Dharmendra Kumar

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Dharmendra Kumar

Kategori

News

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28. okt. 2025

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Episoder

तीन महीने के खर्चे जितनी बचत है बेहद जरूरी 29.01.2021

आपद काल में छोटी बचतें कितनी कारगर साबित हो सकती हैं, मीडियाभारती.नेट से बात करते हुए बता रहे हैं वित्त नियोजक अभिनव गुप्ता...

अब 'साइलेंट वोटर' ही खोलेगा सत्ता का द्वार 17.01.2021

चुनावी प्रक्रिया में, 'साइलेंट वोटर' के रूप में एक नया 'फिनोमिना' सामने आया है। मतदाताओं का यह वर्ग अपनी 'राय' जाहिर नहीं करता है, सिर्फ वोट करता है। मतदाताओं के इस नए रूप और व्यवहार के बारे में मीडियाभारती.इन से बात कर रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार ब्रज खंडेलवाल ।

निजता के नाम पर न बने दूरी 18.12.2020

निजता के नाम पर रिश्तों में दूरी बनाने से होने वाले नुकसानों का जिक्र कर रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार केशव चतुर्वेदी ...

भोजपुरी भाषा के उद्गम की कहानी 16.12.2020

भोजपुरी साहित्य की परंपरा संत कबीर दास, दरिया दास व तुलसी दास से लेकर भिखारी ठाकुर की रचनाओं तक विस्तारित है। माना जाता है कि संस्कृत की साक्षात पुत्री है भोजपुरी भाषा...। साहित्य समालोचक प्रमोद कुमार पांडेय बता रहे हैं, भोजपुरी भाषा के उद्गम की कहानी...

अजीब दोराहे पर अटक गया है मीडिया 16.12.2020

बीते कई राजनीतिक और सामाजिक प्रकरणों में रिपोर्टिंग से ऐसा लगने लगा है कि मीडिया अपनी मारक क्षमता कहीं खो बैठा है। मीडिया के सुर, लय और ताल के खो जाने से खिन्न ब्रज खंडेलवाल बता रहे हैं इसकी वजह...

कम आमदनी में भी ऐसे जारी रखें छोटे निवेश... 16.12.2020

कोरोना काल में, हालांकि, घरेलू निवेश करने की बात थोड़ी अटपटी तो लगती है लेकिन सतत छोटा निवेश किसी भी घर की अर्थव्यवस्था का एक अहम पहलू है। ऐसे समय में जब आमदनी कम हुई है, नौकरियां छूट रही हैं, फिर भी, छोटे-छोटे निवेश के जरिए इस प्रक्रिया को कैसे जारी रखा जा सकता है? इसी तरह के कई सवालों पर वित्त नियोजक अभिनव गुप्ता से बात कर रहे हैं मीडियाभारती.नेट के संपादक धर्मेंद्र कुमार...

समझिए एमएसपी का असली 'खेल' 16.12.2020

किसानों के संघर्ष की मुख्य वजह बना न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी आखिर है क्या? बहुत ही आसान भाषा में बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार प्रिय रंजन झा ...

एमएसपी को ‘लीगल’ करने से नहीं है कोई फायदा 15.12.2020

किसान सड़कों पर उतरकर नए कृषि कानून का विरोध कर रहे हैं। लेकिन, ये पंजाब के किसान हैं..., या पंजाब की सीमा से लगे हरियाणा और कुछ दूसरे इलाकों के...। यूपी, बिहार, महाराष्ट्र या कर्नाटक के किसान इस तरह का विरोध नहीं कर रहे हैं। क्यों नहीं कर रहे हैं, यह सवाल है। क्या पंजाब के किसान नए कृषि कानूनों को समझ नहीं पा रहे हैं? इसके विपरीत, केंद्र सरकार विरोध कर रहे इन किसानों को क्यों नहीं समझा पा रही है?...

‘लव जिहाद’ या महज बीजेपी का खुराफाती दिमाग! 15.12.2020

यूपी, मध्य प्रदेश और अब हरियाणा में भी सरकारों ने लव जिहाद पर कानून बनाए जाने के संकेत दे दिए हैं। कानून बन भी जाएंगे, लेकिन क्या वाकई लव जिहाद जैसा कुछ है भी या यह बीजेपी के खुराफाती दिमाग की महज उपज मात्र है? हाल ही में कुछ घटनाएं ऐसी भी हुईं जिनमें हिंदू वधू और मुस्लिम वरों के रिश्ते टूटे हैं लेकिन सामाजिक जमीन पर ये घटनाएं लव जिहाद के दायरे में आती भी हैं या नहीं...? साथ ही, क्या अपनी पहचान छु...

आ गया है एक्जिट पोल से पीछा छुड़ाने का समय 15.12.2020

बिहार चुनावों के परिणाम हमारे सामने आ चुके हैं... और, जैसे कि पिछले कई बार से एक्जिट पोल के नतीजे लगातार गलत आ रहे हैं, इस बार भी गलत ही साबित हुए। तो, क्या अब वक्त नहीं आ गया है कि एक्जिट पोल की इस 'बेवकूफाना' अवधारणा को उठाकर डिब्बे में बंद करके कहीं रख दिया जाए…? एक्जिट पोल की प्रासंगिकता और इससे जुड़े कई दूसरे सवालों पर मीडिया आलोचक और वरिष्ठ पत्रकार ब्रज खंडेलवाल से बात कर रहे हैं मीडियाभारती...

