Aaj Tak Radio
Padhaku Nitin
Padhaku Nitin is a casual and long conversation-based podcast where Aaj Tak Radio host Nitin talks to experts and discuss a wide range of topics like history, war, politics, policy, ideologies, cinema, travelling, sports, nature and everything that is interesting. A single episode of the show can be as enriching as reading four books. As we say in the podcast,Chaar kitaabe padhne jitna gyaan milega Padhaku Nitin mein. कब कोई हक़ीक़त से मिथक बन जाता है? क्यों कोई कहानी सदियाँ पार करके हमारे सिरहाने आ बैठती है? कुछ नाम तो इंसानों की कलेक्टिव मेमोरी का हमेशा के लिए हिस्सा बन जाते हैं लेकिन पूरी क...
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Seneste episode
29. okt. 2026
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Episoder
क्या भगत सिंह सावरकर को अपना आदर्श मानते थे?: पढ़ाकू नितिन, Ep 11 30.09.2021 1:36:18
शहीदे आज़म भगत सिंह का नाम सब जानते हैं, काम भी सबको पता है लेकिन ख्यालों के समंदर में डुबकी मारने से बचते हैं. वो उन चुनिंदा विचारक क्रांतिकारियों में हैं जिनकी पूजा सहजता से हो जाएगी लेकिन उतना ही मुश्किल उनके विचारों को लागू करना है. करीब सौ साल बीत गए हैं पर उनका लिखा और बोला हुआ अब भी धुंधलके में है. आज उससे काफी हद तक परत हटाने की कोशिश पढ़ाकू नितिन में हुई है. बैठकी में नितिन ठाकुर के साथ श...
भारत के शानदार Indie Pop Music की हत्या किसने की: पढ़ाकू नितिन Feat. पलाश सेन, Ep 10 23.09.2021 1:27:20
नब्बे के दशक में बहुत कुछ बदला. हिंदुस्तान में म्यूज़िक की तस्वीर भी बदली. टीवी स्क्रीन्स पर एक से एक म्यूज़िक बैंड और सोलो आर्टिस्ट दिखे. उस दौर को इंडी पॉप का गोल्डन पीरियड कहा गया. आज भी नब्बे का दौर लोगों के दिल से गुज़रा नहीं लेकिन सवाल ये है कि बीस साल पहले म्यूज़िक इंडस्ट्री पर राज करनेवाले तमाम चेहरे अब कहां गए? उस इंडी पॉप म्यूज़िक को किसने गायब कर दिया? क्या दुनिया भर में सोलो ऑर्टिस्ट्स...
नेहरू की पॉलिसी की वजह से चीन हम पर हावी हुआ?: पढ़ाकू नितिन, Ep 09 16.09.2021 1:36:34
तिब्बत हमेशा ही भारत और चीन के बीच टकराव की बड़ी वजह रहा लेकिन ये बीज अंग्रेज़ बो कर गए थे. ऐसा ही एक और लड़ाई का बीज उन्होंने अक्साई चिन में बोया जिसके चक्कर में 1962 की जंग हो गई, लेकिन बात इतनी सीधी नहीं है और ना इतने सीधे हैं भारत-चीन के रिलेशन. कम्युनिस्ट चीन की आक्रामकता, नेहरू की चीन-तिब्बत पॉलिसी, तिब्बत के कर्ता-धर्ताओं की लापरवाही बहुत कुछ है भारत-चीन के टकरावों में. आज इन्हीं की परतें ख...
सड़क पर किसी की जान न जाए, चाहते हैं तो ये सुनें: पढ़ाकू नितिन, Ep 08 09.09.2021 1:08:09
आप रोज़ाना घर से निकलते हैं और लौटते हैं लेकिन रोज़ करीब 400 लोग सुरक्षित घर नहीं लौट पाते. ये सड़क हादसों में मारे जाते हैं. आंकड़े कहते हैं कि इनमें से 30 तो बच्चे होते हैं. सालाना पांच लाख रोड एक्सीडेंट्स देखनेवाला हमारा देश इस मामले में दुनिया का टॉपर है. यकीनन कोई नहीं चाहेगा कि इस लिस्ट में हम नंबर वन पर बने रहें. आज पढ़ाकू नितिन में समझेंगे कि सड़कों पर एक्सीडेंट के सबसे बड़े कारण क्या हैं...
दुनिया में हर जगह सड़क और पुल बनाकर चीन को क्या मिलता है?: पढ़ाकू नितिन, Ep 07 02.09.2021 1:13:33
चीन आज वहाँ से बहुत आगे निकल आया है जहां कभी भारत के पीछे खड़ा था. इकोनॉमी की रेस में वो दुनिया का दूसरा बड़ा देश बन गया है लेकिन हमारी रफ़्तार पहले से धीमी है. आज के पढ़ाकू नितिन में जानेंगे कि उसने ये रास्ता कैसे तय किया, किसने उसका आर्थिक रूप इतना बदला कि वो वामपंथी नाम का रह गया और क्यों चीन घूम-घूमकर दुनिया भर में सड़कें और पुल बना रहा है. भारत के सामने सवाल भी है कि चीन के बढ़ते ख़तरे के साम...
