Shashi Bhooshan

Hamari Aavaaz हमारी आवाज़

Listening Platform with Shashi Bhooshan: Hamari Aavaaz शशिभूषण के साथ सुनने का साझा मंच: हमारी आवाज़

Forfatter

Shashi Bhooshan

Kategori

Education

Seneste episode

17. feb. 2026

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Episoder

रज़िया सज्जाद ज़हीर की कहानी नमक 29.09.2020

नमक एक कालजयी कहानी है। ऐसी कहानी जो भारतीय उपमहाद्वीप के लोगों के दिल में बसी अपने वतन के लिए मोहब्बत की अमिट दास्तान है। निःशब्द कर देने वाला और दिल को दरिया बनाने वाला अविस्मरणीय मार्मिक क़िस्सा। इस कहानी की व्याख्या नहीं हो सकती। इसका मूल्यांकन मोहब्बत को आज़माना होगा। इस कहानी का एक-एक वाक्य दिल को आंखों से होकर ज़बान की ओर उमड़ता दाद का झरना बना देता है। कहानी जिसके वाक्य दर वाक्य जज़्बात और इंसा...

शेखर जोशी की कहानी गलता लोहा 28.09.2020

'गलता लोहा' शेखर जोशी की प्रतिनिधि कहानियों में से एक है। कहानी कला की दृष्टि से यह कहानी एक श्रेष्ठ कहानी है। 'गलता लोहा' समाज के जातिगत विभाजन को गहराई और कई कोणों से उदघाटित करती है। यह कहानी श्रम आधारित बंधुता सम्मान समता की ओर प्रवृत्त करती है।

मेरे मरते मर जायेगा ईश्वर भी : फिरोज़ ख़ान 03.07.2020

फिरोज़ ख़ान की कविता 'मेरे मरते मर जायेगा ईश्वर भी' से हमारा सामना ओझल रहने वाले एक दारुण सत्य से होता है। वह सत्य क्या है ? इंसान के मरने पर वे सब मरते हैं, जो उसके भीतर जीवित होते हैं। यहां तक कि माँ भी मरती है और ईश्वर भी मर जाता है।

रामवृक्ष बेनीपुरी का रेखाचित्र बालगोबिन भगत 03.07.2020

रामवृक्ष बेनीपुरी द्वारा लिखित रेखाचित्र 'बालगोबिन भगत' एक कबीरपंथी गृहस्थ साधु की खरी दास्तान है। इंसानियत से भरी अनूठी सच्ची जीवन कथा। सामाजिक सोद्देश्यता और व्यक्तिगत त्याग के संयोग से निर्मित जिसमें श्रम की आभा है एक साधारण इंसान की इससे विलक्षण अमिट कथा दूसरी हो नहीं सकती। हम जैसे- जैसे बालगोबिन भगत के स्मृति शेष जीवन में प्रवेश करते हैं मन निर्मल, कर्मठ और उदात्त होने लगता है। इस अप्रतिम रेख...

उजाले में आजानुबाहु : दिनेश कुशवाह 30.06.2020

दिनेश कुशवाह की लंबी कविता 'उजाले में आजानुबाहु' विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र कहे जाने वाले आज के लुटते पिटते भारत में नाना प्रकार के वक्तव्यों का कच्चा चिट्ठा है। बड़बोले इस कविता का बीज शब्द है। कविता की सफलता यह है कि बड़बोलों में देश डिकोड होता है।

गुंग महल : विष्णु खरे 28.06.2020

'गुंग महल' विष्णु खरे की ही नहीं हिंदी की प्रतिनिधि लंबी कविताओं में से एक है। यह कथा कविता प्रतिपादित करती है कि ईश्वर या अल्लाह की अपनी कोई भाषा नहीं होती, बल्कि भाषा इंसानों की होती है। संसार में क़ौम अलग-अलग हो सकती हैं, मज़हब अलग-अलग हो सकते हैं, मगर ज़बान और इंसानियत अभिन्न हैं। भाषा और मनुष्यता एक ही हैं।

नेताजी का चश्मा : स्वयं प्रकाश 28.06.2020

'नेताजी का चश्मा' कभी न भूलने वाली कहानी है। ऐसा लगता है जैसे कथाकार स्वयं प्रकाश ने बातों ही बातों में मर्म, विनोद और सरोकारों से रचा एक सहज अविस्मरणीय आख्यान बुन दिया है। यह कहानी जितनी अनूठी, दिलचस्प है उतनी ही मार्मिक और उम्मीद भरी है। यह कहानी सचमुच की देशभक्ति का एक अमिट पाठ है।

पतंग : आलोकधन्वा 27.06.2020

आलोकधन्वा की कविता, 'पतंग' बच्चों, पतंग और शरद के बहाने जीवन, प्रकृति, धरती, बचपन, उत्साह, सपनों, संघर्ष, जिजीविषा, सामूहिकता, नव सृजन और मनुष्यता की रागात्मक अभिव्यक्ति है। इस कविता में कोमलतम अनुभूतियां और श्रेष्ठतम स्वप्न-संकल्प साथ-साथ प्रकट हुए हैं।

प्रेमचंद के फटे जूते : हरिशंकर परसाई 26.06.2020

'प्रेमचंद के फटे जूते' अत्यंत मार्मिक और अविस्मरणीय निबन्ध है। इसमें प्रेमचंद के प्रति सम्मान, हार्दिकता और समय समाज के प्रति व्यंग्य श्रेष्ठतम रूप में प्रकट हुए हैं। बहुत कम शब्दों में हरिशंकर परसाई ने महान कथाकार प्रेमचंद के संघर्षों, सादगी और अपराजेय मनुष्यता को सर्वथा प्रकट कर दिया है। यह निबन्ध प्रेमचंद और परसाई दोनों की ही लेखकीय खूबियों का आईना है। यह श्रद्धा स्मरण एक कृति है।

गुब्बारे वाला : कविता जड़िया 19.06.2020

पिछले दिनों मध्य प्रदेश के शाजापुर से एक ख़बर आई कि फुग्गे और गुब्बारे बेचने वाले एक ग़रीब ने आत्महत्या कर ली। कारण छोटा सा था कि गलियों में उसके फुग्गे और गुब्बारे कोई नहीं ख़रीद रहा था। कोरोना संक्रमण के डर से शायद लोग सोचते होंगे कि ये फुग्ग्गे या गुब्बारे मुँह से फुलाये गए हैं। बच्चों को कोरोना रोग लग सकता है। इस बात से गुब्बारे वाले की रोज़मर्रा की मामूली आमदनी बंद हो गयी। उसके घर में खाने के इंत...

आधा गाँव की भूमिका : राही मासूम रज़ा 14.06.2020

महान उपन्यासकार राही मासूम रज़ा के कालजयी उपन्यास 'आधा गाँव' की भूमिका

2020 में गाँव की ओर : विष्णु नागर 13.06.2020

कविता : 2020 में गाँव की ओर. कवि: विष्णु नागर.

हमें गोली से उड़ा दिया जाए : भगत सिंह 12.06.2020

हमें गोली से उड़ा दिया जाए: भगत सिंह

हिमालय और हम 12.06.2020

कविता : हिमालय और हम. कवि : गोपाल सिंह नेपाली.

Hamari Aavaaz हमारी आवाज़ 07.06.2020

नमस्कार! हमारी आवाज़ में आप सबका स्वागत है...

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