Radio Playback India
Ek Geet Sau Afsane
Every song has its own journey once it is released for the audiences but there are many back stories behind every song about which we generally remained unaware, so this series is for bringing to you all such back stories related to many favorite songs of our times, that are very much part of our life, stay tuned with Sujoy Chatterjee and Sangya Tandon for a weekly dose of Ek Geet Sau Afsane
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4. jun. 2024
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Episoder
"क़स्मे, वादे, प्यार, वफ़ा, सब बातें हैं....."गीत को बनाते हुए एक मकाम पे जाकर सबके रोंगटे क्यों खडे हो गए 18.05.2021 10:18
आलेख _ सुजॉय चटर्जी स्वर - शुभ्रा ठाकुर प्रस्तुति - संज्ञा टण्डन कुछ जाने-पहचाने, और कुछ कमसुने फ़िल्मी गीतों की रचना प्रक्रिया, उनसे जुड़ी दिलचस्प बातें, और कभी-कभी तो आश्चर्य में डाल देने वाले तथ्यों की जानकारियों को समेटता है 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' का यह स्तंभ 'एक गीत सौ अफ़साने'। आज की कड़ी में प्रस्तुत है 1967 की चर्चित फ़िल्म ’उपकार’ के प्रसिद्ध गीत "क़समें वादे प्यार वफ़ा सब बा...
"छलिया मेरा नाम.." क्यों मुखड़े और तीनों अन्तरों के बोलों में बदलाव करने पड़े गीतकार क़मर जलालाबादी को? 11.05.2021 9:16
राज कपूर की मशहूर फ़िल्म ’छलिया’ और इसके शीर्षक गीत "छलिया मेरा नाम" के बारे में कौन नहीं जानता! पर क्या आपको पता है कि यह गीत जब लिखा गया था, तब इसके मुखड़े और अन्तरों के बोल काफ़ी अलग थे। क्यों चली थी सेन्सर बोर्ड की कैंची इस भोले-भाले से गीत पर? क्यों मुखड़ा और तीनों अन्तरों के बोलों में बदलाव करने पडे गीतकार क़मर जलालाबादी को? और इसी फ़िल्म में रफ़ी साहब का एक गीत क्यों रखा गया और फ़िल्म के अन्त में श...
"दिल आने के ढंग निराले हैं.." एक ही गीत, दो फिल्मों में.. और ये गीत लता मंगेशकर ने गाने से क्यों किया इनकार? 04.05.2021 9:39
'एक गीत सौ अफ़साने' की सातवीं कड़ी में आज प्रस्तुत है एक ऐसे गीत की कहानी जिसके दो रूप हैं। एक रूप 1949 की फ़िल्म ’सिंगार’ में सुनने को मिला तो दूसरा रूप 1948 की फ़िल्म ’मेरी कहानी’ में। ... 1947 में जब देश का बंटवारा हुआ, चारो ओर अफ़रा-तफ़री मची हुई थी। बहुत से कलाकार सरहद के इस पार - उस पार हो गए थे। ऐसे में एक गीत बना, जो दो दो फ़िल्मों में सुनने को मिला। दोनों के गीतकार एक पर संगीतकार अलग। एक स...
"हरि दिन तो बीता शाम हुई.." गुलज़ार और पंचम ने कैसे राज़ी करवाया राजकुमारी जी को इतने सालों के बाद माइक के सामने आने के लिए? 27.04.2021 9:19
आपने फ़िल्म ’किताब’ में राजकुमारी की गायी लोरी "हरि दिन तो बीता शाम हुई" ज़रूर सुनी होगी। इतने वर्षों बाद कैसे और क्यों मिला गायिका राजकुमारी को फ़िल्म में गाने का मौका? गुलज़ार और पंचम ने कैसे राज़ी करवाया राजकुमारी जी को इतने सालों के बाद माइक के सामने आने के लिए? और एक अन्य गीत की रिकॉर्डिंग् पर राजकुमारी जी को कोरस में गाते देख क्यों नम हो गई थीं नौशाद साहब की आँखें? आज के इस अंक में राजकुमारी जी स...