100 साल तक भारतीय सैनिकों का आदेश मानने को मजबूर क्यों थे चीनी?: पढ़ाकू नितिन, Ep 06 26.08.2021 1:01:04
कुछ लोगों को चीन की तेज़ तरक़्क़ी हैरान करती है और कुछ देशों को डराती है. वर्ल्ड ऑर्डर में टॉप पर होने की चीनी चाहत ने दुनिया के थिंक टैक्स को मजबूर कर दिया है कि वो चीन का विज़न और उसका इतिहास दोनों समझें. चीन कभी आज की तरह बहुत विशाल और समृद्ध था लेकिन बीच में एक लंबा दौर आया जब उसने दुनिया से अपमान सहा. कुछ सयाने कहते हैं कि आज के चीन की गुंडई के पीछे उसी बेइज़्ज़ती का असर है. यहाँ तक कि एक सदी...
एक राष्ट्रपति को ज़हर देने की कोशिश ने कैसे फोड़ी अफ़ग़ानिस्तान की क़िस्मत?: पढ़ाकू नितिन, Ep 05 19.08.2021 1:40:10
19 अगस्त को अफ़ग़ानिस्तान अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है लेकिन आज उसके हालात अजीब हैं. कोई नहीं जानता कि वो अमेरिका से आज़ाद हुआ है या तालिबान का गुलाम. कुछ लोगों का मानना है कि तालिबान अब मैच्योर हो गया है तो किसी ने कहा कि सौ चूहे खानेवाली बिल्ली हज पर जाए तो भी भरोसा नहीं करना चाहिए. आज पढ़ाकू नितिन में हम तालिबान की पैदाइश के हालात, पतन, रिवाइवल की कहानी जानेंगे. साथ ही समझेंगे कि अफ़ग़ानिस्तान...
भारतीय रेल की ग़ज़ब कहानी, ट्रेन में भूत पहले आया या टॉयलेट?: पढ़ाकू नितिन, Ep 04 12.08.2021 1:29:06
हम भारतीयों का रेल से नाता थोड़ा जुदा है. ज़रा गहरा है. बचपन के तमाम किस्सों में कोई वाकया रेल से जुड़ा ज़रूर होगा. आज पढ़ाकू नितिन के चौथे एपिसोड में हम चलेंगे रेल के ही सफ़र पर. इस यात्रा में कई स्टेशन आएँगे. कौन कौन से हैं वो नीचे लिखे हैं, तो क़िस्से कहानियों के ज़रिए रेल की दिलचस्प कहानी को समझाने वाले हैं डॉ अरूप के चटर्जी जो रेल की संस्कृति और इतिहास पर तीन शानदार किताबों के लेखक हैं. इस बा...
क्यों अफ़ग़ानिस्तान में घुसना आसान है मगर निकलना कठिन: पढ़ाकू नितिन, Ep 03 05.08.2021 1:24:11
जब पड़ोस में शोर हो तो चर्चा लाज़िमी है. पढ़ाकू नितिन का तीसरा एपीसोड ऐसे ही पड़ोसी पर है जिसके घर में हंगामा मचा है. इसका नाम अफ़ग़ानिस्तान है. इस मुल्क के बारे में कहा जाता है कि यहाँ घुसना आसान है लेकिन निकलना मुश्किल. इस कहावत को ब्रिटेन और सोवियत यूनियन के बाद अमेरिका ने पुष्ट किया है. बात हो रही है मोहम्मद ज़ीशान से जिन्होंने अमेरिका में इंटरनेशनल अफ़ेयर्स की पढ़ाई की, मध्य एशिया के कई देशों...
एलियंस होते हैं या नहीं होते? दो मशहूर वैज्ञानिकों की बतरस: पढ़ाकू नितिन, Ep 02 29.07.2021 1:23:30
पढ़ाकू नितिन के दूसरे ऐपीसोड में बैठकी जमी है UFOs पर. कोई इन्हें उड़नतश्तरी कहता है तो कोई एलियंस. एक संवेदनशील और गंभीर मुद्दे को बहुत सालों तक हम मज़ाक़ में उड़ाते रहे लेकिन अब दुनिया के विकसित देश कमर कस के रिसर्च करने में जुट गए हैं. बात होगी इसरो के पूर्व वैज्ञानिक अनिल कुलकर्णी से जिनका दावा है कि उन्होंने UFO देखा है और साइंटिस्ट अमिताभ पांडे से जो बरसों से एलियंस थ्योरी ध्वस्त करते रहे है...
बाबर को 'मुग़ल' शब्द से नफ़रत क्यों थी?: पढ़ाकू नितिन, Ep 01 22.07.2021 1:21:38
ये ऐपीसोड है बाबर पर. क्यों वो हिंदुस्तान आया? क्यों वापस नहीं लौटा? बाबरनामा के कुछ पन्ने ग़ायब होकर कहां पहुँचे? बाबर को भारत में क्या पसंद था और क्या नापसंद? ऐसे तमाम सवालों के जवाब तलाशते हुए उसके दिमाग़ की सैर पर निकलेंगे अमेरिका की डेलावेयर यूनिवर्सिटी में पढ़ानेवाले प्रोफेसर मुक्तदर खान के साथ पढ़ाकू नितिन में. More in this episode: - बाबर ख़ुद मुग़ल था लेकिन क्यों उसे इस शब्द से सख़्त नफ़र...
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