बिहार चुनाव परिणामों के क्या हैं मायने? 15.12.2020

बिहार में चुनावों के परिणाम आ चुके हैं। अब बिहार में राजनीतिक माहौल कैसा रहेगा और उसका केंद्र की राजनीति पर क्या असर पड़ने वाला है? इन्हीं सब बातों पर वरिष्ठ पत्रकार बिपिन तिवारी से बात कर रहे हैं मीडियाभारती.नेट के संपादक धर्मेंद्र कुमार ...

उत्तर और दक्षिण का सामाजिक विभाजन : मिथक और वास्तविकताएं 14.12.2020

पूरी दुनिया में उत्तर और दक्षिण के बीच श्रेष्ठता को लेकर द्वंद्व की बात की जाती है। मानवीय रंग से जुड़ी संवेदनाएं भी इस संघर्ष में अपनी भूमिकाएं निभाती रही हैं। आदिकाल से चली आ रही यह बहस भारतीय उपमहाद्वीपीय समाज में भी नजर आती है। इस सामाजिक विवाद के स्वरूप और जटिलताओं को समझने के लिए ह्यूमर टाइम्स की संपादक मुक्ता गुप्ता से बात कर रहे हैं मीडियाभारती.नेट के संपादक धर्मेंद्र कुमार …

सरकारें नहीं, समाज खत्म करेगा बढ़ती ‘संवेदनहीनता’ को 11.12.2020

समाज में संवेदनहीनता लगातार बढ़ती जा रही है। अस्पतालों में, पुलिस के थानों में, किसी सरकारी दफ्तर में या कहीं भी आप जाएं और संवेदनहीनता से दो-चार न हों, यह आज की भागमभाग भरी जिंदगी में संभव ही नहीं है। हमारे समाज में लगातार बढ़ रही ‘संवेदनहीनता’ के कई ऐसे ही पहलुओं पर वरिष्ठ पत्रकार केशव चतुर्वेदी से बात कर रहे हैं मीडियाभारती.नेट के संपादक धर्मेंद्र कुमार ...

‘बकवास’ ही नहीं, बढ़िया सिनेमा भी बनता है भोजपुरी में 11.12.2020

... एक रात को दो बजे, जब अचानक नींद खुल गई तो टीवी से 'उलझ' बैठे और चैनल सर्फ करते-करते 'भोजपुरी टेरीटरी' तक जा पहुंचे। किसी मूवी चैनल पर निरहुआ की फिल्म 'बिदेसिया' आ रही थी। भोजपुरी में ऐसी फिल्में भी बनती हैं, यह जानकर अचंभा हुआ। नौटंकी विधा को फिल्म विधा के साथ गूंथकर बनाई गई यह फिल्म जब देखना शुरू किया तो फिर चैनल बदल ही नहीं पाए। जरूरी नहीं है कि मिठास और श्रम की भाषा भोजपुरी में 'बकवास' फिल्...

बचपन से ही क्यों न दी जाए कानून की शिक्षा..! 11.12.2020

हमारे देश में छात्रों के लिए विधिक शिक्षा का प्रावधान स्नातक स्तर पर ही होता है। हालांकि, इससे पहले, विद्यार्थियों को नागरिक शास्त्र के रूप में, थोड़ी-बहुत जानकारी जरूर दी जाती है, लेकिन इसे पर्याप्त कतई नहीं कहा जा सकता। इसका दुष्परिणाम यह होता है कि वयस्क होने तक भी हमारे विद्यार्थियों के पास अपने ही देश के कानून के बारे में मूलभूत जानकारियां तक नहीं होती हैं। जब ये बच्चे एक नागरिक के रूप में को...

क्या बीजेपी नीतीश कुमार को 'किनारे' लगाने की कोई चाल चल रही है? 10.12.2020

बिहार में चुनावी सरगर्मियां बहुत तेज हो गई हैं। दल-बदल और राजनीतिक दलों में तोड़म-फोड़ अपने चरम पर है। नए-नए प्रयोग हो रहे हैं। चिराग पासवान एनडीए में हैं, लेकिन नहीं हैं। वह नीतीश कुमार के साथ भी नहीं हैं। एनडीए उनके दल लोक जनशक्ति पार्टी को अपना घटक मानता है, लेकिन चुनावी अभियान में मोदी के फोटो और नाम का इस्तेमाल करने से रोक भी रहा है। क्या इस सबके पीछे बीजेपी की नीतीश कुमार को किनारे लगाने की...

पक्ष, विपक्ष और मीडिया को अपने गिरेबां में झांकने की जरूरत 10.12.2020

हाथरस में विपक्षी दलों के नेताओं और मीडिया को आखिर क्यों रोका गया? इस मामले में पक्ष, विपक्ष और मीडिया अपनी भूमिका किस तरह निभा पाए, इस पर पूरी चर्चा होनी चाहिए। इस पूरे प्रकरण में सभी संबद्ध पक्षों का कितना लाभ हुआ, इसका आंकलन करना बेहद जरूरी है। इसी विषय पर वरिष्ठ पत्रकार ब्रज खंडेलवाल के साथ चर्चा कर रहे हैं मीडियाभारती.नेट के संपादक धर्मेंद्र कुमार ...

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