मेरो गाम काठा पारे... क्या सम्बन्ध है इस गीत का प्रिन्स चार्ल्स के साथ? 20.04.2021 9:41
'एक गीत सौ अफ़साने' की पांचवीं कड़ी में आज प्रस्तुत है फ़िल्म ’मंथन’ के अनोखे गीत "मेरो गाम काठा पारे" से सम्बन्धित जानकारी ... ...आपने फ़िल्म ’मंथन’ का गीत "मेरो गाम काठा पारे" बहुत बार सुना होगा, पर क्या आपको पता है कि इस गीत के बनने की कहानी? फ़िल्म में गीत की गुंजाइश ना होते हुए भी क्यों रचा गया यह गीत? कैसे रचा गया? इस गीत के एक हिस्से की रिदम को तेज़ क्यों किया गया? क्या सम्बन्ध है इस गीत का प्रिन...
"नीले गगन के तले धरती का प्यार पले" - क्यों नहीं है इस गीत के मुखड़े और अन्तरे की धुन में फ़र्क़? 13.04.2021 7:15
आपने फ़िल्म ’हमराज़’ का गीत "नीले गगन के तले" बहुत बार सुना होगा, पर क्या आपको पता है कि इस गीत को सिर्फ़ एक ही धुन पर क्यों रचा गया था? यानी मुखड़ा और अन्तरा एक ही धुन पर क्यों रखा गया? और उस दौर में बी. आर. चोपड़ा की फ़िल्मों के सारे गाने अचानक मोहम्मद रफ़ी की जगह महेन्द्र कपूर को कैसे मिलने लगे? चलिए आज इन सवालों पर से परदा उठाया जाए!
"सैगल ब्लूज़" – क्यों और कैसे पुनः जिंदा हुये के.एल.सहगल 2011 में 06.04.2021 10:02
हम रोज़ाना रेडियो पर, टीवी पर, कम्प्यूटर पर, और न जाने कहाँ-कहाँ, जाने कितने ही गीत सुनते हैं, और गुनगुनाते हैं। ये फ़िल्मी नग़में हमारे साथी हैं सुख-दुख के, त्योहारों के, शादी और अन्य अवसरों के, जो हमारी ज़िन्दगियों से कुछ ऐसे जुड़े हैं कि इनके बिना हमारी ज़िन्दगी बड़ी ही सूनी और बेरंग होती। पर ऐसे कितने गीत होंगे जिनके बनने की कहानियों से, उनसे जुड़ी दिलचस्प क़िस्सों से आप अवगत होंगे? बहुत कम, है न? कुछ...
Choti si kahani se, Barishon ke pani se छोटी सी कहानी से, बारिशों के पानी से 30.03.2021 8:08
"छोटी सी कहानी से, बारिशों के पाने से" - क्यों इस गीत की रिकॉर्डिंग् पर गुलज़ार साहब बेचैन हो उठे? 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के स्तंभ 'एक गीत सौ अफ़साने' की दूसरी कड़ी में आज जानिये गुलज़ार की मशहूर फ़िल्म ’इजाज़त’ के गीत "छोटी सी कहानी से, बारिशों के पानी से..." के बारे में ... ज़रा सोचिए दोस्तों कि राहुल देव बर्मन ने गुलज़ार साहब के बोलों पर एक धुन बनाई, पर गीत कम्पोज़ हो जाने के बाद गुलज़ार साहब को उन्हों...
Ghoonghat Kii Aad Se Dilbar Ka घूंघट की आड़ से दिलबर का 23.03.2021 7:37
"घुंघट की आढ़ से दिलबर का...", क्यों दिल के क़रीब है यह गीत अलका याज्ञनिक के दोस्तों, हम रोज़ाना रेडियो पर, टीवी पर, कम्प्यूटर पर, और न जाने कहाँ-कहाँ, जाने कितने ही गीत सुनते हैं, और गुनगुनाते हैं। ये फ़िल्मी नग़में हमारे साथी हैं सुख-दुख के, त्योहारों के, शादी और अन्य अवसरों के, जो हमारी ज़िन्दगियों से कुछ ऐसे जुड़े हैं कि इनके बिना हमारी ज़िन्दगी बड़ी ही सूनी और बेरंग होती। पर ऐसे कितने गीत होंगे जिनके...
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