किसने की, कुछ तो बताइये" बात उनको फिर बताई गयी और इसी बताने-बताने में गली में फिर से लाठी-डंडे चलने लगे। सुनिए इम्तियाज़ अली ताज की कहानी - चचा छक्कन स्टोरीबॉक्स में.

स्विस बैंक में खाता हमारा | स्टोरीबॉक्स | EP 35 07.05.2023

हमने अपनी बीवी को खुश करने के लिए यूं ही कह दिया कि स्विस बैंक में हमारा एक ख़ूफ़िया खाता है। पर ग़लती ये हो गयी कि ये भी कह दिया कि किसी से कहना नहीं। दो दिन बाद मैं शहर की एक दुकान से मोज़े खरीद रहा था तो दुकानदार बोला, "ले लीजिए साहब, पैसे बाद में दे दीजिएगा जब स्विस बैंक से पैसा आ जाए" सुनिए मुजतबा हुसैन की कहानी - स्विस बैंक में खाता हमारा - स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से

फ़ोटोग्राफ़र | क़ुर्रतुल ऐन हैदर | स्टोरीबॉक्स | EP 34 30.04.2023

अब वो फ़ोटोग्राफ़र बहुत बूढ़ा हो चुका है और गेस्ट हाउस के फाटक पर टीन की कुर्सी डाले बैठा रहता है और सैलानियों की तस्वीरें उतारता है। पंद्रह साल बाद वो लड़की फिर उसी होटल में लौटी तो उस फ़ोटोग्राफ़र ने उसे गौर से देखा। वो अब कितमी बदल चुकी थी- सुनिए क़ुर्रतुल ऐन हैदर की लिखी कहानी 'फ़ोटोग्राफ़र' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. साउंड मिक्सिंग - नितिन रावत

फ़ोटोग्राफ़र | क़ुर्रतुल ऐन हैदर | स्टोरीबॉक्स | EP 34 30.04.2023

अब वो फ़ोटोग्राफ़र बहुत बूढ़ा हो चुका है और गेस्ट हाउस के फाटक पर टीन की कुर्सी डाले बैठा रहता है और सैलानियों की तस्वीरें उतारता है। पंद्रह साल बाद वो लड़की फिर उसी होटल में लौटी तो उस फ़ोटोग्राफ़र ने उसे गौर से देखा। वो अब कितमी बदल चुकी थी- सुनिए क़ुर्रतुल ऐन हैदर की लिखी कहानी 'फ़ोटोग्राफ़र' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. साउंड मिक्सिंग - नितिन रावत

वरना हम भी आदमी थे काम के | स्टोरीबॉक्स | EP 33 23.04.2023

खां साहब स्टैनली रोड पर आराम से खड़े गाड़ियों का चालान कर रहे थे कि उसी वक्त एक तेज़ रफ़्तार गाड़ी आई और उन्हें ठोकती हुई रुक गयी। खां साहब के चेहरे पर गुस्सा था लेकिन तभी एक मोहतरमा कार से निकलते हुए बोलीं, "आपको चोट तो नहीं लगी" खां साहब बोले, "नहीं, नहीं ऐसी कोई बात नहीं, ये तो हमारी खुशक़िस्मती थी कि हम यहां खड़े थे" सुनिए भगवती चरण शर्मा की कहानी 'वरना हम भी आदमी थे काम के' स्टोरीबॉक्स में.

मिर्ज़ा की पुरानी साइकिल | स्टोरीबॉक्स | EP 32 16.04.2023

मिर्ज़ा साहब ने कहा, "अरे भई मुझे पैसे नहीं चाहिए, पर तुम ज़बरदस्ती देना चाहो तो जो जी करे दे दो" मैंने चालीस रुपए उनकी जेब में डाल दिए। अगली सुबह नौकर ने बताया कि साइकिल आ गयी है। मैं मारे खुशी के बरामदे में पहुंचा तो देखा कि एक आजीब सी चीज़ सामने खड़ी है। पास जाकर देखा तो ख़ैर से, साइकिल ही थी लेकिन यक़ीनन पहिया और चर्खा की ईजाद से पहले की साइकिल लग रही थी - सुनिए पतरस बुख़ारी के मज़मून का एक हि...

बहादुर अल्ला दित्ता फ़ायरमैन | कॉमेडी | स्टोरीबॉक्स | EP 31 09.04.2023

राइटर ने गला खंखारते हुए कहा, "रात का वक्त था अचानक एक ऊंची इमारत की चौथी मंज़िल से आग की लपटें उठने लगीं। एक आदमी चिल्लाया - आग, आग, बचाओ, बचाओ" एडिटर ने कहा, "ये क्या... क्या आप अपनी कहानी के ज़रिए ये बताना चाहते हैं कि हमारी आवाम इतनी डरपोक है कि महज़ घर में आग लगने से चिल्लाने लगे। मैं आपकी जगह होता तो उस किरदार से कहलवाता - अजी बहुत देखी हैं ऐसी आग, अभी बुझा देंगे। या फिर ये कि 'आग-वाग कुछ नह...

The Classmate | Storybox | EP 30 02.04.2023

उस शख्स ने कहा कि मैं तुम्हारा तीस साल पुराना क्लासमेट हूं, मेरा नाम जय है। बोला, "याद है, हम दोनों गणित वाले सर को LCM कहा करते थे" मोहित को ये बात तो याद थी लेकिन उसे शक था कि ये वो जय नहीं है, क्योंकि वो तो गोरा, मज़बूत चेहरे का चुस्त दुरुस्त था... तीस साल में उसका चेहरा इतना तो नहीं बदल सकता। उसने तय किया कि वो स्कूल की पुरानी ग्रुप फोटो से उसके चेहरे का मिलान करेगा... सुनिए सत्यजीत राय की लिख...

हुए मर के हम जो रुस्वा | स्टोरीबॉक्स | EP 29 26.03.2023

इस सनीचर की शाम मिर्ज़ा मेरे साथ मेवा-शाह कब्रिस्तान में थे। कब्रिस्तान में सभी रंजीदा थे सिवाए मुर्दे के। मिर्ज़ा टहलने लगे और वहां की कब्रों को देखने लगे जिन पर मौत की तारीख, ओहदे और वल्दियत वगैरह लिखी थी। मैंने पूछा ये कब्र के पत्थर हैं कि नौकरी की दरख़्वास्त। किसी ने कहा कि मरहूम इतने ने इतनी लम्बी उम्र पाई कि उनके क़रीबी रिश्तेदार दस-पंद्रह साल से उनकी इंशोरेंस पालिसी की उम्मीद में जी रहे थे।...

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